पोस्ट --( 505 ) अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा ( १०५ )--महाराजा शल्य कौरव सेना के सेनापति बने-
🍅 कौरव सेनापति कर्ण के वध के बाद बचे. सभी प्रधान कौरव महायोद्धा शल्य ,चित्रसेन ,शकुनि ,अश्वत्थामा , कृपाचार्य, कृतवर्मा ,सुषेण , अरिष्टसेन , धृतसेन और जयत्सेन ,आदि राजा दुर्योधन के पास इकट्ठे हुए फिर सभी की सम्मति से मद्रराज #शल्य को सेनापति बनाने का निर्णय हुआ ।
जब युधिष्ठिर ने यह समाचार श्री कृष्ण को दिया तब श्री कृष्ण बोले --
🎈"" मैं शल्य को बहुत अच्छी तरह जानता हूँ वे अत्यंत पराक्रमी , महान तेजस्वी है ; उन्हें युद्ध करने के #चित्र , #विचित्र ढंग मालूम हैं -- वे भीष्म , द्रोणाचार्य , कर्ण के समान पराक्रमी अजेय वीर है - आप उन पर चढ़ाई कीजिये ***
🚫 मामा समझ कर उनपर दया करने की आवश्यकता नही है आप अपना तपोबल और क्षत्रियबल दिखाइए और शल्य को अवश्य मार डालिये -
Shopping with Amazon 👉CLICK HERE
Shopping with flipkart👉CLICK HERE
🌰 शल्य के नेतृत्व में कौरवो और पांडव सेना का भीषण युद्ध प्रारम्भ हुआ -- नकुल ने कर्ण के शेष तीनो पुत्रो को मार डाला --दुर्योधन द्वारा चेतिकान और युधिष्ठिर ने द्रुमसेन का वध किया --शल्य के साथ युधिष्ठिर का युद्ध हुआ ,युधिष्ठिर का ऐसा पराक्रम देखकर कौरव सैनिक थर्रा उठे -- तदनंतर युधिष्ठिर ने विश्वकर्मा द्वारा निर्मित ,रत्न जटित ,स्वर्णमयी दण्डवाली एक विकराल शक्ति को शल्य पर चला दिया जिससे शल्य की मृत्यु हो गयी ।
मद्रराज शल्य के भाई और अनुचरो का भी वध हुआ --भीम ने इक्कीस हजार पैदल सेना का संहार किया -
🍎 तब #मलेच्छो के राजा #शाल्व ने पांडवो पर हमला बोला - सात्यकि के हाथों मलेच्छराज शाल्व मारा गया -- कपट द्यूत में माहिर , दुर्योधन के योजनाकार कौरवो के मामा #शकुनि ने युद्ध मे भी #कपट का सहारा लेकर धोखे से #पीछे से हमला किया -और फिर अपने पुत्र #उलूक के साथ कुटिल मामा शकुनि भी " सहदेव " द्वारा मारा गया -
अधिकांश कौरव पक्ष के योद्धा और सेना पांडवों के हाथों मारी गयी और बचे सैनिक , युद्ध भूमि छोड़कर भागने लगे मगर दुर्योधन के प्रेरित करने पर वे वापस लौटे और सभी पांडवो द्वारा मारे गए -
🎆 ध्रतराष्ट्र के पूछने पर संजय ने बताया ,उस समय पांडबो के पास 2 हजार रथी ,700 हाथी सवार , 5000 घुड़सवार और 10000 पैदल सैनिक जिंदा बचे थे ।
🍘 कभी ग्यारह अक्षौणी सेना के अधिपति #दुर्योधन ने जब रणभूमि में अपने को अकेला बिना किसी सहायक के देखा तब वह पैदल ही पूर्व दिशा में एक सरोवर की ओर भागा --
🚫 दुर्योधन की सेना में कई लाख वीरो में से अब केवल 3 व्यक्ति - अश्वत्थामा -- कृतवर्मा और कृपाचार्य ही जीवित बचे थे --
🍅 पांडव सेनापति द्रष्टद्युम्न ने कैद में मौजूद संजय को मारने का आदेश दिया परंतु महर्षि वेदव्यास ने वहां प्रगट होकर उन्हें संजय को मारने से मना कर दिया और संजय से बोले " सञ्जय ! जा अपना कल्याण साधन कर ""
🍊 फिर वहां से बिना कवच , बिना हथियार हस्तिनापुर जाते समय सञ्जय ने मार्ग में अत्यंत दुखी दुर्योधन को देखा - दुर्योधन ने सञ्जय से अपने पिता ध्रतराष्ट्र को सन्देश भिजवाया कि अब वह बहुत घायल अवस्था मे पानी से भरे हुए #सरोवर में #सो रहा है --
🍟 फिर दुर्योधन ने उस पानी से भरे सरोवर में प्रवेश किया और #माया से उसका पानी बांध दिया जिससे उसे कोई देख न सके -- दुर्योधन जल को बांधने , फिर उसमें सबसे छिप कर रहने की विद्या जानता था , उस समय पानी मे भी कोई हरकत नही होती थी - सञ्जय को हस्तिनापुर जाते समय मार्ग में तीनों बचे महारथी , अश्वत्थामा आदि मिले - संजय ने उन्हें दुर्योधन के सभी समाचार बताये और वह सरोवर भी दिखा दिया ।
🚫 युद्ध मे पाला बदलकर पांडवो की ओर से लड़े ध्रतराष्ट्र के दासी पुत्र "" युयुत्सु " भगवान कृष्ण और युधिष्ठिर की अनुमति लेकर , विधवा रानियों आदि स्त्रियों और वृद्ध जनो तथा सेवको के साथ हस्तिनापुर वापस चले गए ।
🌰 तब तीनो महारथी अश्वत्थामा , कृपाचार्य और कृतवर्मा अपने राजा दुर्योधन से मिलने सरोवर पर गए और दुर्योधन से वापस चलकर युद्ध करने को कहा परंतु दुर्योधन ने थके होने के कारण उस समय विश्राम करके अगले दिन मिलने को कहा -- अपने पिता द्रोणाचार्य के अन्याय पूर्वक धोखे से वध से दुखी अश्वत्थामा ने उसी रात सभी पांडवो का बची हुई सेना के साथ वध करने का वायदा दुर्योधन से किया ।
🎈 कुछ व्याधों ने दुर्योधन को अश्वत्थामा से बात करते हुए देख लिया --उन्होंने युधिष्ठिर के पास जाकर दुर्योधन की छिपने की बात बताई - उनके बताने पर सभी पांडव , श्री कृष्ण ,प्रमुख वीरो के साथ उस सरोवर पर पंहुचे और दुर्योधन को ललकारा - उन्हें देखकर तीनो कौरव महारथी योद्धा पान्डवोँ देखकर जंगल मे छिप गए ।
Shopping with Amazon 👉CLICK HERE
Shopping with flipkart👉CLICK HERE
शेष अगली पोस्ट में **** राम नाथ गुप्त कन्नौज *********

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें