महाभारत कथा - 493 , प्रतिज्ञाओं के चक्रब्यूह में फंसे भीष्म पितामह और पांडव-

mahabharat status photo, mahabharat status, mahabharat facebook status status in hindi,mahabharat status image,mahabharat whatsapp status

 पोस्ट ( 493 ) अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा -( ९३ )-- प्रतिज्ञाओं के चक्रब्यूह में फंसे भीष्म पितामह और पांडव----- जबकि धर्म की विजय के लिए अपनी प्रतिज्ञा को तोड़ने के लिए उद्दत हुए भगवान श्री कृष्ण---

        🚫🍎 श्री मद् भगवद् गीता प्रवचन के समय - #समय की #गति भी #रुक गयी थी --🚫🍎

      🍎🎆 एक बहुत आश्चर्य की बात हुयी थी कि जितने समय भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया , समय भी रुक गया था । अर्जुन के मोह ग्रस्त होकर धनुष का त्याग करने से लेकर श्री कृष्ण के गीता प्रवचन पूरा होने तक की घटनाओ का पता युद्धभूमि में मौजूद अर्जुन के अलावा किसी को भी नही चला - सभी के लिए जैसे वहां कुछ हुआ ही नही था ।


       युद्ध के पहले विपक्षी वरिष्ठ जनो को #प्रणाम करना -

      🍘 युद्ध को प्रारम्भ करने के पहले पांडव राजा #युधिष्ठिर ने विपक्ष के प्रमुख योद्धा वरिष्ठ आदरणीय जन - भीष्म पितामह , गुरु द्रोणाचार्य , कृपाचार्य और मामा राजा शल्य के पास जाकर उन्हें प्रणाम करके ,उनसे ही युद्ध करने के लिए #आज्ञा मांगी और #विजय के लिए #आशीर्वाद भी मांगा -,भले ही विरोधी हो अपने वरिष्ठों को प्रणाम करने से उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है जो हमेशा लाभकारी ही होता है ।

       🚫जब युयुत्सु ने पाला बदला -

      🍓 युद्ध प्रारम्भ होने के पूर्व श्री युधिष्ठिर ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा कि अन्याय के विरुद्ध उनके इस धर्म युद्ध मे , विपक्ष के जो योद्धा धर्म की विजय चाहते हों , वे उनके साथ आ जाएं । तब ध्रतराष्ट्र के दासी पुत्र युयुत्सु कौरवों का साथ छोड़ कर पान्डवों के साथ आ मिले । युयुत्सु ने युद्ध मे बहुत पराक्रम दिखाया था तथा जीवित बचने वाले सौभाग्य शाली व्यक्तियों में भी वे रहे ।

      🍊 और फिर श्री कृष्ण ,अर्जुन ,युधिष्ठिर , भीष्म , द्रोणाचार्य आदि सभी ने अपने अपने शङ्ख बजाए और युद्ध प्रारम्भ हुआ ।

        भीष्म का अद्भुत पराक्रम-

      🍓 और फिर महायुद्ध प्रारम्भ हो गया -कौरव सेनापति भीष्म पितामह ने रोजाना 10,000 पांडव पक्ष के योद्धाओ को मारने का दुर्योधन से वायदा किया था - पांडव सेना में भीष्म के पराक्रम से भय व्याप्त हो गया था-,

  युधिष्ठिर के द्वारा चिंता करने पर भगवान कृष्ण ने उन्हें आश्वासन दिया और " #कौंचव्यूह " का निर्माण किया 


  श्री कृष्ण अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने को भी तैयार ( महाभारत -- भीष्म पर्व अध्याय -59 -- श्लोक 84 से 87 )

      🍊 युद्ध मे भीष्म का प्रचंड वेग बढ़ रहा था , कौरव पक्ष के अनेकों महारथियो ने अचानक अर्जुन को घेर लिया । उसी समय सात्यकि अर्जुन की सहायता के लिए आये और पांडवो की भागती सेना के वीरो को रोकने का प्रयत्न किया । श्री कृष्ण ने यद्द्पि युद्ध मे हथियार नही उठाने की प्रतिज्ञा की थी 

      🍎🚫 परंतु समय की आवश्यकता को देखकर श्री कृष्ण सात्यकि से बोले --

     🍎 "" शनिवंश के प्रमुख वीर सात्वरत्न ( सात्यकि ) ! जो भाग रहे है वे भाग जाएं - तुम देखो मैं अभी संग्राम भूमि में सहायक गणों के साथ #भीष्म और #द्रोणाचार्य को रथ से मार गिराता हूँ "


    🚫"" सात्यकि आज कौरव सेना का कोई भी रथी , क्रोध में भरे हुए , मुझ कृष्ण के हाथों जीवित नही छूट सकता है , मैं अपना भयंकर #चक्र लेकर महान व्रतधारी भीष्म के प्राण हर लूँगा , ध्रतराष्ट्र के पक्ष में आये हुए सभी श्रेष्ठ नरेशो को मारकर मैं प्रसन्नता पूर्वक आज अजातशत्रु राजा युधिष्ठिर को राज्य से सम्पन्न कर दूँगा 

      🍓ऐसा कहकर भगवान ने #सुदर्शन चक्र का स्मरण किया - चिंतन करते ही चक्र उनके हाथ मे आ गया - श्री कृष्ण रथ से कूद पड़े और #भीष्म की ओर इस प्रकार #झपटे मानो कौरवो का प्रलय कर देना चाहते हों-- 

  ( कुछ जगह वर्णन मिलता है कि श्री कृष्ण ने एक टूटे हुए रथ का पहिया उठाया था जो सुदर्शन चक्र बन गया था उसी को लेकर श्री कृष्ण भीष्म की ओर उन्हें मारने दौड़े थे )


       भीष्म ने हाथो को जोड़कर प्रणाम करके ,उनका अभिनन्दन करते हुए कहा --

       🍎 "" प्रभो आइये मुझे रथ से मार गिराइए -- इससे तीनो लोको में मेरा गौरव बढ़ जाएगा और मेरा परम् कल्याण होगा "

       🚫🚫 " भीष्म फिर बोले "" प्रभो ! जब आपने युद्ध मे भाग न लेने और हथियार न उठाने की प्रतिज्ञा की थी ,तब मैंने भी प्रतिज्ञा की थी कि मैं आपसे हथियार उठवा ही लूँगा और देखिए आपने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ दी -- मैं जीत गया ""

        🍘 यह देखकर अर्जुन ने रथ से उतरकर बड़ी कठिनाई से श्री कृष्ण को रोका और स्वयँ शत्रुओ के संहार करने की प्रतिज्ञा करके उन्हें शांत किया --

    --- शेष अगली पोस्ट में ***** राम नाथ गुप्त कन्नौज ******

टिप्पणियाँ