पोस्ट --( 500 ) अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा -- ( १०० ) अपने आप अपने से की गयी एक गुप्त प्रतिज्ञा में ऐसे उलझे अर्जुन --अगर श्री कृष्ण न समझाते तो सर्वनाश हो जाता ।
🚫 प्रतिज्ञा -- प्रतिज्ञा और प्रतिज्ञाओं का चक्रव्यूह
गुरु द्रोणाचार्य की मौत के बाद दुर्योधन ने महाबली #कर्ण को अपनी सेना का #सेनापति बनाया
🎈 कर्ण के सेनापति बनने के बाद दुर्योधन और कर्ण ने आधी सेना ले जाकर राजा युधिष्ठिर को घेर लिया -भयंकर चले महा युद्ध में पहले युधिष्ठिर ने काफी पराक्रम दिखाया परन्तु बाद में #कर्ण ने #युधिष्ठिर की छाती में भयंकर चोट पहुंचा कर उन्हें बुरी तरह #घायल कर दिया-- तब युधिष्ठिर को किसी प्रकार नकुल और सहदेव अपने साथ बचाकर निकाल कर छावनी ले गए ; और फिर युधिष्ठिर के आदेश पर वे युद्ध करने वापस युद्ध भूमि पर आ गए ।
🍊 युद्ध में अर्जुन भीम आदि का दुर्योधन और कर्ण से बहुत भयंकर संग्राम हुआ । जब भगवान् श्री कृष्ण और श्री अर्जुन को राजा युधिष्ठिर के बुरी तरह घायल होने की बात पता चली तो तब अर्जुन बडे भाई युधिष्ठिर के हाल चाल जानने व दर्शन करने का विचार कर वे युधिष्ठिर के पास छावनी पहुंचे ।
🚫 युधिष्ठिर को बहुत #पीडा हो रही थी और अचानक अर्जुन और कृष्ण को आया देख उन्होंने समझा कि अर्जुन युद्ध में कर्ण का वध करके शुभ समाचार देने आये है; इसलिए उन्होंने अर्जुन का स्वागत और कर्ण का वध सफलता से करने के लिये अभिनन्दन भी कर दिया । परन्तु जब युधिष्ठिर को कर्ण के जीवित होने की बात पता चली तब उन्हें कर्ण द्वारा किये गए अपने अपमान -से वे दुःख व् क्षोभ से भर उठे ।
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🍅🎇 युधिष्ठिर ने कहा " अर्जुन तुम्हारे पास विश्वकर्मा का बनाया हुआ रथ है जिस पर वानर विराजमान है -श्री कृष्ण जैसा सारथी है और गांडीव जैसा धनुष है फिर भी कर्ण से डर कर भाग आये -अब किसी और को जो अधिक शक्तिशाली हो अपना गांडीव धनुष दे दो ; धिक्कार है तुम्हारे गांडीव को !! धिक्कार है तुम्हारी भुजाओं के पराक्रम को !! और अग्नि देव के दिए हुए इस रथ और ध्वजा को !! "
🚫 यद्यपि युधिष्ठिर ने यह बाते पीडा और अपमान वश अपनत्व व प्रेम की नाते कही थी परन्तु यह सुनते ही अर्जुन को बहुत क्रोध हुआ -उसने तुरंत अपने बड़े भाई राजा धर्मराज #युधिष्ठिर को मार डालने की इच्छा से #तलवार उठा ली -श्री कृष्ण के रोकने पर अर्जुन बोला कि --
🍎🚫 "मैंने गुप्त रूप से प्रतिज्ञा की है कि जो मुझसे कहेगा कि अपना गांडीव धनुष दुसरे को दे दो -
मै उसका सर काट डालूँगा । अब मै अपनी बात पूरी करूंगा "
🚫 तब श्री कृष्ण ने उसे बलात रोकते हुए " #धिक्कार #धिक्कार है "कहते हुए कहा कि " तू अर्जुन ! अज्ञानतावश अपने को धर्मवेत्ता मानकर #जीव #हिंसा का #पाप करने चला है -*
🍎 "" *प्राणियों के जीवन की रक्षा के लिए प्रतिज्ञा छोडना या झूठ बोलना पडे तो बोल दे परन्तु हिंसा न करे-""
🍎"" बडे धर्मंज्ञ भाई -चक्रवर्ती राजा -जो न तो युद्ध कर रहे है और न ही शत्रु है उनके वध की बात तुम कैसे सोच सकते हो ? "🍎
🚫 -""जहा सत्य का परिणाम असत्य और असत्य का परिणाम सत्य हो वहा असत्य बोलना ही उचित है -
🚫 धर्म वही है जो समस्त प्राणियो के लाभ में उचित है -""
अर्जुन के पूछने पर कि ऐसी विधि बताइये जिससे प्रतिज्ञा भंग का दोष न हो और युधिष्ठिर की प्राण रक्षा भी हो जाय
🚫**-""श्री कृष्ण ने कहा -कि सम्मानीय पुरुष जब तक संसार में सम्मान पाता है उसका जीवित रहना माना जाता है ---अपमान होने पर जीते जी मरा समझा जाता है **** -इनका अपमान कर दो""
-तब अर्जुन ने युधिष्ठिर से कहा 🚫" तू चुप रह न बोल -तू खुद ही युद्ध से भाग आया है "
🚫 इन तू से संबोधित तिरस्कारपूर्ण वाक्य से अर्जुन ने अपनी प्रतिज्ञा तो पूर्ण की परन्तु फिर दोबारा तलवार उठा ली -श्री कृष्ण ने आश्चर्यचकित हो पुछा तब बताया कि उसने अपने पूजनीय बडे भाई का जिद्द में आकर घोर अपमान किया है इसलिए अब वह जीवित नहीं रहना चाहता है और आत्महत्या करेगा ।
** ""-तब श्री कृष्ण ने इसका भी हल बताया -कि आत्महत्या तो और बडा पाप है --
🚫** अपने मुंह से अपने गुणों का बखान करना आत्महत्या के बराबर होता है ""--********
तब अर्जुन ने अपने आप अपने युद्ध कौशल -गांडीव आदि की प्रशंसा की और इससे ऐसा समझा गया की उसने अपने आप अपने को मार लिया -
🚮 यह सब होने पर युधिष्ठिर अपने को अपमानित महसूस कर युद्ध छोड कर संन्यास लेने के लिए तैयार हो गए तब श्री कृष्ण और अर्जुन ने बहुत विनय कर उन्हें समझाया और शाम तक कर्ण के वध करने की बात कही फिर -राजा युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेकर अर्जुन श्री कृष्ण के साथ युद्ध करने गए और कर्ण का वध किया ***
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