महाभारत कथा - 494 , वचन के चक्रव्यूह में बंधे भीष्म पितामह

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 पोस्ट --( 494 )- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा ( ९४ ) 🚫 प्रतिज्ञाओं और वचन के चक्रव्यूह में बंधे भीष्म  पितामह - 

     🍎 भीष्म पितामह  द्वारा पांडव सेना का भयंकर संहार करते हुए  9 दिन बीत गए थे । दुर्योधन भीष्म  के निश्चय  कि वे पांडवो  की सेना के 10000 वीरों का तो  रोजाना  भयंकर युद्ध करके  संहार करेंगे परंतु  पांडवो के भी पितामह  होने के कारण , प्रेमवश पांचो पांडवो  का वध नही करेंगे -- से दुखी था - विजय के लिए पांडवो का वध जरूरी था ।
     🍎 इसलिए  9 वे दिन युद्ध समाप्ति के बाद शाम  के  समय  दुर्योधन ने  अपने सेनापति  भीष्म  पितामह को #उलाहना  दिया और उन पर  पांडवो  के साथ  #मिले  होने और   #पक्षपात  करने का आरोप लगाया - इससे अत्यंत दुखी होकर क्रोध में आकर भीष्म पितामह ने पांच बाण निकाल कर ;   दुर्योधन से  अगले दिन युद्ध मे  पांचो  पांडवो का भी वध करने की प्रतिज्ञा कर  दी--
      🌰 भीष्म पितामह के लिए कुछ भी  #असंभव नही था परंतु वे अपनी ही  #प्रतिज्ञाओं  के  #चक्रव्यूह में  #फंस गए ।  एक तरफ पारिवारिक प्रेम के कारण  पांडवो  को न मारने का निश्चय   तथा  मन ही मन  पांडवो के विजय की आंतरिक इच्छा तथा दूसरी ओर दुर्योधन को पांडवो को मारने का दिया वचन ; इसका एक ही हल था अगले दिन स्वयं  उनकी  मृत्यु  हो जाये ।
     🍊 उधर  भीष्म की पांडवो  को मारने की प्रतिज्ञा का  समाचार जानकर  #पांडव अत्यंत #भयभीत हो गए 
-रात में जब पांडव  गुप्त मन्त्रणा करने एकत्रित हुए तब युधिष्ठिर ने अपनी व्यथा श्री कृष्ण को बताते हुए  कहा कि --
     🚫"" भीष्म को जीतना  #असम्भव  है । हम उनकी ओर देख भी नही पाते है । हम बुद्धि की दुर्बलता के कारण. युद्ध में फंस गए है - अब हमारे जीवन की रक्षा दुर्लभ है  बताइये हम क्या करे ? "" 
        ( महाभारत  भीष्म पर्व अध्याय  107  श्लोक  26 / 40 )
       श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को ढाढस बंधाते  हुए कहा 
      🍎 "" आप चिंता मत कीजिये , मुझे  #आदेश दीजिये , मैं भीष्म के  साथ युद्ध करूंगा । मैं कुरुकुल पितामह भीष्म को  आज ही मारकर रथ से गिरा दूँगा  । 
      🍓🍎 जो पांडवो  का शत्रु है वह  मेरा भी शत्रु है ; आपके मित्र मेरे भी मित्र है  ; अर्जुन मेरे सखा , संबंधी  ,और शिष्य है ; मैं अर्जुन  के लिए अपने  प्राणों का भी परित्याग कर सकता हूँ । नरेश्वर  ! दैत्यों और  दानवो  सहित संपूर्ण देवताओ को भी अर्जुन युद्ध मे मार सकते है , भीष्म की बात ही क्या है , उनके  जीवन  का थोड़ा सा ही समय बचा है --🚫🍓
          जब भीष्म ने अपने मृत्यु का रहस्य स्वयं द्रोपदी को बताया--
     🎈🍓फिर श्री कृष्ण की योजनानुसार  द्रोपदी  रात्रि के चौथे  प्रहर में    श्री  कृष्ण  के साथ  गुप्त रूप से  कौरव शिविर  में भीष्म पितामह के पास  गयी  और ध्यान में आंखे बंद किये हुए  भीष्म  के चरणों मे प्रणाम  किया । भीष्म  उस समय  प्रणाम  करने आने वाली ,  दुर्योधन की पत्नी  का  इंतजार कर रहे थे  इसलिए उन्होंने यही समझा कि दुर्योधन की पत्नी  आयी  है ; इसलिए  बिना देखे  "" सौभाग्यवती भव "" का  आशीर्वाद दे दिया -
       🍓🎈 तुरंत द्रोपदी बोली  -" पितामह  अब मैं सौभाग्यवती कैसे रहूंगी , जब आपने आज ही सभी पांचो  पांडवो  का वध करने की प्रतिज्ञा की है "" भीष्म चौंक पड़े  , समझ गए कि यह श्री कृष्ण की ही योजनानुसार ही हुआ है - 
       🍅 अब भीष्म अपने दोनों  पक्षों को दिए गए वचनों के चक्कर मे फंस गए , पांडवो  की प्राण रक्षा , उनकी यांनी भीष्म की  मृत्यु से ही सम्भव  थी  , मगर  भीष्म की मृत्यु उनकी  इच्छा पर निर्भर थी यानी  संग्राम में उनकी हार या मृत्यु बिना उनकी इच्छा के  सम्भव ही नही थी  तब द्रोपदी ने भीष्म पितामह से उनकी मृत्यु  कैसे हो  , इस रहस्य के बारे में पूंछा ?
        🚫 भीष्म  ने बताया कि  उनकी  #प्रतिज्ञा है  कि वे  ( १ ) जो पीठ दिखाकर  भाग रहा हो और  
( २ ) #स्त्रियों  पर कोई #प्रहार नही करेंगे  और 
         🍱 जब वे   युद्ध से  #विमुख हो तभी उन्हें मारा जा सकता है 🍱--
     🍊अब  प्रश्न था कि  युद्ध मे भीष्म से लड़ने को किस महिला को   और  कैसे  लाया जाए  ? इसका भी हल भीष्म ने स्वयम द्रोपदी को बता दिया कि  अगर द्रोपदी के भाई  #शिखंडी  आये तब वे  शिखंडी के पूर्व  समय  में स्त्री होने के कारण धनुष रख  देंगे  ,उससे युद्ध नही करेंगे ।
महाभारत कथा


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