महाभारत कथा - 453


 पोस्ट - ( 453 )- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा ( ५३ ) दुर्योधन , कर्ण आदि का विराटनगर पर आक्रमण -- अर्जुन का युद्ध फिर arjun अर्जुन सभी को परास्त कर  अंग वस्त्रों को उतार कर ले गए 

     🍎 त्रिगतराज सुशर्मा से युद्ध करने जब राजा विराट अपनी संपूर्ण सेना , युधिष्ठिर ,,भीमसेन नकुल और सहदेव के साथ गए हुए थे ,उसी समय योजनाबद्ध तरीके से दुर्योधन ने कर्ण ,भीष्म पितामह , द्रोणाचार्य आदि के साथ पूरी ताकत से विराटनगर पर दूसरी ओर से घेरा डालकर हजारों गायों का हरण करके युद्ध का बिगुल बजा दिया ।

    सेना सहित राजा विराट के दूर दूसरी दिशा में सीमा पर सुशर्मा के साथ युद्धरत होने के कारण , नगर में घबडा़हट फैल गयी । उस समय नगर में मौजूद राजकुमार उत्तर पर ही सारी जिम्मेदारी आ पड़ी । अपनी वीरता की डींगें हांकते हुए वह बड़े शान से युद्ध करने के लिए चला । तब बृहन्नला के रूप में राजकुमारी उत्तरा को संगीत सिखाने वाले अर्जुन को बहुत चिंता हुयी । अर्जुन जानते थे कि कौरवों का सामना करना उत्तर के लिए असंभव है । तब अर्जुन की प्रेरणा पर , राजकुमारी उत्तरा ने अपने भाई से बृहन्नला को अपने रथ के सारथी बनाने की प्रार्थना की । फिर बृहन्नला के रूप में अर्जुन , राजकुमार उत्तर के सारथी बनकर युद्ध मैदान की ओर उसके रथ को लेकर चले । राजकुमारी उत्तरा ने बृहन्नला ( अर्जुन ) से अपनी गुड़ियों के लिए प्रमुख कौरवों के वस्त्रों को उतार कर लाने का अनुरोध किया 

      🌋 दूर से ही कौरवों की सेना में भीष्म पितामह , कर्ण जैसे अति रथियों के बारे में पता चलते ही , अपनी डींगें हांकने वाला राजकुमार उत्तर #घबड़ा गया और रथ से उतर कर वापस #भागने लगा । तब अर्जुन ने उसे जबरन पकड़ा और अपना परिचय दिया । फिर उसे आश्वत करके रथ लेकर उस शमी पेड़ के पास गए जिस पर अज्ञातवास शुरू करते समय पान्डवों ने अपने अस्त्र कपड़े में बांधकर रक्खे थे । उत्तर से पेड़ पर से वे अपने दिव्य अस्त्र गांडीव धनुष , अक्षय तरकस आदि उतरवाकर उन्हें अर्जुन ने धारण किये । फिर अर्जुन का दिव्य रथ स्मरण करते ही उपस्थित हो गया ।

       तब राजकुमार उत्तर को सारथी बनाकर अर्जुन युद्ध मैदान की ओर चले । अर्जुन के ,दिव्य रथ की गड़गड़ाहट और देवदत्त शंख की गूंज ने उनकी उपस्थिति सबको बता दी । अर्जुन का दुर्योधन और कर्ण से भीषण संग्राम हुआ । फिर अर्जुन ने सम्मोहन अस्त्र का प्रयोग किया जिससे भीष्म पितामह ,दुर्योधन दुःशाशन ,और कर्ण सहित सारी सेना बेहोश हो गयी । 

     🎈तब अर्जुन ने राजकुमार उत्तर को भेजा जिसने वरिष्ठों भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य के अंग वस्त्र तथा दुर्योधन कर्ण आदि के सभी वस्त्रों को उतार लिया ।

      फिर अपनी जीत और वस्त्रहीन कौरवों की हार का उद्घोष करते हुए अर्जुन वापस लौटे । वापसी में उसी प्रकार अपने अस्त्रों को वही पेड़ पर रक्खा , दिव्य रथ की जगह वही साधारण रथ पर सवार हुए और राजकुमार उत्तर से अभी किसी को कुछ भी नही बताने का वायदा लेकर , फिर उसे रथी बनाकर खुद सारथी बनकर , 🎈 राजकुमार उत्तर की कौरवों पर विजय 🎈 की बात जग जाहिर करते हुए वापस विराटनगर में आये ।

        🍘 राजकुमार उत्तर की महारथी कौरवों पर विजय की आश्चर्यजनक घटना से सारे नगर में आनन्द फैल गया । बृहन्नला ( अर्जुन ) ने कौरवों के अंग वस्त्र , अपनी शिष्या राजकुमारी उत्तरा को , उसके गुड़ियों के वस्त्र बनाने के लिए वायदे के अनुसार दे दिए ।

        🌰 इधर सुशर्मा पर विजय पाकर राजा विराट भी वापस आ गए । अपने पुत्र उत्तर की अप्रत्याशित अविश्वसनीय विजय का समाचार पाकर वे बहुत ही आनन्दित हुए । इस दोहरी जीत पर सारे विराटनगर में बहुत बड़ा उत्सव मनाया गया । 

       🍊🍎 अपने वस्त्रों को गंवाकर , अपमानित होकर दुर्योधन ,कर्ण आदि वापस हस्तिनापुर लौटे । दुर्योधन बहुत बड़े भृम में था कि उसने पान्डवों का अज्ञातवास भंग कर दिया है और इस लिए वह बहुत ही प्रसन्न था ; परंतु भीष्म पितामह ने सभी को बताया कि , जब अर्जुन से युद्ध हुआ उसके पहले ही अज्ञातवास की अवधि समाप्त हो चुकी थी ।

  **************** अपनी बात **************

        🍎 विचार करने की बात यहां भी है ; जब अर्जुन ने दुर्योधन ,कर्ण आदि के वस्त्रों को उतार लिया तब वे उन्हें आसानी से मार भी सकते थे ; या इन विराटनगर पर आक्रमण करने वाले अपराधियों को कैद करके ला भी सकते थे ; अगर ऐसा होता तब महायुद्ध और महाविनाश से बचा जा सकता था --- ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि शायद इसके लिए युधिष्ठिर कभी आज्ञा कभी नही देते । 

टिप्पणियाँ