पोस्ट --( 497 )-- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा -( ९७ )-- भगवान श्री कृष्ण अर्जुन द्वारा जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा से चिंतित क्यों थे ? श्री कृष्ण की युक्ति द्वारा जयद्रथ का वध --- घटोत्कच का अद्वितीय युद्ध और घटोत्कच वध -
🚫 प्रश्न यह उठता है कि जयद्रथ में ऐसी क्या खास बात थी कि श्री कृष्ण उसके प्रति अर्जुन द्वारा उसे सायंकाल तक मारने की प्रतिज्ञा से इतने चिंतित हो गए थे ? कि उन्होंने अपने निजी रथ के सारथी दारुक को रथ को सुसज्जित कर सुबह युद्ध मैदान में लाने को कहा था और अर्जुन की जान बचाने के लिए स्वयं युद्ध मे कूद पड़ने तक के लिए भी सोच लिया था ?
🍎 वनवास के समय युधिष्ठिर द्वारा जयद्रथ को जीवन दान कितना मंहगा पड़ा ?
🌰 जयद्रथ दुर्योधन का बहनोई था , उसने जब पांडव बनवास में थे तब उन्हें चिढ़ाने और अपमानित करने के लिए वन में जाकर द्रोपदी के साथ अभद्र व्यवहार किया था । अर्जुन और भीमसेन उसे पकड़ कर इसकी सजा देने ,मारने जा रहे थे तब युधिष्ठिर ने उसे बहनोई बताते हुए छुड़वा दिया था । अपमानित जयद्रथ व उसके तपस्वी पिता " वृद्धछत्र "" ने विकट तपस्या कर वरदान में #दिव्य #अस्त्र प्राप्त किये , जिससे वह अजेय हो गया था ,इसी के बल पर उसने युधिष्ठिर और भीमसेन को अभिमन्यु के पीछे उसकी सहायतार्थ , चक्रव्यूह में प्रवेश करने से रोक दिया था ---
🚫 इसके अलावा उसने एक और वर प्राप्त किया था कि जिस व्यक्ति के द्वारा उसका सिर पृथ्वी पर गिरे, उसके सिर के सौ टुकड़े तुरंत हो जाये । ऐसे बली ,वरदान प्राप्त तथा द्रोणाचार्य व तमाम महारथियो द्वारा सुरक्षित " जयद्रथ को #निश्चित #समय ,शाम तक मारना अन्यथा स्वयं #चिता में प्रवेश कर लेने की प्रतिज्ञा करना --अर्जुन का स्वयम आत्महत्या करने जैसा निश्चय जैसा था --
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🍓 अगले दिन प्रातःकाल युद्ध शुरू होते ही ,द्रोणाचार्य ने , जयद्रथ को ऐसे महारथियो से सुरक्षित जगह पर रक्खा कि उसे #तलाश करना #असंभव सा था । उस दिन बहुत भयंकर युद्ध हुआ । अर्जुन की प्रतिज्ञापूर्ति और प्राण रक्षा के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार श्री कृष्ण ने ,सूर्य को अंधकार की ओर जाते देख ,अपनी #योगमाया से #अंधकार की श्रष्टि की --इससे सूर्यदेव छिप गए , कौरव बहुत हर्षित हुए । अर्जुन को प्रतिज्ञा के अनुसार चिता पर चढ़ आत्महत्या करने देखने के लिए अब निश्चिंत जयद्रथ सहित कौरव महारथी सामने आए , उसी समय भगवान श्री कृष्ण ने अपनी योगमाया को हटाया , #सूर्य दिखाई दिया ,और श्री कृष्ण ने तुरंत अर्जुन को आदेश दिया --
🚫" सामने जयद्रथ है अपनी प्रतिज्ञा पूरी करो " -
🌰 और फिर श्री कृष्ण की सम्मति के अनुसार अर्जुन ने एक दिव्य बाण को अभिमन्त्रित करके जयद्रथ की ओर चलाया - वह बाण जयद्रथ का सिर काटकर , बाज पक्षी के समान उसे लेकर आकाश में ले उड़ा -- समंतक छेत्र के बाहर जयद्रथ के पिता राजा " वृद्धछत्र " सन्ध्योपासना कर रहे थे -- अर्जुन के बाण ने जयद्रथ के मस्तक को उन्ही के गोद मे डाल दिया --जैसे ही वे उठने लगे उनके द्वारा वह जयद्रथ का मस्तक पृथ्वी पर गिर गया और मस्तक गिरते ही जयद्रथ के पिता के मस्तक के भी 100 टुकड़े हो गए --इस प्रकार श्री कृष्ण की युक्ति से जयद्रथ व उसके पिता दोनो मारे गए ।
🍱 जयद्रथ की मृत्यु के थोड़ी ही देर बाद शाम हो गयी ,युद्ध बन्द हुआ परंतु तभी दुखी दुर्योधन ने अपने सेनापति आचार्य द्रोण को उलाहना देते हुए ताना मारते हुए कुछ अपमान जनक बाते कह दी --
🎈 आचार्य ने दुर्योधन को फटकारा और तुरंत रात को #अंधेरे में ही #युद्ध के लिए प्रस्थान किया - द्रोणाचार्य ने सेना के साथ विकट युद्ध करके पांडबो की सेना में खलबली मचा दी ,तब श्री कृष्ण की प्रेरणा से भीमसेन ने अपने महाबली अत्यंत विशाल शरीर वाले , राक्षस पुत्र " #घटोत्कच " का स्मरण किया। वह तुरंत हाजिर हो गया -
🚫 राक्षस रात्रि मे विशेष शक्तिसम्पन्न अजेय हो जाते है , उसने #आकाश में जाकर #मायामय युद्ध करके दुर्योधन व उसकी सेना को भीषण संकट में डाल दिया । तब परेशान दुर्योधन ने कर्ण को अपनी इंद्र द्वारा दी गयी अमोघ शक्ति को घटोत्कच पर प्रयोग करने का आदेश दिया -
🍎कर्ण ने यह अमोघ शक्ति , अर्जुन को मारने के लिए रख छोड़ी थी , इसके ही कारण वह अर्जुन को हमेशा मरा हुआ ही समझता था --वह इसे अभी प्रयोग नही करना चाहता था परंतु जान बचाने को परेशान दुर्योधन के आदेश पर उसने वह अमोघ शक्ति घटोत्कच पर चला दी - तब आकाश में मरते हुये घटोत्कच से भीमसेन ने कहा कि वह दुश्मन की सेना पर गिरे । विशाल शरीर वाले घटोत्कच ने गिरते हुये भी सैकड़ो कौरव सैनिको को कुचल कर मार डाला ।
🚫 अत्यंत बलवान मायावी राक्षस पुत्र घटोत्कच की मृत्यु से पांडव सेना में हाहाकार मच गया परंतु भगवान श्री #कृष्ण - #हर्ष से भर कर नाचने लगे ।अर्जुन ने भगवान से उनके इस असामयिक बर्ताव का कारण पूछा , ---------भगवान श्री कृष्ण का उत्तर अगली पोस्ट में -----
********************** अपनी बात **************
एक विचारणीय बात --
🍎 वनवास के समय , द्रोपदी का अपमान करने के कारण ,भीमसेन और अर्जुन , जयद्रथ को मृत्यु दंड देने वाले थे परंतु युधिष्ठिर ने उसे रिश्तेदार समझ कर छुड़वाया था और फिर उसे मारना कितना कठिन हुआ -- आज भी दुश्मन पर दया करने की राजनीति चल रही है - श्री पृथ्वीराज से लेकर आधुनिक समय मे भी इस दया करने की नीति के कारण कितने भयानक परिणाम भुगतने पड़ रहै है --
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