पोस्ट -( 445 )- अथ श्री महाभारत कथा भाग - समीक्षा -( ४५ ) - श्री हनुमान जी ने भीमसेन के गर्व का नाश किया - तथा प्रतिज्ञाओ आज्ञाओ ,वचनों आदि की समीक्षा
-🍎 प्रभास छेत्र में भगवान कृष्ण आदि यादवो से भेंट करने के बाद पांडव, सारे देश के तीर्थो की यात्रा करते हुए करीब 5 वर्ष बीतने के करीब , अर्जुन से मिलने की उत्सुकता में हरिद्वार से चलकर #गन्धमादन पर्वत की ओर चले ,अत्यंत कठिन चढ़ाई में द्रोपदी जब थकने लगी तब लोमश मुनि के सुझाव पर भीमसेन ने अपने राक्षस पुत्र #घटोत्कच का स्मरण किया जो तुरन्त अपने साथियो सहित प्रकट हो गया । घटोत्कच ने अपने #कंधों पर माँ #द्रोपदी को तथा अन्य राक्षसो ने साथी पांडवो ,ऋषि मुनियों आदि को बैठा लिया और मिनटो में नर नारायण के तपस्यास्थल *#बद्रिकाश्रम *पंहुच गए -पांडवो ने वहां रहने वाले अनेको सिद्ध तपस्वियों के दर्शन किये -
🎈 श्री हनूमान जी द्वारा भीमसेन के सर्वाधिक बलशाली होने अहंकार का नाश -
🍊 उस समय नर नारायण का तपस्या थल निर्जन स्थान नही था - वहां एक दिन देवयोग से ईशानकोण की ओर से वायु के साथ उड़ता हुआ एक दिव्य और अनुपम मनमोहक गंध वाला - #सहस्त्रदल #कमल-द्रोपदी के पास आकर गिरा -द्रोपदी ने उस *#सौगंधिक * नाम वाले अनुपम कमल को उठाकर अत्यंत प्रसन्न होकर कहा कि वह इसे युधष्ठिर को भेंट करेगी -और उसने भीमसेन से ऐसे ही #बहुत से #पुष्पो की मांग की -
🚫 महाबली भीमसेन द्रोपदी की मांग को पूरा करने के लिए ,कुपित सिंह के समान गर्जना करते हुए बहुत तेजी से जिधर से वह फूल आया था उधर चले और वे गन्धमादन पर्वत पर एक विशाल केले के बगीचे से होकर निकले --उस समय उस बाग में रहने वाले श्री #हनूमान जी को , इस स्वर्ग जाने वाले रास्ते से अपने छोटे भाई भीम का जाना उसके स्वाभिमान की दृष्टि से उचित नही लगा इसलिए वे #वृद्ध रूप रखकर रास्ते मे लेट गए -और भयंकर गर्जना करते हुए अपनी #पूंछ को #फटकारने लगे -
🌏 इस गर्जना से चकित भीमसेन ने जब रास्ते मे लेटे एक वृद्ध वानर को देखा तब भीम ने वहां भयंकर गर्जना करते हुए वानर रूपी श्री हनूमान जी को रास्ते से हटने का आदेश दिया ,हनुमान जी ने वृद्धावस्था के कारण उठने में असमर्थता बताते हुए ,भीम से उनकी पूंछ हटाकर निकल जाने को कहा - भीमसेन #लाख #कोशिशें करने के बाद भी #पूंछ #नही हटा पाए --श्री भीमसेन का बल का अभिमान चूर चूर हो गया ---
🚫 तब भीम ने श्री हनूमान जी को पहचानकर उनकी स्तुति की व उनका समूद्र लांघते समय का विशाल रूप देखना चाहा -
राम काज लगि तव अवतारा । सुनतहि भयउ पर्वताकारा ॥
कनक बदन तनु तेज बिराजा । मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा ॥
सिंह नाद करि बारन्हि बारा । लीलहु नाघहुँ जल निधि खारा ॥
🌋🎈और फिर श्री हनुमान जी ने अपने छोटे भाई भीम के अनुरोध पर भीम को #दिव्य #दृष्टि देकर उन्हें अपने उस विशाल रूप के दर्शन कराए -- फिर श्री हनूमान जी भीम से बोले ~" बताएं मैं अब क्या करूं ?" ---
🚫 सहित सहाय #कौरवहु #मारऊँ **या उन्हें #बाँधि अभी लै #आवहूँ **
** तुम्हारी इच्छा हो तो मैं अभी दुर्योधन सहित सभी कौरवों को मार डालूं या उन्हें बांधकर अभी तुम्हारे सामने ले आऊं ** -भीम ने #युधीष्ठिर की #अनुमति #न #होने के कारण हनूमान जी से केवल #युद्ध के समय #सहायता मांगी ।
🚫 श्री हनूमान जी ने भीम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि युद्ध मे जब भीम गर्जना करेंगे तो वे उनकी ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे तथा वे अर्जुन के रथ पर बैठकर उनकी रक्षा करेंगे और उन्हें विजय दिलवाएंगे -
फिर श्री हनूमान जी की अनुमति से भीम उस दिव्य कमल पुष्पो को लाने के लिए कुबेर के बाग की ओर गए --
******************** अपनी बात ************
🚫🚫 युधिष्ठिर की आज्ञा न होने के कारण भीमसेन , विराट रूप में प्रकट हुए श्री हनुमान जी की सहायता न ले सके -- काश यदि हनूमान जी दुर्योधन ,दुःशाशन कर्ण आदि को बांधकर लाने का कार्य कर पाए होते ,तो यह #महायुद्ध ही #नही #होता और #करोङो #मनुष्यों का #जीवन #बचता ,महाविनाश नही होता ।
(-शेष अगली पोस्ट में ) *** राम नाथ गुप्त कन्नौज **

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