महाभारत कथा (510) अश्वत्थामा द्वारा पान्डवों के सम्पूर्ण शिविर नाश


पोस्ट (510) अथ श्री 
महाभारत कथा -- समीक्षा - ( ११० ) सौप्तिक पर्व - अश्वत्थामा द्वारा पान्डवों के सम्पूर्ण शिविर नाश --

       🚫 अश्वत्थामा अपने दोनों साथियो सहित रात्रि में ही पांडवो सहित उनके सभी सहयोगियों को धोखे से मारने के लिए रात्रि में ही पांडव शिविर पर पंहुचे । वहां केवल पांचो पांडवो और श्री कृष्ण और सात्यकि को छोड़कर सभी विजयी योद्धा , द्रोपदी के पांचों पुत्रो सहित , सेनापति द्रष्टद्युम्न और युद्ध मे बचे वीर युद्ध की थकान के कारण गहरी निद्रा में सो रहे थे - 

       🎈अश्वत्थामा ने शिविर द्वार पर भयानक वेश में भगवान #रुद्र को देखा जिनके हाथों में तरह तरह के अस्त्र सुशोभित थे और उनके मुख से अग्नि की ज्वालायें निकल रही थी- उनके तेज की किरणों से शंख चक्र और गदा धारण करने वाले सैकड़ो हजारो विष्णु प्रकट हो जाते थे -

       🚫 उन रुद्र को हटाने के लिए अश्वत्थामा ने उनपर दिव्यास्त्रों का प्रहार किया परंतु रुद्र पर सभी आयुधो का कोई प्रभाव नही हुआ । तब अश्वत्थामा ने रुद्र की कातर भाव से स्तुति की और उनकी शरणागति होकर प्राण त्याग करने के लिए बैठ गया । तब रुद्र भगवान उसकी स्तुतियो से प्रसन्न होकर हंस कर बोले -

       🎆 ""श्री कृष्ण ने हर प्रकार से यथोचित मेरी आराधना की है इस लिए मैने अब तक पांचालों की रक्षा करके उनका सम्मान किया है ; किंतु आज #कालवश यह सब #निस्तेज हो गए है ,अब इनका जीवन शेष नही है । इसे कहकर भगवान शंकर ने अश्वत्थामा को एक तेज तलवार दी और अपने को #अश्वत्थामा में #लीन कर लिया -- अब वह अश्वत्थामा अत्यंत तेज सम्पन्न हो गया -


        🚫 कृपाचार्य और कृतवर्मा शिविर के द्वार पर खड़े हो गए और अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडव सेनापति द्रष्टद्युम्न ,द्रोपदी के पांचो पुत्रो सहित वहां मौजूद हजारो सैनिको सहित सभी राजाओ, वीरो ,सेवको हाथी घोड़ा आदि सभी को #रुद्रास्त्र से निरीहतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया 

        🚫 इनमे 10000 पैदल सैनिक , 5000 घुड़ सवार सैनिक 2000 रथी और 700 हाथी थे सभी मारे गए --सारे शिविर को आग के सुपुर्द कर दिया ।

         🍎 आधुनिक वैज्ञानिक शब्दों में परमाणु बम के समान कोई अस्त्र का प्रहार करके एकाएक सम्पूर्ण पांडव शिविर को नष्ट कर दिया ।


       🌐 फिर अश्वत्थामा ,कृपाचार्य और कृतवर्मा के साथ मरणासन्न दुर्योधन के पास गए और उसे अपने द्वारा किये गए अमानवीय क्रूर कर्म को बताया । उसने बताया कि अब पांडव पक्ष में केवल 7 व्यक्ति , पांचो पांडव ,श्री कृष्ण और सात्यकि जिन्हें श्री कृष्ण शिविर के बाहर नदी तट पर ले गए थे वे - तथा कौरव पक्ष में केवल वही तीनो जिंदा बचे है --

         🍎 मन को शांति देने वाली इस बात को सुनकर दुर्योधन को कुछ चेत हो गया और उसने अश्वत्थामा की भूरि भूरि #प्रशंसा की और कहा इससे मैं आज निश्चय ही अपने को इंद्र के समान समझता हूँ अब स्वर्ग में हमारी तुम्हारी भेंट होगी और यह कहते हुए दुर्योधन ने अपने प्राण त्याग दिए -- 


         🚫 ध्रतराष्ट्र को सजीव युद्ध का समाचार सुनाते हुए - संजय की व्यास जी प्रदत्त दिव्य दृष्टि ---दुर्योधन की मृत्यु , युद्ध समाप्ति के साथ ही --नष्ट हो गयी -- ध्रतराष्ट्र अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर एकदम चिंता में डूब गए और लंबे लम्बे लम्बे गर्म श्वास लेने लगे ।

          ( श्री मद भागवत में इस कथा को कुछ परिवर्तित रूप में दिया गया है )

         🎆 पांडवो के शिविर में सारी सेना में से किसी तरह बच कर भागे एकमात्र जीवित व्यक्ति ,सेनापति द्रष्टद्युम्न के सारथी ने रात बीतने पर युधिष्ठिर को सारे विनाश की सूचना दी - शोक से व्याकुल पांचो पांडव और द्रोपदी घटनास्थल पर पंहुचे -अपने पांचो पुत्रो और दोनो भाइयो शिखंडी और द्रष्टद्युम्न की क्रूर हत्या से विव्हल होकर द्रोपदी ने युधीष्ठिर से अश्वत्थामा से बदला लेने और आज ही उसे मार डालने की प्रार्थना की तथा यह भी कहा कि जब तक पापी नही मारा जाता है वह वही आजीवन अनशन व्रत करेगी -- द्रोपदी बोली की उसे पता चला है कि अश्वत्थामा के सिर में जन्म से ही एक दिव्य मणि है - उसे मारकर वह दिव्य मणि निकाल लाइये ।

         फिर द्रोपदी ने भीम सेन से प्रार्थना की -- भीमसेन द्रोपदी के दारुण विलाप और दुख को सह न सके और नकुल को सारथी बनाकर , अश्वत्थामा के रथ के निशान को देखते हुए तेजी से उसका पीछा करते चल पड़े 


        🍎 तभी श्री कृष्ण ने युधीष्ठिर से कहा कि आप सब कैसे शांत बैठे है -- अश्वत्थामा के पास " ब्रम्हास्त्र " है और वह असहनशील है - यद्यपि उसके पिता द्रोणाचार्य ने उसे इस महाविनाशकारी अस्त्र की शिक्षा देते हुए इसे कभी प्रयोग न करने को कहा था परंतु वह बहुत क्रोधी ,दुष्ट और चंचल स्वभाव का है ,इस लिए अभी भीमसेन के जीवन की रक्षा करना बहुत आवश्यक है -      

        ऐसा कहते हुए श्री कृष्ण , सारे अस्त्र शस्त्र लेकर ,अर्जुन और युधिष्ठिर के साथ रथ पर बैठ करके

बहुत तेजी से चलकर गंगा जी के तट पर पंहुचे जहां अश्वत्थामा श्री व्यास जी के आश्रम में मौजूद था ।

  **************** अपनी बात *********

           🚫 एक अकेले अश्वत्थामा द्वारा हजारो वीरो का घोड़ो हाथियों सहित पासुपताश्त्र से वध -- अगर आधुनिक सन्दर्भ में देखे तो पशुपताशस्त्र शायद आधुनिक हाइड्रोजन बम की तरह ही रहा हो सकता है ।

            🚫 द्वार पर मौजूद रुद्र - #महाकाल ही थे - जिनके प्रभाव से अश्वत्थामा ने काल रूप होकर महाविनाश किया - काल विभिन्न रूपो , बहानो से आकर अपना कार्य करता है -

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      शेष अगली पोस्ट में ********* राम नाथ गुप्त कन्नौज *****

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