पोस्ट --( 498 )-- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा --( ९८ )-- भीम के राक्षस पुत्र घटोत्कच के मारे जाने पर भगवान श्री कृष्ण हर्ष से भर कर क्यो नाचने लगे ??
🍓 घटोत्कच के कर्ण की शक्ति से मरने पर जब सभी पांडव शोकग्रस्त थे तब भगवान कृष्ण के इस असामयिक व्योहार पर आश्चर्यचकित अर्जुन के इसका कारण पूछने पर श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया
--( महाभारत द्रोण पर्व अध्याय 180 श्लोक 11 / 28 )
🚫 ""आज मुझे यह अत्यंत #हर्ष का अवसर प्राप्त हुआ है- इसका कारण यह है --" है धनन्जय ! इंद्र की दी हुयी #शक्ति को #घटोत्कच के द्वारा #कर्ण से #दूर कराकर अब तुम जल्द ही युद्ध मे कर्ण को मारा हुआ ही समझो !
🍎 इस युद्ध मे कौन ऐसा पुरुष है जो कार्तिकेय के समान शक्तिशाली दिव्य शक्तियों वाले कर्ण के सामने खड़ा हो सके ? सौभाग्य की बात है पहले इंद्र ने तुम्हारी रक्षा के ही उद्देश्य से कर्ण से उसके शरीर के साथ उत्पन्न दिव्य कवच और कुंडल मांग लिए थे । यदि कर्ण उस कवच और कुंडल से युक्त होता तो वह अकेला ही देवताओ सहित तीनो लोको को जीत सकता था --
🚫 तुम गांडीव उठाकर और मैं सुदर्शन चक्र लेकर सामने आते फिर भी उस कर्ण को जीतना बहुत कठिन होता -फिर उन दिव्य कवच कुण्डलों के बदले इंद्र ने कर्ण को जो अमोघ शक्ति दी थी उससे वह तुम्हे रण भूमि में मारा गया ही मानता था । अब उस शक्ति को घटोत्कच पर चलाकर , उसे खोकर अब कर्ण जैसे प्रज्वलित #अग्नि की ज्वाला को #बुझा दिया जाए , वैसा ही #तेजहीन हो गया है । वह अब एक साधारण मनुष्य के समान हो गया है - फिर भी ऐसी हालत में भी आकर -कर्ण , तुम्हारे सिवा किसी दूसरे योद्धा द्वारा नही मारा जा सकता है
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🚫"" है अर्जुन ! तुम मेरे अनन्य भक्त हो ! इसलिए मुझे सबसे ज्यादा #प्रिय हो । तुम्हारे लिए मैने विभिन्न उपायों द्वारा - ----मगधराज जरासंध को भीमसेन द्वारा ---- चेदिराज शिशुपाल को स्वयम राजसूय यज्ञ की भरी सभा मे मार डाला था --
🚫 तुम्हारे हित के लिये ही द्रोणाचार्य ने सत्य पराक्रमी #एकलव्य का आचार्यत्व स्वीकार करके , छलपूर्वक उसका अंगूठा कटवा दिया था
🎈तुम्हारे हित के लिए ही मैने एकलव्य को युद्ध के मुहाने पर मार डाला था -- जरासंध , शिशुपाल और महाबली एकलव्य यदि ये पहले ही नही मारे गए होते ,तो वे निश्चय ही दुर्योधन की सहायता करते और अत्यंत भयंकर साबित होते --
🎈संपूर्ण लोको का हित करने के लिए ही इन सब अत्याचारी , देशद्रोहियो का वध करने के लिए ही मैं तुम्हारे साथ #अवतीर्ण हुआ हूँ -- हिडिम्ब , वक और किर्मीर ,यह सभी राक्षस रावण के समान बलवान थे और ब्राह्मणों और यग्यो का विनाश किया करते थे ,इन्हें भीमसेन ने मार गिराया था --
🍊 मायावी अलायुध घटोत्कच के हाथों मारा गया । घटोत्कच भीमसेन का पुत्र होते हुए भी #पापात्मा था। मैं धर्म की रक्षा करने के लिए उतपन्न हुआ हूँ , घटोत्कच को युक्ति लगाकर मैने ही कर्ण से मरवा दिया है ।
अगर यह कर्ण के हाथों नही मरता तो मुझे ही किसी दिन इस पापी को मारना पड़ता -""
🍘🍱🍎"" धर्म का लोप करने वाले सभी प्राणी मेरे वध्य है -- जहां ज्ञान ,सत्य , मन इन्द्रिय का दमन ,शौच , धर्म , लज्जा , श्री , घृति , और छमा है , वहां मैं ( श्री कृष्ण ) हूँ ""🍊🍘
🍟 "" तुम्हे वैकतर्न कर्ण के विषय मे चिंता करने की आवश्यकता नही है - मैं तुम्हे ऐसा उपाय बताऊंगा जिससे तुम उसका सामना कर सकोगे और उसे जीत सकोगे ""
🍱🍱 सात्यकि ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा कि अमोघ शक्ति होते हुए भी कर्ण ने अब तक इसे अर्जुन पर क्यो नही चलाया था ?-- श्री कृष्ण बोले --
🚫 " प्यारे अर्जुन को बचाने के लिए , मैं ही कर्ण को #मोहित करके शक्ति नही छोड़ने देता था "" ( महाभारत द्रोण पर्व अध्याय 181 श्लोक 1 / 33 )
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सच है जिसके रक्षक स्वयम श्री कृष्ण हो , उसे चिंता करने की क्या आवश्यकता है - प्रभु का कहना है--
"" करौं सदा तिन्ह कै रखवारी । जिमि बालकहि राख महतारी ""॥
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