पोस्ट --( 501 )-- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा --( १०१ )- महाभारत कर्ण पर्व अध्याय 72 --श्लोक 17 / 125-- कर्ण और अर्जुन का युद्ध -- दुःशाशन वध --
🍎 युधिष्ठिर के पास से अर्जुन और श्री कृष्ण -- कर्ण का वध करने का वायदा करके चले तब कुंती
पुत्र अर्जुन के शरीर से बड़े जोर से पसीना छूटने लगा ; तथा उसके मन मे भारी चिन्ता होने लगी कि यह सब कैसे होगा ?-रथ पर चिंतामग्न अर्जुन को देखकर श्री कृष्ण ने अर्जुन के बल , वीर्य की प्रशंशा करके उसे प्रोत्साहित किया -
-श्री कृष्ण ने अर्जुन की प्रशंसा करते हुए कहा -"
🚫 "अर्जुन तुमने अपने बल पराक्रम से जिन जिन वीरो पर विजय पाई है ,उन्हें जीतने वाला इस संसार मे तुम्हारे सिवा कोई दूसरा मनुष्य नही है ; कर्ण की तुम अवहेलना मत करना - दुर्योधन के हित में तत्पर रहने वाले ,पांडवो से द्वेष रखने वाले ,जिसे सम्पूर्ण देवता भी नही जीत सकते , उस #दुरात्मा ,#पापाचारी ,#क्रूर , पांडवो के प्रति #दुर्भावना रखने वाले , किसी स्वार्थ के बिना ही पांडव विरोध में तत्पर हुए , कर्ण का वध करके सफल मनोरथ हो जाओ । जिस प्रकार सिंह मतवाले हाथी को मार डालता है उसी प्रकार तुम शूरवीर कर्ण को मार डालो ,इसके लिए मैं तुम्हे आज्ञा देता हूँ । ""
🎃 उधर कर्ण ने दुर्योधन से रथ संचालन में श्री कृष्ण के समान निपुण - राजा #शल्य को अपना सारथी बनाने की बात कही । राजा शल्य अपने को कर्ण से कम नही समझते थे अतः उन्होंने इनकार करते हुए , युद्ध छोड़कर अपने राज्य वापस चले जाने की धमकी दुर्योधन को दी ; फिर दुर्योधन के खुशामद करने पर वे कर्ण के सारथी बनने को राजी हो गए ।
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🍅 इधर युद्ध मैदान में धृतराष्ट के दासी पुत्र #युयुत्सु जिसने युद्ध प्रारम्भ होते समय , युधिष्ठिर के आवाहन पर पाला बदल कर अपने भाई कौरवो के विरुद्ध पांडवो की तरफ से लड़ना स्वीकार किया था ,उसने पराक्रम से कौरव सेना में #भगदड़ पैदा कर दी --तब उलूक ने युद्ध मे उसे परास्त किया ; कर्ण ने नकुल को परास्त कर दिया फिर माता #कुंती से की गयी #प्रतिज्ञा कि वह केवल अर्जुन का ही वध करेगा , इसलिए उसने #नकुल को #जीवित छोड़ दिया --
🎃 भीमसेन ने भीषण युद्ध मे #दुशाशन को परास्त किया फिर जुआ खेलते समय द्रोपदी के अपमान के प्रतिशोध में , अपनी प्रतिज्ञा अनुसार उसके सीने को चीर कर उसका #रक्तपान किया ,और फिर सिंहनाद किया । कर्ण का पुत्र वृषसेन ,अर्जुन द्वारा मारा गया -- अनेकानेक कौरव वीरो, ध्रतराष्ट्र के बहुत से पुत्रो सहित तमाम राजाओ को अर्जुन व भीमसेन व पांडवो ने मार गिराया ।
🍎 भीम व अर्जुन का पराक्रम देखते ही #भयभीत #कौरव सेना भाग चली ,कर्ण देखता ही रह गया - फिर अपने पुत्र वृषसेन के अर्जुन द्वारा मारे जाने से अत्यंत क्रोधित होकर अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़ा ।
उस समय आकाश में देवतागण उपस्थित होकर युद्ध देख रहे थे -देवताओ ने ब्रम्हा जी व शंकर जी से पूछा कि किसकी विजय होगी -- श्री ब्रम्हा जी बोले --
🎃"" सत्य और धर्म मे अटल रहने वाले अर्जुन की ही विजय निश्चित है -संसार के स्वामी भगवान नारायण ने उनका सारथी होना स्वीकार किया है ""
🍎 तत्पश्चात श्री कृष्ण , अर्जुन , तथा शल्य और कर्ण ने अलग अलग अपने शंख बजाए । भगवान श्री कृष्ण ने शल्य की ओर आंखों की त्योरी करके देखा , मानो उसे #नेत्र रूपी #बाणों से #बींध रहे हों --शल्य की आंखे उस तेज को सहन न कर सकी व बन्द हो गयी -- इसी प्रकार अर्जुन ने कर्ण को #नेत्रों से #पराजित किया
उस समय अश्वत्थामा अपने राजा दुर्योधन के पास गया और उससे बोला --
🎃 ""दुर्योधन पांडवो से संधि कर लो अब विरोध से कोई लाभ नही है । मेरे पिता द्रोणाचार्य , भीष्म पितामह जैसे योद्धा मारे जा चुके है । #मैं और #कृपाचार्य इसलिए जीवित है क्योंकि हम दोनों #अवध्य है -- परंतु दुर्योधन ने संधि करने से #इनकार कर दिया और मीठी बाते करके अश्वत्थामा को मना लिया -- और फिर कर्ण और अर्जुन का युद्ध प्रारम्भ हो गया ।
************* अपनी बात *******************
🎆🎃 श्री ब्रम्हा जी ने सही कहा -- जिसने अपना #सारथी श्री हरि श्री #कृष्ण को बना लिया , उसके हारने का कोई प्रश्न ही नही है -- उसकी सर्वत्र #विजय ही विजय है ।
🍘 #युद्ध का मैदान हो या #जीवनरथ , जब प्रभु सारथी होंगे तभी विजय होगी - काम , क्रोध , लोभ , माया , मत्सर , अभिमान आदि से ग्रसित इन्द्रियो के घोड़े जीवन रथ को अनियंत्रित करके सर्वनाश की ओर ले जाने का प्रयास करते है - जब प्रभु को सारथी बना लिया तब कोई चिंता ही नही होती है ।
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ ।
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि सन्त ।।
शेष अगली पोस्ट में **** राम नाथ गुप्त कन्नौज ****
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