पोस्ट --( 495 )-- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा --( ९५ )- अजेय पराक्रमी कौरव सेनापति भीष्म पितामह का पतन - आखिर भीष्म ने महारथी शिखंडी को स्त्री क्यों माना ?
🚫 अपने ही दिए वचनों का बना चक्रव्यूह , ----एक तरफ दुर्योधन से आज ही पांचो पांडवो का वध करने का वायदा और दूसरी तरफ द्रोपदी को " अखंड सौभाग्यवती " का आशीर्वाद--- से निकलने का एक ही उपाय श्री भीष्म पितामह को नजर आया -- उनकी अपनी युद्ध मे मृत्यु , जिससे वे पांडवो का वध करने के वचन से बच जाए और द्रोपदी भी सौभाग्यवती बनी रहे । इसलिए उन्होंने द्रोपदी को अपनी मृत्यु का राज
बताया --
🚫भीष्म पितामह की एक यह भी प्रतिज्ञा थी , कि वे कभी किसी स्त्री से युद्ध नही करेंगे -
🎈 जब तक वे भीष्म युद्ध मे डटे रहें ; उन्हें मारना असम्भव था । उन्हे मारना तब ही सम्भव था जब वे धनुष रख दे और युद्ध से विमुख हो जाएं । भीष्म ने द्रौपदी को बताया कि अगर कोई स्त्री उनके सामने युद्ध करने आये तब वे अपनी प्रतिज्ञानुसार स्त्री से युद्ध नही करेंगे ,तब ही उन्हें मारा जा सकता है ।
🍓 अब किसी महिला को उनके सम्मुख युद्ध मे कैसे लाया जाए इस पर पांडवो में विचार हुआ । भगवान श्री कृष्ण ने इसका भी हल बताया कि द्रोपदी के बड़े भाई महारथी " शिखंडी " पूर्व में स्त्री थे - भीष्म पितामह उन्हें अब भी स्त्री ही मानते है , इसलिए वे उनके सम्मुख आने पर वे युद्ध से विरत हो जाएंगे । रथ पर शिखंडी को सामने रखकर अर्जुन पीछे रहकर निहत्थे भीष्म को मार सकते है --
🚫पहले तो युधिष्ठिर और अर्जुन ऐसे अनैतिक कार्य करने को तैयार नही हुए परंतु और कोई उपाय न होने के कारण और श्री कृष्ण द्वारा यह बताने पर कि शिखंडी का जन्म ही भीष्म की मौत के लिए हुआ है --अर्जुन श्री कृष्ण की आज्ञा माने को तैयार हो गए -- यही हुआ , शिखंडी को देखकर भीष्म हथियार रखकर घूम कर खड़े हो गए और अर्जुन के भीषण शक्तिशाली बाणों ने उन्हें बींध दिया । महाबली भीष्म रथ से नीचे गिर कर बाणों की शैया पर लेट गए । तब सभी कौरव और पांडव उनके पास आये - भीष्म का सिर लटक रहा था , कौरव तकिया लेकर आये जिसे भीष्म ने लेने से इनकार कर दिया और शैया के अनुरूप तकिया मांगा । तब अर्जुन ने तीन बाण भीष्म के सिर के नीचे मारे जिससे उन्हें बाणों का ही तकिया उपलब्ध हो गया -- भीष्म के पानी मांगने पर अर्जुन ने तीर मारकर पृथ्वी से जलधारा प्रकट कर दी --
*******महारथी अत्यंत बलवान "" शिखंडी ""को भीष्म ने स्त्री ही क्यों माना ?********
🍓 पूर्व समय मे अपने सौतेले भाई विचित्रवीर्य के लिए भीष्म पितामह ,काशीराज की पुत्रियो के स्वयंवर से उनकी तीनो पुत्रियो को , जबरन हर कर लाये थे - इनमे बड़ी पुत्री #अम्बा ने बताया कि वह राजा शाल्व से प्रेम करती है और उन्हीं को स्वयंवर में वरण करती -- तब विचित्रवीर्य ने अम्बा को उसकी इच्छानुसार वापस राजा शाल्व के पास भेज दिया -मगर भीष्म द्वारा हरण होने के कारण शाल्व ने उसे अपनाने से #इनकार कर दिया -
🍎 तब वह वापस हस्तिनापुर आयी मगर उसके दूसरे से प्रेम करने के कारण , विचित्रवीर्य ने उससे विवाह करने से इनकार कर दिया - तब वह भीष्म के पास गयी और सभी समस्याओं का कारण , भीष्म द्वारा उसका जबरन हरण मानकर ,भीष्म से उसे अपनाने को कहा , परंतु भीष्म , अपनी अविवाहित रहने की भीष्म प्रतिज्ञा को तोड़ने के लिए तैयार नही हुए - तब अम्बा ने भीष्म जी के गुरु श्री परशुराम जी से शिकायत की -श्री परशुराम जी ने #भीष्म को #अम्बा से #विवाह करने की #आज्ञा दी जिसे भीष्म के न मानने पर श्री परशुराम और भीष्म में भीषण युद्ध कई दिनों तक हुआ , किसी के न जीतने पर श्री व्यास जी ने आकर गुरु और शिष्य में युद्ध बन्द कराया - निराश अम्बा ने विकट तपस्या की तथा श्री हरि से अगले जन्म में #भीष्म की #मृत्यु बनने का वरदान मांगा और फिर योगाग्नि में भस्म हो गयी ।
🍎 अम्बा ही इस जन्म में अम्बा राजा द्रुपद के यहां पुत्री शिखंडी बनकर पैदा हुयी परंतु राजा को भगवान शिव जी ने पुत्र होने का आशीर्वाद दिया था , इसलिए द्रुपद ने उसे शिखंडी को पुत्र बनाकर पाला , धनुर्विद्या आदि की शिक्षा दिलवाई - सभी को उसके पुत्र होने का पता था - और एक दिन शिखंडी का विवाह भी कर दिया - जब नवांगतुक बहू को शिखंडी के स्त्री होने और अपने साथ धोखा होने का पता चला , तब उसके पिता ने अपमान का बदला लेने के लिए द्रुपद पर चढ़ाई कर दी ।
🚫 सभी विपत्तियों का जिम्मेदार अपने को मानते हुए शिखंडी महल छोड़कर जंगल भाग गया ; संयोग की बात जंगल मे शिखंडी को एक यक्ष मिला जिसने शिखंडी की प्रार्थना पर कुछ समय के लिए अपना पुरुषत्व शिखंडी को ट्रांसफर करना स्वीकार कर लिया - शिखंडी यक्ष की कृपा से पूर्ण पुरुष बन कर अपने राज्य में वापस आया दोनो राजाओ में और सारा झगड़ा समाप्त हो गया ।
🍱 संयोग की बात उसी समय यक्ष समाज के राजा ने उस यक्ष को बुलाया और उसके स्त्री होने के कारण क्रोधित होकर उसे जीवन भर स्त्री बन कर रहने का श्राप दे दिया --अब शिखंडी हमेशा के लिए पुरुष हो गया ।
🚫 यद्द्पि शिखंडी उस समय पूर्ण पुरुष था , महारथी था परंतु इसी कारण भीष्म पितामह अब भी
शिखंडी को उसके मूल रूप स्त्री ही मानते थे -
🎈भीष्म पितामह की यह #जिद्द और #वर्तमान #सच्चाई को #न #मानना , ,पांडवो का #हथियार और भीष्म की #मौत बनी -- वैसे भी अम्बा ( शिखंडी ) को भीष्म की मौत का कारण बनना ही था --
( आधुनिक वैज्ञानिक शब्दो मे शिखंडी का पुरुष बनना शायद "sex change " आपरेशन विधि द्वारा सम्भव हुआ होगा - तो क्या यह उच्च तकनीक उस समय उपलब्ध थी ??)
🚫🍎 "" प्रतिज्ञाओं के बहाने अधर्म के रास्ते पर चलना और सत्य को न मंजूर करने की जिद्द-- ही भीष्म पितामह के गिरने का कारण बनी जिसके कारण उन्हें अत्यंत कष्टकारी बाण शैया पर सोना पड़ा ""

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