महाभारत कथा 506, कृष्ण भगवान की युधिष्ठिर को फटकार


 पोस्ट --( 506 )-  अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा   ( १०६  )- प्रतिज्ञाएं और  अनावश्यक आत्मघाती शर्त - कृष्ण भगवान की युधिष्ठिर को फटकार -

       🌐 प्रतिज्ञाओं और शर्तों के आदी राजा युधिष्ठिर ने  स्पष्ट विजय होने के बाद भी दुर्योधन को ऐसी शर्त का वरदान दिया जिससे युद्ध का परिणाम पूर्णतया पलट  सकता था   हारा  हुआ  -दर्योधन  विजयी होकर   पुनः  राज्य  करता और   विजयी पांडव  पुनः बनवासी बनते ।


     पांडवों को व्याधों द्वारा जैसे ही दुर्योधन के तालाब में छिपने का पता चला ,वे अपने प्रमुख सहयोगियों ,भगवान कृष्ण आदि के साथ उस तालाब को चले -- इधर अश्वत्थामा , कृपाचार्य और कृतवर्मा उस तालाब पर दुर्योधन से बात कर रहे थे तभी पांडवों के आने का शोर उन्हें सुनाई दिया ,वे पीछे हटकर छिप गए ।


     तालाब पर पंहुच कर युधिष्ठिर  ने श्री कृष्ण से कहा कि दुर्योधन छल कपट विद्या में बहुत निपुण है देखो यह कैसे   दैवी  माया  का प्रयोग करके   पानी को रोककर   आराम  से सो रहा है --श्री कृष्ण  बोले -


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    🚫"" भारत !  #मायावी दुर्योधन की इस माया  को आप  #माया द्वारा ही नष्ट कर डालिये -और इसे मार डालिये ""


    🍎 " मायावी का वध माया से  ही करना चाहिए यही नीति है -- आप बहुत से रचनात्मक उपायों के द्वारा जल में माया का प्रयोग करके मायामय  दुर्योधन  का वध किजिये - युधिष्ठिर ! दैत्य दानव  राक्षस और बहुत से भूपाल ,क्रियात्मक  उपायों से ही मारे गए है ,आप भी  उपायों से इसे मार डालिये  ""


         तब  युधिष्ठिर ने हंसते हुए पानी मे छिपे दुर्योधन को  ललकारते हुए  कहा -


     🚫" तुमने अब जल में कौन सा अनुष्ठान  प्रारम्भ किया है ,कहां  गयी तुम्हारी गर्जना ! अपने सभी संबंधियों को मरवाकर ,  अपनी जान बचाने के लिए  भागकर यहां छिप कर सोते ,तुम्हे शर्म नही आती , बाहर निकलो और हमसे युद्ध करो ""


      दुर्योधन  ने पानी के अंदर से ही जबाब दिया कि वह किसी से नही डरता है , अभी वह थका हुआ  है , उसके पास न तो रथ है न ही कवच व कोई अस्त्र -- वह कैसे उंन सबसे  युद्ध कर सकता है  यह मेरे साथ अन्याय है  मैं एक एक से युद्ध करना चाहता  हूँ ,जिसमें हिम्मत  हो गदा लेकर सामने आ जाये ।


        तब युधिष्ठिर  बोले --""जिस समय तुम  सबने मिलकर अभिमन्यु को मारा था ,तब तुम्हे न्याय अन्याय की बात नही सूझी - संकट में जान पड़ने पर ही न्याय की याद आती है --खैर  इन बातों को जाने दो , बाहर आओ , कवच   पहनो और शिखा बांध लो , और जो  आवश्यक सामान तुम्हारे पास न हो मुझसे ले लो -- मैं तुम्हे एक और वरदान देता हूँ---


*🍎🚫🌐 "" तुम हम पांचो पांडबो में से जिसके साथ युद्ध करना चाहो कर लो -- यदि उसको मार डालोगे तब सारा राज्य तुम्हारा हो जाएगा -- यदि तुम खुद मारे गए तो  स्वर्ग जाओगे  -- इसके अतिरिक्त भी बताओ हम तुम्हारा  कौन सा प्रिय कार्य   करे -"" 


*************


          🎈 तदनन्तर दुर्योधन ने ,सोने का कवच  और सुनहरा टोप  मांगकर पहन लिए  और हाथ मे गदा लेकर बोला --" राजन ! तुम्हारे भाइयो में से कोई भी एक आकर मुझसे गदा युद्ध कर ले  - यदि न्यायतया युद्ध हो तो तुममे से कोई भी मुझे नही जीत सकता है --""  


       यह कहकर  दुर्योधन जब बारम्बार गर्जना करने लगा तब भगवान श्री कृष्ण  - युधिष्ठिर से कुपित होकर 

बोले -- 


      🚫🍎 "" राजन ! आपने कैसे यह  दु:साहसपूर्ण  बात कह दी कि ' तुम हम में से किसी एक को मारकर   राजा हो जाओ' - अगर दुर्योधन  अर्जुन नकुल सहदेव या आप को ही युद्ध के लिए चुन लें ,तब क्या होगा ? मैं आप लोगो मे इतनी शक्ति नही देखता हूँ कि कोई भी  गदायुद्ध में दुर्योधन का मुकाबला कर सके । इसने भीमसेन का वध करने के लिए ,उसकी लोहे की मूर्ति के साथ 13 वर्ष तक गदा युद्ध का अभ्यास किया है । दुर्योधन का मुकाबला केवल भीमसेन ही कर सकता है   मगर  निरन्तर अभ्यास के कारण   दुर्योधन  उससे  बेहतर है "" 


       🎆🚫"" आपने फिर पहले के ही समान  #जुआँ  खेलना शुरू कर दिया - आपका यह जुआँ  शकुनी के जुएँ से कही अधिक  #भयंकर है ! आज आपने हारे हुए शत्रु को समान स्तर पर  ला दिया है , अपने को विपत्ति में फंसाया है , और हम लोगो की कठिनाई बढ़ा दी -- 


        भला कौन ऐसा होगा जो सब शत्रुओ को जीत लेने के बाद , जब एक ही बाकी रह जाय और वह भी संकट में पड़ा हो , तब अपने हाथ मे आया हुआ  राज्य ,दांव  पर लगाकर हार जाए  ।   यदि हम न्याय से युद्ध करें तो भीमसेन की विजय में भी संदेह है ; तो भी आपने यह कह दिया कि हममें से एक को भी मार डालने पर तुम राजा हो जाओगे  ""।


       🎈 तब भीमसेन ने आगे आकर श्री कृष्ण को  गदायुद्ध में दुर्योधन को मार डालने  का आश्वासन दिया -- श्री कृष्ण ने भीमसेन के  युद्ध कौशल की बहुत प्रशंशा  करते हुए  उसको अपनी    प्रतिज्ञा , दुर्योधन की जाँघे तोड़ डालने की ,  याद दिलायी ।


   *************** अपनी  बात ******* 


       🎆 यह कैसी विडंबना  है कि हमारे  देश के शाशक  युद्धों  को जीत लेने के बाद भी  ; अपने को #दयावान और  #छमाशील  साबित करने के चक्कर मे , दुश्मन को- छमा करने ,उसे सब कुछ वापस करने , का वरदान  हमेशा  देते आये है , पुराना  इतिहास  इसका साक्षी है --


       आज भी यही हो रहा है -- 48 में जब काश्मीर में  अपनी सेनाएं   विजय पथ पर अग्रसर थी  और  काश्मीर की मुक्ति के बाद  पाकिस्तान को भी मिटाया जा सकता था ,   सैनिको  के    पैरो में  जंजीर डाल दी गई और U N  में मामला ले जाकर  काश्मीर को विवादित बना दिया गया ।


         फिर 1965 में शहीदों सैनिको  की मेहनत का अपमान करते हुए  जीती हुयी जमीन  ताशकंद में   पाक को वापस दे दी गयी == 


       1971 के युद्ध मे  स्पष्ट विजय के बाद भी  #दानवीर बनने के चक्कर मे पूर्वी बंगाल को भारत मे मिलाने की बजाय  अलग स्वतंत्र बंग्लादेश बना दिया गया  जो आज भी सरदर्द है = 


       बिना किसी शर्त के शिमला समझौते में  पाकिस्तान की जीती जमीन और 95000 युद्ध बन्दी उसे वापस कर दिए= 


      🎆 हम शर्त रखकर जमीन व युद्धबन्दी वापसी के पहले  काश्मीर को उनसे मुक्त करवा सकते थे परंतु विडम्बना देखिये  भारत ने काश्मीर को विवादित इलाका मानते हुए इसे बातचीत से हल करने की बात कही और युधिष्ठिर की तरह ही विजयी भारत और हारे हुए पाक को समान स्तर पर ले आये == हमने पाक को शक्तिशाली एटॉमिक देश बनने का मौका दिया ==


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     **शेष अगली पोस्ट में ******  राम  नाथ  गुप्त  कन्नौज ** -

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