महाभारत कथा -489, त्रिविध पूजा

mahabharat status photo, mahabharat status, mahabharat facebook status status in hindi,mahabharat status image,mahabharat whatsapp status

 - पोस्ट -( 489 )- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा - ( ८९ ) - श्री भगवद गीता ज्ञान गंगा प्रवाह नम्बर 22 -सत्रहवाँ अध्याय -- त्रिविधि पूजा ; त्रिविधि आहार ; त्रिविधि यज्ञ ; त्रिविधि तप ; त्रिविधि दान और त्रिविधि ब्रम्ह की आराधना -

     🍘 अर्जुन ने पूछा -- "जो लोग शास्त्र विधि को छोड़ करके - श्रद्धा युक्त तप करते है , उनकी निष्ठा -सात्विकी है या राजसी या तामसी " ?

     🚫 भगवान बोले --मनुष्यो की शास्त्रीय संस्कारो से रहित , केवल स्वभाव से उतपन्न श्रद्धा उसके अंतःकरण के अनुकूल -सात्वकी ,राजसी और तामसी तीनो प्रकार की होती है -


   🎈 1- त्रिविध पूजा --- सात्विक पुरुष देवताओ को पूजते है जबकि 

               राजस यक्ष राक्षसों को और तामस लोग प्रेत और भूतगणों को पूजते है ।


   🎈 2-आसुरी घोर तप --शास्त्रविधि रहित तप दम्भ और अहंकार से भरा हुआ ,होता है -- कामना और आसक्ति और बल के अभिमान में व्यक्ति , मनमाने विधि से अत्यंत उग्र तप करते है वे मूर्ख न केवल अपने शरीर मे मौजूद पंचभूतों को वरन मुझे भी बहुत कष्ट देते है ; यह आसुरी स्वभाव वाले है ।


   🎈3--त्रिविध आहार --सात्विक पुरुष -आयु ,सात्विक , वृत्ति ,बल ,आरोग्य ,सुख और प्रीति बढ़ाने वाले ,--रसीले ,चिकने ,स्थिर और आनन्ददायक भोजन करते है ;; --

     🍍कड़वे ,खट्टे , नमकीन गर्मागर्म ,तीखे ,चरपरे ,और दुख ,सुख और रोग पैदा करने वाले भोजन के पदार्थ ,,राजसी पुरुषों को पसंद हैं ;; ---

      🍍 बासी ,रस हीन, दुर्गन्धयुक्त , जूठा और अपवित्र भोजन तामसी पुरुषों को पसंद है ।


   🎈4 -त्रिविध यज्ञ ---फल न चाहने वाले पुरुषों द्वारा **यज्ञ करना ही कर्तव्य है **यह मानकर शास्त्र विधि से युक्त जो यज्ञ किया जाता है , वह सात्विक है ;; --

      🍍फल को ध्यान में रखकर जो केवल दम्भ आचरण के लिए तप किया जाता है , वह राजसी है ;; ---

      🍍और शास्त्रविधि हीन ,अन्नदान से रहित , बिना मन्त्रो के ,बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के यज्ञ को तामस यज्ञ कहते है ।


     🎈5--त्रिविध भेद से शारीरिक , वाणी का और मानसिक तप ---  

     🍍 देवता , ब्राह्मण ,और गुरु तथा पंडितों की पूजा , पवित्रता ,सरलता ,ब्रम्हचरण , और अहिंसा का पालन करना ही -शरीर संबंधी तप है 

     🍍 ऐसी बात बोलना जिससे किसी का भी दिल न दुखे--जो सत्य ,प्रिय और हित करने वाला हो - यह वाणी का तप है ।   

      🍍मन की प्रसन्नता , शांत चित्तता , मौन, आत्मनिग्रह और भाव की शुद्धता -यह मानसिक तप है ।


     🎈 इन तीनो प्रकार के तपो को यदि व्यक्ति परम् श्रद्धा के साथ ,बिना फल की आकांछा के और योगयुक्त होकर करे तब यह सात्विक हैं --

     🍍जो तप सत्कार ,मान या पूजा पाने के लिए या लोक दिखावे के लिए किया जावे , वह राजस कहलाता है। ---- और 

      🍍जो तप अपने को पीड़ा पंहुचा करके और दुराग्रह के साथ औरो को दुख देने के किये किया जाता है -वही तामस तप है ।


   🎈 6- दान -- जो दान कर्तव्य समझ कर , बिना प्रतिफल की आशा के , देश काल और पात्र देखकर दिया जाए वह सात्विक है -

     🍍 जो दान उपकार के बदले में , किसी प्रतिफल की आशा से , मन से दुखी होकर दिया जाए वह राजस है 

     🍍तथा जो दान बुरे देशों में ,बुरे समय मे ,कुपात्रों को बिना आदर सत्कार के ,अवज्ञा के साथ दिया जाए ,वह तामस है ।


       🎈 7-- ॐ , तत् , सत्--यह तीन प्रकार का सच्चिदानन्द ब्रम्ह का नाम है --

       🍍 वेद मंत्रों का उच्चारण , शास्त्र विधि से यज्ञ , दान और तप में ॐ नाम से ब्रम्ह के नाम का उच्चारण करके ही साधना प्रारम्भ होती है --

        🎈तत् माने यह सब कुछ तेरा ही है 🎈और 🎈सत माने तू ही सत्य है- परमात्मा ही सत्य है 🎈


         🍎 अंत मे फिर भगवान बोले --* अर्जुन #अश्रद्धा से किया हुआ हवन ,तप दान सभी कुछ #असत है --यह सब कार्य न तो मरने के बाद और न ही इस लोक में लाभदायक होता है --

       * शेष अगली पोस्ट में ******** राम नाथ गुप्त कन्नौज******

टिप्पणियाँ