पोस्ट -( 481)- अथ श्री महाभारत कथा -- समीक्षा ( ८१ )- --श्री मद भगवद गीता ज्ञान गंगा प्रवाह नम्बर 14 --दसवां अध्याय -- 🚫 भगवान श्री कृष्ण द्वारा अपनी महिमा का वर्णन --
भगवान श्री कृष्ण बोले -
🚫 1- मेरी उत्पत्ति अर्थात विभूति लीला सहित प्रकट होने को देवता ,महर्षिजन ,कोई भी नही जानता है क्योंकि देवताओ ,महर्षियो व सभी प्राणियों का #मैं ही आदि कारण ( #जन्मदाता ) हूँ - जो मेरे को अजन्मा ,अनादि ,तथा महेश्वर मानकर तत्व से जानता है ,वह ज्ञानवान है और सम्पूर्ण पापो से मुक्त हो जाता है
🚫 2- भावों की उत्पत्ति --बुद्धि ,ज्ञान ,मोह ,क्षमा ,सत्य ,दम:( इन्द्रियो को वश में करना ) शम:( मन का निग्रह ) सुख ,दुख ,उत्पत्ति और प्रलय ,भय और अभय ,अहिंसा ,समता ,संतोष ,तप ,दान ,कीर्ति ,अपकीर्ति ,ऐसे प्राणियो के नाना प्रकार के #भाव -मेरे से ही #उत्पन्न है --
🚫 3- है अर्जुन ! सातों महर्षि ,पूर्व में पृगट हुए चारो सनकादि ऋषि , स्वयंभू आदि चौदह मनु ,यह मेरे #संकल्प से उत्पन्न हुए है । इन्हीं से संसार के सारे प्राणी उत्पन्न हुए है । जो मेरी परम एशवर्य रूप विभूति और योगशक्ति को तत्व से जानते है , मैं उन्हें तत्व ज्ञान देता हूँ । वे ध्यानयोग द्वारा मेरे साथ एकीकृत हो जाते है -उनके ऊपर अनुग्रह करने के लिए मैं उनके अंतःकरण में अज्ञान से उत्पन्न अहंकार को ज्ञान से प्रकाशित करके नष्ट कर देता हूँ -इसमे संशय नही है ।
प्रसिद्ध मन्त्र है --** तमसो मा ज्योतिर्गमय **है प्रभु मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो *
🚫 4- अर्जुन ने श्री कृष्ण से निवेदन किया - आप ,परम ब्रम्ह ,परम् धाम, परम् पवित्र है -क्योकि आपको सभी ऋषिजन -सनातन ,दिव्य पुरुष ,आदिदेव ,अजन्मा ,और सर्वव्यापी कहते है और देवऋषि नारद ,असित और देवल ऋषि ,महर्शी व्यास और स्वयम आप भी अपने बारे में यही बताते है । है देवो के देव ! भूतभावन
ईश्वर ! ---आप स्वयं ही अपनी योग शक्ति व दिव्य विभूतियो , जो इन सब लोको में व्याप्त है ,के बारे में विस्तार से बताइये ।
अर्जुन के पूछने पर श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य विभूतियो की मुख्य बातो को बताया -
🍎🍒🚫 5- है अर्जुन! मैं सभी भूतो ( प्राणियो ) के हृदय में स्थित सभी का #आत्मा हूँ --और सम्पूर्ण प्राणियो का आदि ,मध्य और अंत भी मैं ही हूँ -सभी प्राणियों में #श्रेष्ठतम #विभूतियुक्त मैं निम्न प्रकार से प्रगट हूँ-
🚫 🎃 मैं अदिति माता के बारह पुत्रो में विष्णु अर्थात वामन अवतार हूँ । ज्योतियो में किरणों वाला #सूर्य हूँ ।
; उनचास वायु देवताओ में मरीचि: नामक वायु देव ; नक्षत्रो में चंद्रमा ; वेदों में सामवेद ; देवो में देवराज इंद्र --इन्द्रियो में मन ; और भूत प्राणियो में उनकी चेतनता और ज्ञान शक्ति मैं ही हूँ ।
🍊 एकादश रुद्रों में मैं #शँकर भगवान हूँ -- यक्ष और राक्षसो में मैं धन का स्वामी कुबेर हूँ ,--आठ वसुओं में अग्नि हूँ ; पर्वतो में सुमेरु पर्वत हूँ । पुरोहितोंमें देवगुरु बृहस्पति #सेनापतियों में स्वामी कार्तिकेय --और जलाशयों में समुद्र मुझे जान ~
🍊 मैं महर्षियो में भृगु और ; वचनों में एक अक्षर ॐ कार ; सब प्रकार के यज्ञों में #जपयज्ञ ; स्थिर रहने वालों में #हिमालय पर्वत हूँ ; वृक्षों मेँ पीपल ; देवऋषियो में नारद मुनि ; गंधर्वो में चित्ररथ ; और सिद्धो में कपिल मुनि हूँ ; घोड़ो में अमृत के साथ उत्पन्न उच्चैश्रवा घोड़ा ; हाथियों में ऐरावत हाथी ; और मनुष्यों में राजा मुझको ही जान ।
🚫 मैं शस्त्रों में वज्र ; गौओ में काम धेनु ; और शास्त्रोक्त रीति से सन्तान की उत्पत्ति का हेतु *कामदेव * भी मैं ही हूँ ; सर्पो में सर्पराज वासुकी ; नागों में शेषनाग ; जलचरों में जलाधिपति वरुण देवता ; पितरो में अर्यमा नामक पितरेश्वर ; शाशन करने वालो में यमराज मैं ही हूँ ; मैं दैत्यों में प्रह्लाद ; और काल मे समय हूँ ;
मैं पशुओं में सिंह ; पक्षीयों में गरुड़ ; पवित्र करने वालो में वायु देव ; शस्त्रधारियों में श्री राम ; मछलियों में मगरमच्छ ; नदियों में भागीरथी गंगा मुझे ही जान ।
🚫 है अर्जुन ! सभी श्रष्टीयो का #आदि , #अंत और #मध्य भी मैं ही हूँ --विद्याओ में #आत्मविद्या अर्थात ब्रम्हविद्या ; विवादों में #तत्व #निर्णय के लिए हुआ विवाद मेरा ही रूप है ; मैं अक्षरो में अकार ;
समासों में द्वंद ; काल का भी महाकाल ; सबका धारण पोषण करने वाला मैं ही हूँ ; मैं सबका नाश करनेवाला मृत्यु ; और भविष्य में पैदा होने वालो का एकमात्र कारण भी मैं ही हूँ ; स्त्रियों में कीर्ति ,श्री , वाक ,स्मृति ,मेधा , घ्रती ,और छमा हूँ ; मैं गायन करने वाली श्रुतियों में ब्रह्मास ; छंदो में गायत्री छन्द #महीनों में मार्गशीष अगहन महीना --ऋतुओं में बसंत ऋतु हूँ --
🍎 हे अर्जुन !! सब भूतो की #उत्पत्ति का #कारण मैं ही हूँ ; कोई ऐसा चर अचर भूत नही है ,जो मेरे से रहित हो । है परंतप !! मेरी दिव्य विभूतियो का अंत नही है ,यह तो मैंने सँक्षिप्त में कहा है -
🍊 जो जो भी #विभूतियुक्, #ऐश्र्वर्य युक्त , #कान्तियुक्त ,और #शक्तियुक्त वस्तु है , उसको तू मेरे तेज के अंश से उत्पन्न हुआ जान -
🍓🌰 सँक्षिप्त में मैं इस सम्पूर्ण जगत को अपनी #योगमाया के एक 🎈अंश मात्र🍍 से धारण करके स्थित हूँ ********
***** शेष अगली पोस्ट में *** राम नाथ गुप्त कन्नौज***

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