पोस्ट --( 502 )-- महाभारत कथा समीक्षा -( १०२ ) - कर्ण और अर्जुन का युद्ध - अश्वसेन नामक नाग से श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन के प्राणों की रक्षा --
🎃 श्री अर्जुन का कर्ण से युद्ध प्रारम्भ हुआ । अर्जुन के सारथी भगवान कृष्ण जी जहां अर्जुन से उसकी प्रशंशा करके ,उसकी योग्यता , अद्भुत युद्ध कौशल , उसके दिव्य अस्त्रों , की बारम्बार प्रशंशा करके , कर्ण को उसके मुकाबले में कमजोर बता करके तथा , कौरवो द्वारा उसे अब तक दिए गए अपार कष्टो में कर्ण के योगदान की याद दिला करके उसे निरंतर उत्साहित कर रहे थे --- वही कर्ण के सारथी नकुल सहदेव के सगे मामा ,पाला बदल के कौरव पक्ष में गए "" राजा शल्य "" , युधिष्ठिर से किये वायदा के अनुसार , बराबर कर्ण को अर्जुन के मुकाबले तुच्छ ,उसके अस्त्रों को कमजोर तथा उसका अपमान करके उसे उत्साहहीन कर रहे थे -
🍎 भीषण युद्ध मे अर्जुन ने #आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया ; इससे पृथ्वी से लेकर आसमान तक आग की ज्वाला फैल गयी ; आग से झुलसते कौरव सैनिको के आर्तनाद को सुनकर कर्ण ने #वरुणास्त्र चला कर आग बुझा दी ।
-वरुणास्त्र से चारो ओर पानी ही पानी नजर आने लगा ,अंधेरा छा गया तब अर्जुन ने #वायव्यासत्र से वायु को चलाकर उसे शांत किया । अर्जुन के छोड़े #इन्द्रयास्त्र को कर्ण ने #भार्गवास्त्र से शांत किया -
तभी भीम ने क्रोध में भरकर अर्जुन से इन अस्त्रों के खेल की आलोचना करते हुए , उन्हें कौरवो और कर्ण द्वारा दी गयी यातनाओं की याद दिलाते हुए ,अपने दिव्य अश्त्रो से जल्द से जल्द कर्ण का वध करने को कहा ; जिसका समर्थन श्री कृष्ण ने किया -
🚫 अर्जुन ने इस पर #ब्रम्हास्त्र प्रकट किया परंतु कर्ण के उसे भी नष्ट कर दिया ; इसी बीच कुछ देर पहले बुरी तरह घायल युधिष्ठिर भी मन्त्र और ओषधियों के बल से पूर्ण स्वस्थ होकर कर्ण अर्जुन का युद्ध देखने आ गए ।
🌍 इसी समय पाताल में रहने वाला #अश्वसेन नामक नाग जो अर्जुन से वैर मानता था ,वेग से उछल कर ,अर्जुन से बदला लेने के लिए बाण का रूप बनाकर कर्ण के तरकस में प्रवेश कर गया । कर्ण भी सर्प मुखी बाण लाये थे । उसके ही धोखे से कर्ण ने अश्वसेन नाग वाला बाण अर्जुन पर चलाया । वह बाण अंतरिक्ष मे पंहुचते ही प्रज्ज्वलित हो उठा । उसे बड़े वेग से अपनी ओर आते देखकर , भगवान श्री कृष्ण ने खेल सा करते हुए अपने #रथ को तुरंत अपने #पैर से #दबा दिया -- भार पड़ने से रथ के पहिये कुछ जमीन में धंस गए और घोड़े भी जरा झुक गए । रथ नीचा हो जाने के कारण कर्ण का वह बाण अर्जुन के कंठ में न लग कर मुकुट में लगा जिससे मुकुट नीचे आ गिरा और सर्प की विषागनि से छिन्न भिन्न होकर जल कर काला पड़ गया -
🍎 भगवान ने भक्त अर्जुन की प्राण रक्षा की---🍎
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🌐 श्री राम ने भी रावण द्वारा चलाई गयी प्राण घातनी शक्ति को , विभीषण को पीछे करके स्वयम अपने सीने पर लेकर झेला था -- श्री राम चरित मानस लंका कांड दोहा 93 के बाद --
' ""आवत देखि सक्ति अति घोरा । प्रनतारति भँजन पन मोरा ।।
तुरत विभीषण पाछे मेला । सन्मुख राम सहेउ सोई सेला ।।""
जब प्रभु स्वयँ जिसके रक्षक हों , उसका कौन क्या बिगाड़ सकता है
"" सीम की चापि सकई कोउ तासू -- बड़ रखवार रमापति जासू ।।""
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वह #तक्षक का पुत्र #अश्वसेन नाग पुनः कर्ण के तरकस में घुसना ही चाहता था जिसे कर्ण ने देखकर उसे मना करते हुए कहा --
🚫"" नाग आज कर्ण #दूसरे के बल का आश्रय लेकर विजय पाना नही चाहता ""--
यह कर्ण के #उच्च #चारित्रिक मूल्यों को दर्शाता है । कर्ण की बात नागराज से सहन नहीं हुयी वह भयंकर रूप रखकर अर्जुन की ओर दौड़ा , तभी श्री कृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने उसे बाणों से बींध कर मार डाला ।
🚫 नागराज के मारे जाने के बाद भगवान ने पृथ्वी में धंसे रथ को अपनी दोनों भुजाओ से ऊपर निकाला मगर तब तक कर्ण ने श्री कृष्ण को 12 और अर्जुन को 90 बाणों से घायल कर दिया । अर्जुन ने भी बाणों की मार करके कर्ण को बेहोश कर दिया ।
शेष अगली पोस्ट में

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