पोस्ट -( 442 )-- अथ श्री महाभारत कथा- समीक्षा ( ४२ ) अर्जुन को सभी देवताओ ने अपने अपने दिव्य अस्त्रों को प्रदान किया - अर्जुन स्वर्ग में पँहुचे --
🍎 प्रतिज्ञाये ,आज्ञाएं तथा वे घटनाएं जो महायुद्ध का कारण बनी -🍎
अर्जुन की विकट तपस्या ,भक्ति और अद्भुत वीरता से प्रसन्न होकर भोलेनाथ शिवशंकर ने अर्जुन को #पाशुपतास्त्र प्रदान किया -जब पाशुपतास्त्र मूर्तिमान काल के समान अर्जुन के पास आया और उन्होंने उसे ग्रहण किया तब पर्वत ,वन समूद्र ,नगर ,गांव सहित सारी पृथ्वी डगमगाने लगी -
***-शायद ऐसे ही जैसे अभी पिछले दिनों उत्तर कोरिया द्वारा न्यूकिलियर मिसाइल के परीक्षण पर उस इलाके में भूकम्प आया था -***
🌏 शिव जी के अंतर्ध्यान होते ही वहां वैदूर्यमणि के समान कांतिवान जलचरों से घिरे जलाधीश *#वरुण*--स्वर्ण के समान दमकते शरीर वाले धनाधीश** #कुबेर **--सूर्य के पुत्र यमराज ,बहुत से गंधर्व तथा इंद्राणी और देवताओ के साथ देवराज #इंद्र --अर्जुन के सम्मुख प्रकट हो गए -
देवताओ से प्राप्त दिव्य दृष्टि से अर्जुन ने सभी देवताओं के #प्रत्यक्ष #दर्शन किये
🚫**** सच है अग्नि ,वरुण , वायु आदि सभी देवता हर समय हमारे जीवन को संचालित करने के लिए हमेशा हमारे साथ रहते है ,हमे अपनी उपस्थिति महसूस कराते रहते है --परंतु उनके प्रत्यक्ष दर्शन बिना दिव्य दृष्टि के नही हो सकते **
🍎 यमराज ने अपना * #कालदण्ड *-, वरुण ने *#वारुणपाश * जिससे किसी को भी कैद किया जा सकता है ---धनराज कुबेर ने #अंतर्ध्यान होने की शक्ति वाला अनुपम वस्त्र अर्जुन को प्रदान किया ---देवराज इंद्र ने अर्जुन से अब स्वर्ग चलने और वहां सभी दिव्यास्त्र देने का वायदा किया
🚫#### इंद्र का दिव्य रथ --आधुनिक शब्दो मे अंतरिक्ष मे चलने वाला मिसाइल आदि अत्यंत विनाशक शक्तियों से लैस लड़ाकू विमान रहा होगा --###
🌏🍎 कुछ ही देर में इंद्र का सारथी मातलि दिव्य रथ को लेकर उपस्थित हुआ -उसकी उज्ज्वल कांति से अंधेरा मिट गया -भीषण ध्वनि से दिशाएं प्रतिध्वनित हो रही थी -उसमे दिव्य तलवारे , तेजस्वी भाले ,वज्र ,पहियों वाली तोपें , वायु वेग से गोलियां चलाने वाले यंत्र , और दस हजार वायुगामी घोड़े उसमे जुते हुए थे ( आधुनिक शब्दो मे उसकी गमन करने की शक्ति 10000 दिव्य हॉर्स पावर थी )--
गंगा स्नान , पवित्रता के साथ विधिपूर्वक मन्त्र का जाप और पितरो का तर्पण करके ,मन्दराचल पर्वत से अनुमति मांग करके अर्जुन दिव्य रथ में बैठ गए
🌋 क्षण भर में वह रथ मन्दराचल से उठकर , जहां पहुँचा वहां सूर्य ,चन्द्रमा ,अग्नि का प्रकाश नही था -हजारो विमान वहां प्रकाशित हो रहे थे -मातलि ने अर्जुन को बताया कि जिन्हें हम तारे समझते है वे पुण्यात्मा पुरुषों ,ऋषियो के निवासस्थान ( लोक) है -अनुपम और अलौकिक दृश्यों को देखते हुए वे स्वर्ग पंहुचे -
🚫 अमरावती में देवताओ के हजारो दिव्य विमान खड़े थे और आ जा रहे थे -वहां देवता ,अप्सरा ,सिद्ध और गंधर्व अर्जुन की पूजा व स्वागत में लग गए -फिर देवराज इंद्र ने अपने (पुत्र ) अर्जुन को अपने #राज #सिंहासन पर बिठाया --इंद्र के राजमहल में अर्जुन सभी दिव्य अस्त्रों और शत्रुघाती महान अस्त्र ** वज्र ** का भी प्रयोग ,उपसंहार सीखने तथा चलाने का अभ्यास करने लगे -
-*********** क्रमश: *********राम नाथ गुप्त *****

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