महाभारत कथा -483

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 पोस्ट -( 483 )- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा -( ८३ ) - और श्री मद् भगवद् गीता - ज्ञान गंगा प्रवाह नम्बर ( 16 ) --एकादश अध्याय ( द्वितीय भाग ) श्लोक 29 से 55 तक -- भगवान के विराट रूप का दर्शन -

       🚫 अर्जुन की प्रार्थना पर भगवान श्री कृष्ण ने उसे अपने विश्वव्यापी अत्यंत विराट रूप का दर्शन कराया - ऐशर्व्य मय और सौम्य रूप के साथ ही भगवान ने अत्यंत डरावने , रौद्ररूप , महाकाल रूप का भी दर्शन अर्जुन को कराया ।

       🚫 अर्जुन ने देखा , कि ध्रतराष्ट्र के सभी पुत्र ,भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य ,कर्ण , दोनो पक्ष के ,राजाओ के तथा योद्धाओं के समुदाय ; अत्यत तेजी से , भगवान के #विकराल #दाढ़ों वाले भयानक #मुखों में #प्रवेश कर रहे है । तमाम योद्धा , चूर्ण हुए सिरों सहित , भगवान के दांतों के बीच मे लगे दीख रहे है ,जैसे नदियां समूद्र में मिलने के लिए बहुत तेजी से प्रवेश करती है वैसे ही #शूरवीर मनुष्यो के #समुदाय अति वेग से , प्रभु के प्रज्वलित #मुखों में जा रहे है ~ प्रभु संपूर्ण लोको को प्रज्वलित मुखों द्वारा प्रसन्नता पूर्वक चाट रहे है , प्रभु का उग्र प्रकाश सम्पूर्ण जगत को अपने तेज से परिपूर्ण करके #तापायमान कर रहा है --


       🍓 फिर अर्जुन भगवान से बोले -- " हे प्रभु ! आपके इस महान रूप को देखकर सब लोक व्याकुल हो रहे है - -हे देवो में श्रेष्ठ ! उग्र रूप वाले आप कौन है ? -- प्रसन्न होइए ; मैं आपके बारे में तत्व से जानना चाहता हूँ ।


       🚫 श्री कृष्ण बोले - " मैं इस समय लोको को #नाश करने में प्रवृत्र हुआ #महाकाल हूँ ; जो प्रतिपक्षियो की सेना में युद्ध करने आये #योद्धालोग है , उनकी मैं #निश्चित #मृत्यु हूँ ; वे सब तेरे बिना ( युद्ध न करने पर ) भी नही रहेंगे । यह सब काल के द्वारा मारे जा चुके है ।"

      🎃 " इस लिए है अर्जुन ! तू खड़ा हो । शत्रुओं को जीतकर यश को प्राप्त कर । धन धान्य से सम्पन्न राज्य को भोग ; और यह सब शूरवीर #पहले ही मेरे द्वारा #मारे जा चुके है । है सव्यसाची ! तू तो केवल #निमित्त मात्र ही हो जा । द्रोणाचार्य ,भीष्म पितामह ,जयद्रथ, कर्ण ,और बहुत से मेरे द्वारा #मारे #हुए योद्धाओं को तू #मार । भय मत कर । तू निसंदेह युद्ध में दुश्मनों को जीतेगा ,इस लिए #युद्ध कर "।


       🚫 केशव भगवान के वचनों को सुनकर ,हाथ जोड़े हुए भयभीत और कांपता हुये अर्जुन ने श्री कृष्ण की गद गद वाणी से #स्तुति की और अब तक सखा मानकर ,प्रभु के प्रभाव से अनजाने में प्रेम से या प्रमाद में ,या हंसी में जो अनुचित शब्द कहे हों ,उसके लिए उसने #छमा मांगी ।


      🍊 श्री कृष्ण बोले - " अनुग्रहपूर्वक मैने अपनी योगशक्ति के प्रभाव से इस अति विराट रूप जिसे इसके पहले किसी ने भी नही देखा , तेरे को दिखाया है "


       🍊 फिर अर्जुन बोले - " आपके इस आश्चर्यमय रूप को देखकर मैं #हर्षित भी हो रहा हूँ ,साथ ही मेरा मन भी से अति #व्याकुल भी हो रहा है , इस लिए है देव अब , इस रूप की #जगह अपने #चतुर्भुज रूप के दर्शन कराइये "-

      🌰 भगवान श्री कृष्ण , फिर अर्जुन की प्रार्थना पर उसके सम्मुख अति सौम्य चतुर्भुज रूप में प्रगट हो गए ।


      🎆 श्री कृष्ण बोले - " जो पुरुष मेरे लिए ही सभी कर्मो को करता है ,मेरे परायण ( #शरणागत ) है , #निष्कामभाव से मेरे भजन कीर्तन भक्ति में लगा रहता है ,सांसारिक बन्धनों में जिसको #मोह नही है ,वह अनन्य भक्ति वाला पुरुष मेरे को ही प्राप्त होता है " --

  *************** अपनी बात **********

     🍘 राम चरित मानस में भी श्री राम ने अपनी माता कौशल्या को सौम्य ऐश्वर्य शाली रूप के दर्शन कराए थे -माँ ने बालक रूपी राम को सोते हुए और प्रसाद पाते दो जगहों पर देखा था ।

  और फिर --*****देखरावा मातहि निज- अद्भुत रूप अखंड ।

                          रोम रोम प्रति लागे - कोटि कोटि ब्रम्हांड ।। ( बालकाण्ड दोहा 201 )

        🍒 परंतु भगवान श्री कृष्ण ने कृपाकर ,युद्ध के कर्तव्यकर्म की प्रेरणा देने के लिए जो सौम्य, ऐश्वर्यशाली और महाकाल के रूप के दर्शन अर्जुन को कराए ; ऐसा कहीं दूसरा उदाहरण नही है ।

   ** शेष अगली पोस्ट मे *** राम नाथ गुप्त कन्नौज*******

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