पोस्ट -( 486)-- महाभारत कथा समीक्षा ( ८६ ) तथा श्री मद भगवद गीता ज्ञान गंगा प्रवाह 19 -- योग शास्त्र तथा त्रिगुण मयी श्रष्टि आदि का विवरण --अध्याय 14 --श्लोक 1 से 27 तक -
🚫 भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को इस अध्याय में श्रष्टि के गूढ़ रहस्य को बताते हुए कहा । इस ज्ञान को जानकर मुनियो ने सिद्धि पायी है जिससे वे आवागमन से छूटकर मुक्त हो गए -- श्री कृष्ण बोले --
🎈 त्रिगुण मयी प्रकृति- - श्रष्टि की उत्पन्न करता मेरी योनि स्वरूप है-- जो समस्त भूतो की माता है और वे ( भगवान ) ही इस श्रष्टि के पिता है जो प्रकृति में जीव रूपी गर्भ का संसाधन करते है -- बाद में प्रकृति के तीनों गुण , देह में रहने वाली आत्मा को बांध लेते है - इनका विवरण इस प्रकार है
🎈 1- सत्वगुण - ज्ञान का दाता-निर्दोष ,निर्मल और प्रकाश करने वाला सतोगुण , प्राणी को* सुख और ज्ञान * के साथ बांधता है । रजोगुण और तमोगुण को दबाने से सतोगुण बढ़ता है । इसमे सारी इन्द्रियो में निर्मल ज्ञान का प्रकाश होता है । सत्वगुण के आधिक्य के समय मृत्य होने पर, मनुष्य को ऊपर ,देवताओ के निर्मल लोको की प्राप्ति होती है। पुण्य कर्म का फल निर्मल और सात्विक होता है ।
🎈 2-- रजोगुण --तृष्णा और आसक्ति उत्पन्न करने वाला रागात्मक रजोगुण , प्राणी को * कर्म संग *से बांधता है । यह कर्म में आसक्ति उत्पन्न करता है । सत्वगुण और तमोगुण को दबाने से रजोगुण बढ़ता है । रजोगुण होने पर , लोभ ,कर्म में आसक्ति ,अतृप्ति और इच्छा उत्पन्न होती है । रजोगुण के आधिक्य के समय देह छोड़ने पर संसार मे प्रारब्धानुसार पुनर्जन्म होता है ।
🎈 3-- तमोगुण - अज्ञान से उत्पन्न होने वाला तमोगुण ,सब प्राणियों को मोह में डालता है -और उनको
* प्रमाद ,आलस्य और निद्रा* से बांधता है । तमोगुण का व्यक्ति पर राज्य होनेपर --- ज्ञान और कर्म की ओर आसक्ति न होकर आलस्य की ओर झुकाव और कर्त्तव्य की विस्मृति होती है -- इसका फल अज्ञान होता है -
इसके आधिक्य के समय मृत्यु होने पर , विवेक हीनो में जन्म मिलता है और प्राणी अधोगति को प्राप्त होता है
🎆 जब साधक देखता है कि इन गुणों से #परे भी कोई #तत्व है , तब वह मेरे भाव मे मिल जाता है -तब वह देह की उत्पत्ति के कारण , इन तीनो गुणों से छूटकर , मुझ में मिल जाता है-
अर्जुन ने पूछा --
प्रभो ! किन लक्षणो से यह मालूम होता है कि मनुष्य इन् तीनो गुणों से परे *गुणातीत *हो गया है और कैसे गुणातीत हुआ जा सकता है
🚫 श्री कृष्ण बोले --** जो प्रकाश ( सत्व गुण ) ,प्रवृत्ति ( कर्म रजोगुण ), और मोह ( तमोगुण ) के कारण होने पर भी उनसे #घृणा नही करता और किसी के समाप्त होने पर उसकी इच्छा नही करता, विचलित नही होता--जो हर समय में #उदासीन सा बना रहता है , गुणों से #चंचल नही होता ; जो सुख और दुख में एक सा रहता है ; और अपने आत्मरूप में स्थित रहता है ,जिसके लिए मिट्टी ,पत्थर और सोना बराबर हैं ,प्रिय और अप्रिय को जो एक सा जानता है --- जो धीर है ,निन्दा और स्तुति को #समान समझता है , जो मान और अपमान को , जो शत्रुओं और मित्रो को समान समझता है ,वही** गुणातीत ** है ।
🎈इसके साथ ही जो अनन्य भक्ति योग से मेरी सेवा करता है वह इन तीनो गुणों से परे होकर ब्रम्हभूत अवस्था को प्राप्त होता है -
🍎 मैं ही -अम्रत- और- अव्यय ब्रम्ह का- श्वाशवत सनातन धर्म का- और एकांतिक परम सुख- का आधार हूँ -
*** शेष अगली पोस्ट में ******* राम नाथ गुप्त कन्नौज----

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