महाभारत कथा -491

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 पोस्ट( 491)-- अथ श्री महाभारत कथा --  समीक्षा -( ९१ ) श्री मद भगवद गीता ज्ञान गंगा प्रवाह ( 24 )-अट्ठाहरवाँ अध्याय -द्वितीय  भाग -गीता के महान उपदेश की-अंतिम उपसंहार  पोस्ट--

       🍓 अब तक भगवान श्री कृष्ण ने सांख्य सिद्धांत ,कर्म योग के सिद्धांत   , त्याग , तपस्या के त्रिगुणी भेद , साधको के त्रिगुणी लक्षण,  उनके फल आदि  का विस्तृत वर्णन किया था । भगवान पुनः कहते है , की सात्विक साधना करने वाला जगत में समदर्शी , मिथ्याभिमान और सुख दुख में एक सा रहने वाला योगी , निश्चित रूप से ब्रम्ह को पा लेता है । 

       🍓🍍🍎 अब अपने उपदेश का उपसंहार करते हुए अर्जुन को  #सर्वोत्तम  #भक्तियोग और शरणागति होकर  अपनी शरण लेने का आदेश  देते है -

शतरुद्रीय स्तोत्र

     समर्पण भाव से पूर्ण शरणागति के लिए अर्जुन को आदेश --

     🚫  है अर्जुन !  मन से सभी  #कर्मो को मुझ में  #निक्षेप करके , तथा  #बुद्धियोग का  #अवलम्बन लेकर  , तू  #मेरा   #पारायण और निरंतर  #मुझमे  #चित्त वाला हो जा , मेरी कृपा से समस्त कठिनाइयों को अनायास ही पार कर लेगा  ;  मेरा आश्रय लेकर   पुरुष सब कर्मो को सदा  करता हुआ भी ,सनातन अविनाशी पद को प्राप्त कर लेता है -

      🎃  यदि अहंकार के कारण मेरी बात नही मानेगा या नही सुनेगा तो तू नष्ट हो जाएगा । तेरा #अहंकार 

 *कि मैं युद्ध नही करूंगा *  #मिथ्या है क्योंकि तेरी प्रकृति ही तुझे युद्ध में लगा देगी । जिस कर्म ( युद्ध ) को तू मोह  के कारण करना नही चाहता ,उसको अपने पूर्वकृत  #स्वाभाविक कर्म बंधा हुआ  #विवश होकर करेगा

     🌏 अर्जुन ! शरीर रूपी यंत्र में आरूढ़ हुए सम्पूर्ण प्राणियो को ,अंतर्यामी परमेश्वर ,अपनी माया से ,उनके कर्मों के अनुसार ,भृमण कराता  है - वह परमात्मा  सब प्राणियों  के ह्रदय में स्थित है । अर्जुन ! तू सर्वभाव से उसी परमेश्वर की शरण मे जा । उस परमात्मा की कृपा से तू परम् शांति को और शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा --

        🌏🎈🚫सर्वधर्मान    परित्यज्य    मामेकं   शरणम व्रज ।

                       अहम  त्वा सर्वपापेग्यो मोक्ष यिष्यामि मा शुच: ।।( श्लोक 66 )

          तू संपूर्ण गोपनीय , मेरे परम् श्रेष्ठ वचन को फिर सुन -तू मेरा द्दढ इष्ट  अतिशय प्रिय है -अतएव तेरे ( तथा तेरे जैसे अति प्रेमी भक्तो  के हित् )  में ,  तुझसे विशेष बात कहता हूँ --


        🍍🎈🍓अर्जुन ! तू मुझमे मन वाला हो  , मेरा भक्त बन ; मेरा पूजन कर और मुझे प्रणाम कर  । ऐसा करने से तू मुझे ही मिलेगा ।

     🚫 **** सब  धर्मों ( साधन विधियों ) को त्याग कर  ,तू केवल मुझ परम् पुरुषोत्तम  परमेश्वर  ( श्री कृष्ण ) की शरण मे आ जा - मैं तुझे सम्पूर्ण पापो से मुक्त कर दूंगा -तू शोक  मत कर****

    इस गीता शास्त्र की महिमा  -

     🍎 इस परम् ज्ञान को किसी नास्तिक , अश्रद्धावान ,दोष दृष्टि  रखने वाले से नही कहना चाहिए। जो पुरुष श्री कृष्ण में पराभक्ति करके  भक्तो में कहेगा वह मेरा परम् प्रिय कार्य करने वाला ,  निश्चित ही मुक्त होगा 

     🍓 इस  गीता शास्त्र का अध्ययन  करने वाला  ,मेरी पूजा  *ज्ञान यज्ञ *से करने का भागी होगा , जो व्यक्ति  श्रद्धा  से इसका श्रवण करेगा , वह भी पापो से मुक्त होकर परम् लोक में जायेगा ।


           अर्जुन द्वारा मोह  नाश  होने की स्वीकृति -- 

     🍊🍎भगवान श्री कृष्ण के पूछने पर  अर्जुन बोला -- आपकी कृपा से मेरा  #मोह  #नाश हो गया है ; और मैने #स्मृति   #प्राप्त कर ली है -अब मैं  #संशय   #रहित होकर स्थित हूँ- अतः: आपके वचनों का पालन करके #युद्ध    #करूंगा ।

        🚫 इस प्रकार  संजय ने  श्री व्यास जी की कृपा से दिव्य दृष्टि पाकर इस परम् पावन   गीता शास्त्र  का वर्णन किया 

      ***************** अपनी बात ***************

           श्री राम  चरित मानस के आधार पर तुलनात्मक  व्याख्या -

      🍓 व्याख्या --भगवान   श्री  कृष्ण ने इस प्रकार  सांख्य योग ,त्याग , योग विद्या आदि का वर्णन करते हुए अंत मे अर्जुन को  निष्काम कर्म योग करते हुए  परम् भक्तियोग--पूर्णतया  अपनी शरण ग्रहण करने का  आदेश दिया ~

         श्री राम चरित मानस में भी श्री राम -विभीषण से कहते है -( सुंदर कांड दोहा 47 के बाद  )-

                   जो नर होइ चराचर    द्रोही । आवै  सभय  शरण   तकि  मोही  ।।

                   तजि मद मोह  कपट छल नाना  । करऊँ सद्द तेहि साधु समाना ।।

                   जननी  जनक बंधु सुत  दारा  । तनु  धनु भवन सुह्रद परिवारा  ।।

                   सबके  ममता   ताग  बटोरी  । मम  पद  मनहिं  बाँधि बर डोरी  ।।

                   समदर्शी  इच्छा   कछु  नाहीं  ।  हर्ष  शोक   भय नहिँ मन मांही  ।।

                   अस सज्जन मम उर बस कैसे।  लोभी  हृदय  बसहि धनु  जैसे  ।।

     इस लिए  अँत में  हम सब  की प्रभु से यही  प्रार्थना है -- 

                    🍓  श्रवण सुजसु सुनि  आयउँ , प्रभु भंजन  भव भीर ।।

                               त्राहि   त्राहि आरति   हरण  , सरन सुखद रघुबीर  ।।( सुंदर  कांड  दोहा  45 )

            और यह भी प्रार्थना है --

                     🍘   परमानन्द   कृपायतन , मन परिपूरन  काम ।

                            प्रेम भगति  अनपायनी  देहु हमहि श्री  राम  ।।

******** क्रमशः ************* राम नाथ गुप्त   कन्नौज ********

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