पोस्ट --( 507 )-- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा न ( १०७ ) भीमसेन द्वारा भगवान श्री कृष्ण की बताई युक्ति से दुर्योधन का वध और श्री बलराम जी का भीम को मारने के लिए दौड़ना -
🚫 भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से माया विद्या का प्रयोग करके तालाब के पानी मे छिपे ---"" मायावी दुर्योधन को माया से ही कियात्मक उपायों से मार डालने को कहा था"" -
🎈 परंतु युधिष्ठिर ने ऐसा न करके #ललकार कर #दुर्योधन को बाहर बुलाया और #वरदान भी दिया कि हम पांचो पांडवो में से जिस किसी एक से चाहे उससे लड़कर जीते तो वे दुर्योधन को सारा राज्य दे देंगे
🍎 -किसी एक पांडव की हार माने #संपूर्ण #युद्ध मे #दुर्योधन की #जीत की #अनावश्यक , #अनिष्टकारी #शर्त -- इस पर श्री कृष्ण ने युधीष्ठिर को बहुत #फटकारा -
फिर भीमसेन दुर्योधन से गदा युद्ध करने चले --
किसी के लिए भी दुर्योधन को गदा युद्ध मे #धर्मानुसार #जीतना #असम्भव था -- उसके गदा युद्ध मे अत्यंत निपुण होने , निरंतर अभ्यास करने के अलावा एक प्रमुख कारण और भी था -
🎈महायुद्ध के प्रारम्भ में जब दुर्योधन अपनी माता गांधारी का आशीर्वाद लेने गया था तब गांधारी ने उससे पूर्ण नग्न होकर सामने आने को कहा था - परंतु लोक लजजा वश वह कौपीन पहनकर माँ के सामने पंहुचा था --जीवन भर आंखों पर पट्टी बांधने वाली पतिव्रता गांधारी ने ज्यो ही अपनी आंखों की पट्टी खोली , आंखों के तेज से दुर्योधन का सारा #शरीर #फौलाद के समान हो गया सिवाय कौपीन पहने #जांघो को छोड़कर -- इसलिए उसकी मृत्यु जांघो के टूटने से ही सम्भव थी --
🎈इसके अलावा कूटद्यूत और द्रोपदी के चीर हरण के समय जब दुर्योधन ने अपनी जंघाओं को द्रोपदी को दिखाकर उसे बैठने को बुलाया था तब भीमसेन ने दुर्योधन की जांघो को #तोड़कर उसे मारने की #प्रतिज्ञा की थी ।
🚫 तभी उसी समय श्री #बलराम जी जो महाभारत के युद्ध का निश्चय होने पर युद्ध में #निरपेक्ष रहने का निश्चय करके तीर्थयात्रा पर चले गए थे अपने दोनों शिष्यों , भीमसेन और दुर्योधन के गदा युद्ध को देखने वहां
आ पहुंचे --
राजा युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण सहित साभी व्यक्तियों ने उनका स्वागत , पूजन और अभिनन्दन किया - श्री बलराम जी के परामर्श पर सभी पावन सप्तपंचक छेत्र में गए और वहां दोनो वीरो में गदायुद्ध प्रारम्भ हुआ
भीमसेन और दुर्योधन में भयंकर गदा युद्ध हुआ - दोनो के युद्ध को बढ़ता देख अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा -
-" जनार्दन ! आप इन दोनों वीरो में किसे श्रेष्ठ समझते है "" श्री कृष्ण ने उत्तर दिया
"" अर्जुन ! बल और गदा युद्ध विद्या में दोनों समान है परंतु निरंतर अभ्यास और प्रयास में दुर्योधन बड़ा चढ़ा है --अगर भीमसेन धर्मयुद्ध करेंगे तो नही जीत सकते ।
🚫-इन्होंने जुएँ के समय यह प्रतिज्ञा की है "" मैं युद्ध मे गदा मारकर दुर्योधन की जाँघे तोड़ दूँगा " आज वे उस प्रतिज्ञा का पालन करे --""
🌏🚫 ""मैं फिर भी यह कहे बिना नही रह सकता कि धर्मराज ,युधिष्ठिर के कारण हम लोगों पर पुनः #भय आ पंहुचा है --बहुत प्रयास करके भीष्म आदि कौरव वीरो को मारकर , हमे विजय और यश की प्राप्ति हुयी थी परंतु युधीष्ठिर ने उस विजय को #संदेह में डाल दिया है --
🎈 एक ही हार जीत पर ,सबकी हार जीत की शर्त लगाकर इन्होंने इस भयंकर युद्ध को जुएँ का दांव बना डाला ,यह इनकी #बड़ी #भारी #मूर्खता है - ऐसे दुर्योधन जैसे #हताश शत्रु को कौन बुद्धिमान #द्वन्द #युद्ध के लिए #आमंत्रित करेगा - अब मुझे भी यह सन्देह होने लगा है कि कहीं दुर्योधन हम लोगो के जीते हुए राज्य को फिर से न हथिया ले ""
🚫 श्री कृष्ण की बात समझ कर अर्जुन , भीमसेन के देखते देखते बारम्बार अपनी बांयी जंघा ठोकने लगे -भीम ने उनका संकेत समझ लिया -- एक बार जब दुर्योधन ने भीम के प्रहार को व्यर्थ करने के लिए अवस्थान नामक दांव खेलने के लिए ऊपर उछलना चाहा तभी भीमसेन ने उसकी जांघो पर प्रहार कर जाँघे तोड़ डाली -
और दुर्योधन आर्तनाद करते हुए जमीन पर गिर पड़ा -- उसके गिरते ही सभी पांडव वीर प्रसन्नता व्यक्त करने लगे --भीमसेन ने उसे ताने देते हुए उसके मुकुट को बांये पैर से ठुकरा कर उसके सिर को पैर से दबाकर रगड़ डाला -
भीमसेन ने दुर्योधन को अधर्मपूर्वक मारा --- यह देखकर श्री बलराम जी ने अपना हाथ उठाकर आर्तनाद कहते हुए कहा -
""भीमसेन तुम्हे धिक्कार है ! धिक्कार है ! , दुर्योधन मेरे समान बलवान है , आज अन्याय करके तुमने केवल दुर्योधन को ही नही गिराया गया है बल्कि ( उसके गुरु ) मेरा भी अपमान किया है ""
यह कहकर श्री बलराम जी अपना हल ऊपर उठाएं भीमसेन की ओर दौड़े *** ( शेष अगली पोस्ट में )
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