महाभारत कथा -485

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पोस्ट -( 485 )-अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा ( ८५ ) - और श्री मद भगवद गीता ज्ञान गंगा प्रवाह ( 18 )--योग शास्त्रे क्षेत्र - क्षेत्रज्ञ विभाग योग नामक --त्रयोदश अध्याय --

  अर्जुन के प्रश्न और भगवान श्री कृष्ण के उत्तर और संक्षिप्त में इस अध्याय के अनमोल उपदेश --

  🚫 1- छेत्र क्या है ? --श्री भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उत्तर दिया - यह #शरीर ही #छेत्र है --


  🎈 2- सविकार छेत्र - पंच महाभूत ( पृथ्वी ,जल ,अग्नि ,वायु आकाश ) +अहंकार +बूद्धि +अवयक्त प्रकृति +दसो इंद्रियां +मन +पांचो महाभूत के गुण ( शब्द ,स्पर्श , रूप ,रस ,गन्ध ) +इच्छा +द्वेष + सुख + दुख +संघात + चेतना और घ्रती --इन्ही सबका समुदाय ही #विकार उत्पन्न करता है ; इसलिए यह इनसे मिलकर #सविकार #छेत्र जाने गए है ।


   🎈 3- ज्ञान क्या है - मान कि इच्छा न करना +घमण्ड न करना +अहिंसा +क्षमा + सरलता +गुरुसेवा +पवित्रता +स्थिरता +आत्म निग्रह +इन्द्रियो से वैराग्य + अहंकार शून्यता + दोषों (जन्म मृत्यु बुढापा राग दुख आदि )से परे रहना +कर्म फल में वासना नही रखना +संबंधियों में मोह न रखना +दुख सुख में समभाव + तथा मुझ (भगवान ) में #अनन्य #योग के साथ #अचल #भक्ति रखना + एकांत में रहना +आत्मज्ञान को जानने का नित्य प्रयत्न ; यह सब #ज्ञान है -


   🚫 4~-छेत्रज्ञ क्या है ? --- सब कुछ जानने वाला , जिसे जानने से अमृत्व प्राप्त होता है * #ब्रम्ह* ही #सत्य और #छेत्रज्ञ है । इसके चारों ओर आंखे हाथ मुंह और कान है ,वह इस लोक में #समाया हुआ है ,इस ब्रम्ह में सभी इन्द्रियो के गुणों का आभास होता है परन्तु वह इन्द्रियो से रहित है ; वह सबको धारण किये हुए है फिर भी सबसे अलग है ,वह सभी भूत मात्र के अंदर भी है और बाहर भी है ,पास भी है और दूर भी है और सभी भूतो को उत्पन्न ,धारण और नाश करने वाला है ; यह अंधकार से परे ज्योतिष्मान पदार्थो की भी ज्योति है ,सबके #हृदय में टिका हुआ है , यही #परम #ब्रम्ह जानने योग्य है ।


    🎆 इन तीनो छेत्र , ज्ञान और छेत्रज्ञ , को भली भांति जानकर मेरा भक्त मुझे प्राप्त होता है ।


    🚫 5- प्रकृति और पुरुष दोनों अनादि हैं ; विकार और गुण प्रकृतिसे उत्पन्न होते है --


    🎈 6- कार्य और कारण के #कर्तव्य का हेतु #प्रकृति ही है ।


    🎈7- सुख और दुख के भोग का कारण पुरुष है ।


    🎈 8- प्रकृति में स्थित पुरुष ; प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है । अच्छी या बुरी योनियों में जन्म ग्रहण करना ; इन्ही गुणों के संयोग से होता है ।


   🎈 9- इस देह के भीतर टिके हुए #साक्षी ,आज्ञादाता ,भर्त्ता और #भोक्ता ही- #परमेश्वर -परमात्मा और परम पुरुष है ; इस प्रकार जो पुरुष प्रकृति को गुणों के सहित जानता है वह किसी भी तरह बरतते हुए संसार मे फिर जन्म नही लेता ।


    🎈 10 -कुछ लोग ध्यान से , कुछ सांख्य योग से और कुछ कर्म योग से आप ही अपनी आत्मा को देख लेते है और जो ज्यादा नही जानते है वे दूसरो से सुनकर ही उपासना करके मृत्यु से पार उतर जाते है ।


   🎈11 - सब भूतो और नाशवान पदार्थो में भी जो समान रूप से स्थिर रहने वाले मुझ परमेश्वर को देखता है -तथा जो यह देख पाता है के ** सब प्रकार से #प्रकृति ही काम #करती है -और #आत्मा #अकर्ता है** वही सही है -


    🎈12 - जब पुरुष सब भूतो के भीतर , प्राथक्य में एकत्व देखने लगता है और उसी से विस्तार होता हुआ देख पाता है , तभी वह ब्रम्ह को प्राप्त करता है ।


     🎈13 - अनादि और निर्गुण होने से परमात्मा अव्यय है ; शरीर न होने के कारण न तो वह कुछ करता है ,न किसी कार्य मे लिप्त होता है -- जैसे यह आकाश सूक्ष्म होने के कारण ,हर जगह होता हुआ भी किसी मे लिप्त नही होता वैसे ही #देह में #सर्वत्र रमी हुयी #आत्मा भी इससे #लिप्त नही होती ।


    🚫 है अर्जुन ! जैसे एक सूर्य ही सारे लोकों प्रकाशित करता है ; वैसे ही जितने क्षेत्र ( शरीर ) है सभी परमात्मा क्षेत्रज्ञ के कारण प्रकाशित है ; जो लोग ज्ञान के नेत्रों से , क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का यह अंतर तथा भूत और प्रकृति के मोक्ष को जान लेते हैं वे निश्चित ही परम ब्रम्ह के पास पंहुच जाते है ।

  ************** ***** अपनी बात ************************

    अध्याय का सार --- शरीर छेत्र ( खेत ) है परंतु प्रकृति जन्य माया के सम्पर्क में आते ही ऊपर लिखे तमाम विकारों से ग्रसित हो जाता है ।

        श्री रामचरित मानस के अनुसार ----

        🎈भूमि परत भा डाभर पानी । जिमि जीवहि माया लिपटानी ।।

   वर्षा का शुद्ध जल भूमि के सम्पर्क में आते ही मिट्टीमय हो जाता है ऐसे ही शुद्ध परमात्व स्वरूप जीव जन्म लेते ही माया से ग्रसित हो जाता है ।


--- तब जो योगीजन मनोनिग्रह व कठिन साधना द्वारा ज्ञान के नियमो का पालन करते है , वे छेत्रज्ञ परमात्मा को पा लेते है 

        **** शेष अगली पोस्ट में **********राम नाथ गुप्त कन्नौज
 

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