श्री महाभारत कथा (511)-- समीक्षा

 


पोस्ट --( 511 )- -अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा ( १११ )-- अर्जुन और अश्वत्थामा के ब्रम्हास्त्रो को नारद जी और व्यास जी ने टकराने से आकाश में रोका - अर्जुन ने अपने ब्रम्हचर्य शक्ति से अपना ब्रम्हास्त्र वापस ले लिया परन्तु अश्वत्थामा ऐसा नहीं कर सका और उसने उसे उत्तरा के गर्भ पर चलाया । 

     चार विवाहों के बाद भी अर्जुन ब्रम्हचर्य शक्तियों के स्वामी आखिर क्यों और कैसे ? अश्वत्थामा को निरपराध हजारों प्राणियों की हत्या करने तथा गर्भस्थ शिशु को मारने का इतना भयानक दण्ड मिला , कि रूह भी कांप जाए !

      **** जब अश्वत्थामा श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र को उठा भी न सका !!

       🚫 अश्वत्थामा की तलाश में जाते समय श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया -" इस अश्वत्थामा के पास जो ब्रम्हास्त्र है उससे वह सम्पूर्ण #पृथ्वी को भी #भस्म कर सकता है ; वह बहुत ही असहनशील है । द्रोणाचार्य ने अपने पुत्र अश्वत्थामा को इस ब्रहास्त्र की शिक्षा देते समय चेताया था कि बहुत आपत्ति पड़ने पर भी इसका प्रयोग न करना तथा मनुष्यो पर तो कभी भूल कर भी न छोड़ना ""--

  श्रीकृष्ण पुनः बोले ~~~~

        🍎 "" जब तुम लोग वनमे थे ,अश्वत्थामा मेरे ( श्री कृष्ण ) के पास आया था और उसने मुझसे अपने ब्रह्मास्त्र जिसे उसके पिता द्रोणाचार्य ने भीषण तपस्या करके अगस्त्य मुनि से प्राप्त किया था के बदले में मेरा सुदर्शन चक्र मांगा था । मैने उससे कहा - यह मेरे धनुष , शक्ति , चक्र और गदा पड़े है , तुम जिसे उठा सको और प्रयोग कर सको उठा लो , बदले में मुझे कुछ नही चाहिए -- इसने मेरा एक हजार अरों वाला और वज्र की नाभि वाले चक्र को उठाना चाहा , परंतु अपनी सारी ताकत लगाने के बाद भी उसे नही उठा सका था ,यह बड़ा क्रोधी ,दुष्ट ,चंचल औऱ क्रूर स्वभाव वाला है - ""

      🎈 भीमसेन और उनके पीछे भगवान श्री कृष्ण ,युधिष्ठिर और अर्जुन के साथ गंगा तट पर पंहुचे, वहां श्री व्यास जी और अनेको ऋषियों के साथ क्रूरकर्मा अश्वत्थामा मौजूद था -- सभी को देखकर अश्वत्थामा ने ब्रम्हास्त्र का चिंतन किया और एक सींक उखाड़कर ,ऐसा संकल्प करके कि "" पृथ्वी पाण्डव हीन हो जाये "" उसने क्रोध में भरकर , सींक में आवेशित वह प्रचंड अस्त्र छोड़ दिया --

      🚫 इससे उस सींक में आग पैदा हो गयी और वह प्रलयकाल की अग्नि के समान तीनो लोको को भस्म करने लगी । तब श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि द्रोणाचार्य का सिखाया हुआ ब्रम्हास्त्र तुम्हारे ह्रदय में भी मौजूद है तुरन्त उसका प्रयोग करके इसे शांत करो -- तब अर्जुन ने " आचार्य पुत्र का मंगल हो "" और फिर इस ब्रम्हास्त्र से शत्रु का ब्रम्हास्त्र शांत हो जाये " ऐसा संकल्प करके अपना ब्रम्हास्त्र भी छोड़ दिया --


         🎆 उन दोनों ब्रम्हास्त्रो के आकाश में टकराने से बहुत भारी #गर्जना होने लगी , और उनके तेज से हजारो उल्काये गिरने लगी तब देवर्षि नारद और श्री व्यास जी , सम्पूर्ण लोको के हित की कामना से ,दोनो अश्त्रो को शांत कराने के लिए ,उनके #बीच मे #खड़े हो गए और बोले -

        🚫 "" पहले भी बहुत से व्यक्तियों को इस दिव्य ब्रम्हास्त्र का ज्ञान रहा है परंतु उन्होंने इसका कभी भी प्रयोग नही किया , तुम लोगो ने ऐसा दुःसाहस क्यो किया ? -- तुरन्त इन्हें वापस लो -- उस अस्त्र को लौटा लेंना देवताओ के लिए भी बहुत कठिन था -- असंयमी पुरुष उसे छोड़ तो सकता था परंतु वापस लेने का सामर्थ्य केवल ब्रम्हचारी में ही था -अगर ब्रम्हचर्य हीन पुरुष उसे एक बार छोड़कर फिर लौटाने का प्रयत्न करता तो वह अस्त्र कुटुम्ब सहित उस व्यक्ति का सर काट लेता था -


       🚫 अर्जुन ने उस ब्रम्हास्त्र को तुरंत सफलता से वापस लौटा लिया --- 4 विवाह करने के बाद भी अर्जुन में ब्रम्हचर्य की असीम शक्ती ?? आखिर कैसे ? -- 

        १- अर्जुन मन से भी असंयम की बात नही सोचता था । 

        २- स्वर्ग में उसने सर्वसुन्दरी अप्सरा का प्रेम निवेदन अस्वीकार कर , उसका एक वर्ष के लिए नपुंसक होने का श्राप स्वीकार करना बेहतर समझा था --

        ३- अर्जुन सत्यवादी ,शूरवीर , ब्रम्हचारी और गुरु की आज्ञा का पालन करने वाला था इस लिए अपने ब्रम्हास्त्र को वापस लेने में समर्थ हुआ ।


        🌋 व्यास जी बोले " जहां एक #ब्रम्हास्त्र को दूसरे #ब्रम्हास्त्र से #दबा दिया जाता है वहां 12 वर्ष तक वर्षा नही होती ,अर्जुन ने इसीलिए अपना अस्त्र वापस ले लिया है अब अश्वत्थामा तुम भी वापस ले लो परंतु तमाम प्रयत्न करने के बाद भी अश्वत्थामा ऐसा न कर सका तब उसने उस अस्त्र को अभिमन्यु की पत्नी #उत्तरा के #गर्भ पर छोड़ दिया जिससे पांडव #वंश #निर्मूल हो जाये ।

           अश्वत्थामा को निर्दोष हजारों योद्धाओं को धोखे से मारने तथा गर्भस्थ शिशु की हत्या करने के भयँकर पाप की सजा -- अगली पोस्ट में ---

          *********** अपनी बात ******

       🍎 यद्यपि आधुनिक विज्ञान ने अत्यंत विनाशकारी अस्त्र बना लिये है परंतु पुराने समय के ब्रम्हास्त्र जिसे #वापस भी लिया जा सके और किसी एक प्राणी , #एक #समूह या #गर्भ पर छोड़ा जा सके , यह उस समय के मन्त्र आधारित सश्त्रो से ही सम्भव था , कलयुग के कल यानी यंत्र आधारित शश्त्रो से नही --


       🍎 ब्रम्हचर्य की शक्तियों से सम्पन्न होने के लिए अविवाहित होना आवश्यक नही है - मन पर पूर्ण नियंत्रण होना , स्वप्न में भी असंयम की बात न सोचना , इसके लिए आवश्यक है --


        🍎 निर्दोष मानवो का धोखे से वध करने और --- बिना जन्मे गर्भस्थ बालक की भ्रूण हत्या करने --- की कितनी भयंकर सजा निश्चित है , जो अश्वत्थामा को मिली -- जिसे सुनकर रूह भी कांप जाएगी --------------

       शेष अगली पोस्ट में -------

 **** क्रमशः ********* राम नाथ गुप्त कन्नौज ****************

टिप्पणियाँ