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पोस्ट -( 467 )- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा ( ६७ ) -- श्री मद भगवत गीता , के प्रारम्भ की स्थिति-
🚫 श्री मद् भगवत गीता उपदेश द्वारा ही महाभारत युद्ध का प्राम्भ होता है - भीष्म पर्व - में युद्ध के नियमो के निर्धारण के बाद ; जब दोनों ओर से युद्ध की तैयारी पूरी हो गयी और दोनो तरफ की , हाथी ,रथ घोड़ों से भरी हुई सेनाएं कुरूक्षेत्र में युद्ध के लिए एक दूसरे के सामने खड़ी हो गई ; उस समय श्री कृष्ण ने अर्जुन को उसके हित की बात बताते हुए कहा ( महाभारत भीष्म पर्व 23/2 )-
🍎🚫 *महाबाहो ,तुम युद्ध के सम्मुख खड़े हो , पवित्र होकर शत्रुओं को पराजित करने के लिए - #दुर्गा #देवी * की #स्तुति करो -* अर्जुन ने महाशक्ति महादुर्गा का सप्रेम स्तवन किया
** माँ दुर्गा जी ने प्रत्यक्ष दर्शन देकर अर्जुन को विजयी होने का वरदान दिया -
युद्ध की तैयारी पूरी होते ही ,भगवान श्री वेदव्यास जी ने कौरवों के पिता जन्मांध राजा ध्रतराष्ट्र के पास आकर कहा -
🚫 " ध्रतराष्ट्र यदि तुम घोर संग्राम को देखना चाहते हो ,तो मैं तुम्हे दिव्य नेत्र प्रदान कर सकता हूँ *-
इसपर ध्रतराष्ट्र ने उन्हें उत्तर दिया -
" है ब्रम्हर्षि श्रेष्ठ ,मैं अपने कुल के इस हत्याकाण्ड को अपनी आंखों से देखना तो नही चाहता , परंतु युद्ध का सारा व्रतांत भली भांति सुंनना चाहता हूँ " तब महर्षि वेदव्यास ने संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान करते हुए कहा --
ये संजय तुम्हे महायुद्ध का सारा व्रतांत सुनाएंगे -युद्ध की प्रत्येक घटनाओ को संजय प्रत्यक्ष देख सकेंगे । सामने या पीछे से ,दिन में या रात में ,गुप्त या प्रगट ,क्रिया रूप में परिणित या केवल मन मे लायी हुई ,ऐसी कोई भी बात नही होगी जो इनसे छिपी रह सकेगी ,यह सभी बातों को ज्यो की त्यों जान लेंगे -- इन सँजय के शरीर से न तो कोई शस्त्र छू पायेगा और न ही इन्हें जरा सी भी थकावट होगी "" -
" यह सब कुछ होनी है अवश्य होगी और इस सर्वनाश को अब कोई भी रोक नही सकेगा "
🎈 महर्षि वेदव्यास जी के चले जाने के बाद ध्रतराष्ट्र के पूंछने पर संजय उन्हें #प्रथ्वी के विभिन्न #द्वीपो का #व्रतांत सुनाते रहे ; उसी में उन्होंने #भारतवर्ष का भी विस्तृत वर्णन किया -
#कुरुक्षेत्र का स्थान --महाभारत वन पर्व के 83 वें अध्याय और शल्य पर्व के 53 वें अध्याय में कुरुक्षेत्र का स्थान ,
सरस्वती नदी के दक्षिणी भाग और दृषद्वती नदी के उत्तर भाग के मध्य में बताया गया है ; यह स्थान वर्तमान अम्बाला के दक्षिण और दिल्ली के उत्तर की ओर स्थित है -शास्त्रो के अनुसार ,
🍘 यहाँ अग्नि ,इंद्र ,ब्रम्हा ,आदि देवताओ ने तप किया था - कौरव वंश के राजा कुरु ने भी यहां बड़ी तपस्या की थी ; माना जाता है यहां #मरने वालों को #उत्तमगति की प्राप्ति होती है । इसी कारण इसे #धर्मक्षेत्र या पुण्य क्षेत्र भी कहा गया है और इसी लिये इसका युद्ध भूमि के लिए #चयन हुआ था
🚫🎃 जब संजय ने युद्ध मे 10 दिन पूर्व घटित व्रतांत को भी ज्यों का त्यों सुनाया -
( भीष्म पर्व अध्याय 13 )- बाद में जब कौरवों पांडवो का महायुद्ध प्रारम्भ हो गया और लगातार 10 दिनों तक हुए युद्ध के बाद , पितामह #भीष्म रण भूमि में #रथ से #गिरा दिए गए ,तब संजय ने ध्रतराष्ट्र के पास जाकर ,उन्हें --
🍎🍊 अकस्मात भीष्म पितामह के पतन का समाचार सुनाया - उसे सुनकर ध्रतराष्ट्र को असीम दुख हुआ , और युद्ध की सारी बातें विस्तारपूर्वक सुनाने के लिए उन्होंने संजय से कहा - तब संजय ने दोनों ओर की सेनाओं के व्यूह रचना का विस्तार से वर्णन किया । ध्रतराष्ट्र ने अब तक घटित सभी बातों को सुनने की बात कही तब संजय ने युद्ध के प्रारम्भ से हुई सभी बातों को बताना शुरू किया
महाभारत भीष्म पर्व में ---25 वे अध्याय से श्री मद भगवत गीता का प्रारंभ होता है --
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***** व्याख्या - ********** अपनी बात ********
1- आधुनिक वैज्ञानिक शब्दो मे --संजय द्वारा ध्रतराष्ट्र से पहले पूरी पृथ्वी का वर्णन करना और फिर अचानक श्री भीष्म जी के गिरने का समाचार देना --- इससे यह समझ मे आता है कि संजय की #दिव्यदृष्टि का #कैमरा - #अंतरिक्ष मे किसी #सेटलाइट से संबंधित था जिसके कारण सारी पृथ्वी फिर भारत और धीरे धीरे बाद में , उसकी दिव्य दृष्टि , युद्ध के मैदान पर #केंद्रित हुई--
🎈तब उसने श्री भीष्म पितामह को बाण शैया पर गिरते देखा और ध्रतराष्ट्र को बताया था यानी उस समय युद्ध प्रारम्भ हुए 10 दिन हो चुके थे । फिर अपने ध्यान के कैमरे को पूर्णतया युद्ध पर लगाकर , विस्तृत वर्णन सुनाया ।
🎈 2- एक सदी पहले तक यह सब कुछ कल्पना सरीखा जिसे माइथोलोजी कहते है , लगता था ,अरन्तु सेटलाइट और TV के आविष्कार के बाद उस समय की मन्त्र और सिद्धियों से प्राप्त शक्तिओ का पता चलता है
🎈3--आधुनिक कलयुग में भी TV आदि यंत्रो से केवल प्रसारित #वर्तमान या रिकॉर्डेड भूत काल की घटनाओं को ही सजीव देखा जा सकता है --संजय ने #पूर्वघटित सब #घटनाओ को जिसमे सम्पूर्ण गीता उपदेश भी शामिल है , को सामने जैसा देखते हुए बताया था । और सभी के मन की बातों को भी जान कर उन्हें ध्रतराष्ट्र को बतायाया था ।
प्रश्न जिस पर विचार कीजिये ? ? ? ? ?
तो क्या जो कुछ भी बोला जाता है या घटित होता है --प्रकृति द्वारा सब कुछ रिकार्ड हो जाता है जिसे कभी भी देखा जा सके ? --अगर कभी वर्तमान विज्ञान ने इस विधा की खोजकर ली- तब मुकदमे गवाही व कोर्ट कचहरी की जरूरत ही नही होगी--****🍎🍊🍘
अगली पोस्ट में---- श्री मद भगवत गीता - प्रथम अध्याय --दोनो सेनाओं के प्रधान वीरो का वर्णन - स्वजन - वध के पाप से भयभीत अर्जुन का विषाद - गीता प्रारम्भ
* क्रमशः *************** राम नाथ गुप्त कन्नौज ******
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