जयद्रथ द्वारा द्रोपदी हरण करने का प्रयास


 पोस्ट ( 447 )-- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा ( ४७ ) पान्डवों को श्राप देने आए दुर्वासा जी की कथा - एक दाना चावल से सारा संसार तृप्त हो गया - जयद्रथ द्वारा द्रोपदी हरण करने का प्रयास ---
  आज्ञायो प्रतिज्ञाओं के आधार पर समीक्षा-- पांडवो के वनवास के समय की प्रमुख घटनाएं सँक्षिप्त में --
    🚫 दुर्योधन की पांडवो को दुर्वासा के श्राप से नष्ट करवाने की #दुरभिसंधि 
       🍎 एक बार महाक्रोधी दुर्वासा मुनि अपने 10,000 शिष्यों के साथ हस्तिनापुर आये -दुर्योधन और उसके भाइयो ने महर्षि दुर्वासा की बहुत सेवा की । तब उसकी सेवा से प्रसन्न होकर दुर्वासा ने दुर्योधन से वरदान मांगने को कहा । #कपट से भरे हुए मन वाले #दुर्योधन ने दुर्वासा से प्रार्थना करते हुए निवेदन किया कि वे इसी प्रकार सभी शिष्यों सहित वन में निवास कर रहे उंन सबके बड़े भाई युधिष्ठिर का भी सत्कार तब ग्रहण करे जब #द्रोपदी भोजन कर चुकी हो -वह जानता था कि द्रोपदी के भोजन करने के बाद अक्षय बटलोई से कुछ भी नही निकलेगा और भूखे दुर्वासा उन सब को श्राप देकर नष्ट कर देंगे --
        🚫 दुर्योधन को दिए वचन के अनुसार एक दिन दुर्वासा अपने सभी 10,000 शिष्यों सहित वन में युघिष्ठिर की कुटी पर पंहुचे और भोजन करने की बात कहते हुए नदी में स्नान करने चले गए । उस समय द्रोपदी भोजन कर चुकी थी भगवान सूर्य द्वारा प्रदत्त अक्षय बटलोई साफ की जा चुकी थी । सभी पांडव दुर्वासा के भावी श्राप से भयभीत हो गए तब एकमात्र और #अंतिम #सहारा भगवान श्री #कृष्ण की सभी ने कातर स्वर में स्तुति की । भगवान कही दूर तो होते ही नही है । श्री कृष्ण तुरन्त प्रगट हो गए और अत्यंत भूखे बन कर कुछ भोजन करने को मांगने लगे । श्री कृष्ण भोजन बटलोई में तलाश करने लगे । उसमे चावल का एक दाना उन्हें मिल गया । केवल उस एक चावल के दाने को खाकर श्री #कृष्ण ने #डकार ली ।
       🌏 संसार के सभी प्राणियों में मौजूद , श्री हरि की शक्ति ही तो सभी का पेट भरती है , अन्न को पचाती है ---और जैसे ही श्री कृष्ण ने तृप्त होकर डकार ली --सच मे सारे #संसार के #प्राणी #तृप्त हो गए --
       🚫 स्नान करते हुए शिष्यों सहित दुर्वासा मुनि का पेट गले तक भर गया वे भी #डकारें लेने लगे -तब महर्षि दुर्वासा को होश आया कि उन्होंने दुर्योधन के कहने पर दुर्भावना से श्री कृष्ण द्वारा रक्षित पांडवो को नष्ट करने की योजना बनाकर #भयंकर #भूल की थी --फिर राजा अम्बरीष की घटना , याद आते ही #भयभीत दुर्वासा शिष्यों सहित अन्यत्र चले गए 
        प्रभु का भक्तो को वचन है -**
     ** करौं सदा तिनकै रखवारी , जिमि बालकई राखि महतारी **
        🎈और पूर्णतया समर्पित शरण मे आये हुए भक्तो की रक्षा प्रभु सभी ( दुर + वासा ) बुरी भावना से हानि पंहुचाने वालो से -- करते है और भक्तों की उनकी माता - के समान रक्षा करते है 
         जयद्रथ द्वारा #द्रोपदी के #हरण करने का प्रयत्न --
       🍎 दुर्योधन की सम्मति से उसके बहनोई जयद्रथ ने पांडवो को अपमानित करने के लिए शाही विलासिता के सामानों के साथ पांडवो के शिविर के पास डेरा डाला और एक दिन नदी पर पानी भरने जाती हुयी द्रोपदी पर कटाक्ष करते हुए उसका #अपहरण करने का प्रयत्न किया । समाचार मिलते ही भीमसेन और अर्जुन ने जाकर द्रोपदी को छुड़ा करके जयद्रथ को पकड़ कर युधिष्ठिर के सामने ले जाकर उसे मृत्युदंड देने की मांग की --- परंतु #वाह रे #क्षमाशील #धर्मराज -- युधिष्ठिर ने दुर्योधन के बहनोई को अपना भी बहनाई मानते हुए उसे छुड़वा दिया ।
          🚫 इसी महारथी जयद्रथ ने महाभारत युद्ध मे चक्रव्यूह में भीम आदि के जाने का रास्ता रोका था और सभी महारथी योद्धाओं के साथ मिलकर अन्यायपूर्वक अभिमन्यु का वध किया था । इसी के सांयकाल तक वध करने की अर्जुन ने प्रतिज्ञा की थी जो श्री कृष्ण की माया से ही पूर्ण हो सकी थी ।
     🚫🌏 क्या दुश्मन के बहनोई और प्रबल विरोधी , जिसने द्रोपदी को हरण करने की कोशिश की , उस जयद्रथ को रिश्तेदार मानकर उसे छोड़ना उचित था ??-क्षमा और अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है परंतु इसकी भी एक सीमा है --
****************** अपनी बात ***************
    आज के समय मे भी यही गलतियां होती रही है परिणाम दुखदायी ही हुआ है *******
        *🚫****** देश का दुर्भाग्य है कि पहले भी हिंदू राजा लोग और आधुनिक समय मे भी हमारे शाशक अहिंसा व क्षमा करने की व दुश्मन को जीवन दान देने की गलत नीतियों का पालन करते आये है - जिसका खामियाजा सारा देश भुगतता आया है********** -
  ***( शेष अगली पोस्ट में )*** राम नाथ गुप्त कन्नौज -

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