महाभारत कथा -441


 पोस्ट --( 441 )- अथ श्री महाभारत कथा - समीक्षा ( ४१ ) किरात रूप में आये महादेव से अर्जुन का भीषण युद्ध - अर्जुन को शिव जी से भयँकर अस्त्र - पासुपतास्त्र की प्राप्ति --

   🍎 वे आज्ञाएं ,प्रतिज्ञाएं और वे घटनाएं जो महाविनाशकारी महायुद्ध का कारण बनी-🍎

      कौरवों से भावी युद्ध से भयभीत युधिष्ठिर के कहने पर अर्जुन ने व्यास जी द्वारा प्रदत्त प्रतिस्मृति विद्या को सिद्ध किया था । इस विद्या के बारे में अन्य कोई विवरण महाभारत में नही मिलता । द्वापर युग तक मन्त्रो का युग था । कलयुग में मन्त्रो की साधना सम्भव नही है । कलयुग यंत्रो पर आधारित है । आज के समय मे शब्दो के अर्थ के आधार पर प्रति स्मृति का अर्थ सम्भवतया -पुरानी स्मृतियों जैसे दुश्मन के अत्याचार , उसके धोखा पूर्ण व्यवहार, अपने पुराने वैभवपूर्ण इतिहास की पुनस्मृति करते हुए -दुश्मन की चालो से सावधानी और अपनी सभी शक्तियों का संयोजन करके ,अस्त्रों का एकत्रीकरण करना जिससे साहस का संचार हो - प्रतिस्मृति को हम

 इसी अर्थ में ले सकते है 

          🎈 दिव्यास्त्र प्राप्त करने के उद्देश्य से महारथी , दृढ़ निश्चयी अर्जुन हिमालय पार करके एक

 बड़े कंटीले जंगल मे पहुंचे और वहां भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विकट तपस्या आरम्भ की । भगवान शिव शंकर , अर्जुन की तपस्या से प्रसन्न होकर , सोने से चमकते हुये #किरात ( भील ) -के रूप में अपने गणों सहित प्रकट हुए -उसी समय दुर्योधन का अर्जुन को मारने कर लिए भेजा हुआ *मूक दानव* एक जंगली शूकर का भेष धारण करके वहां आया और उसने तपस्यारत अर्जुन पर हमला करना चाहा । भील के रूप में शंकर जी ने उस शूकर दानव पर बाण चलाया उसी समय अर्जुन ने भी उस शूकर पर गांडीव धनुष के बाण से प्रहार किया । भयंकर गर्जना करते हुए अपने असली रूप में प्रकट होकर मूक दानव मर गया ।


       शिव जी द्वारा #परीक्षा और अर्जुन का #अहंकार -

       🚫 अपनी शक्ति के अहंकार में अर्जुन ने शूकर को अपने द्वारा मारा जाना बताते हुए भील रूप में आये शिव जी से शूकर पर बाण चलाने के लिए अपमानजनक बाते की ; और क्रोधातुर होकर भील रूपधारी शिव जी पर #बाणो की वर्षा कर दी । बाण जैसे ही भील के के पास पंहुचते थे , वे #पकड़ लेते । बाणो के समाप्त होने पर अर्जुन ने तलवार पत्थर आदि का असफल प्रहार किया और फिर मल्ल युद्ध मे शिव जी ने अर्जुन को अपनी भुजाओ में बांधकर लुहलुहान कर दिया । अर्जुन को जब होश आया तब भयभीत होकर उसने मिट्टी की बेदी बनाकर उसपर शिवलिंग को स्थापित करके उस पर फूल चढ़ाए ।

    🚫 अर्जुन ने आश्चर्य से देखा कि शिव लिंग पर चढ़े फूल अपने आप भील के सर पर पंहुच जाते थे --अर्जुन ने शिव जी को पहचान करके उनकी शरणागत होकर अपनी गलतियों की माफी मांगी ।

     🍎 शिव जी तुरन्त पार्वती जी सहित प्रगट हो गए और अर्जुन को परीक्षा में सफल बताते हुए ,अर्जुन को दिव्य ज्ञान दिया तथा प्रलय के समान नाश करने वाला अपना ब्रम्हशिर अस्त्र **पाशुपतास्त्र ** प्रदान किया ; जो संकल्प ,वाणी ,धनुष ,अथवा दृष्टि से किसी भी प्रकार से शत्रु पर प्रयोग करने पर सर्वनाश कर सकता था । श्री शंकर जी ने इस अस्त्र का बहुत ही सोच समझ कर प्रयोग करने की चेतावनी देते हुए कहा कि अल्पशक्ति मनुष्य के ऊपर इसका प्रयोग न करना वरना यह सारे संसार का नाश कर देगा ।।फिर शिव जी ने अर्जुन को देवरेज  

इंद्र से दिव्यास्त्रों पाने के लिए , स्वर्ग जाने की आज्ञा दी -


   🚫 🍎 ध्यान दीजिए -- जब भी शिव जी या श्री कृष्ण जी या इन्द्रादि देवता आदि भक्त की परीक्षा लेने आते है तब भील या चांडाल जैसे भेष में आते है जिससे भक्त विचलित होकर ज्यादातर भक्त परीक्षा में फेल हो जाते है -इसलिए किसी का भी निरादर नही करना चाहिए और सभी मे ईश्वर के दर्शन करने चाहिए ।


**🌏 🎀 तुलसी या संसार मे सबसे मिलिए धाय । न जाने किस भेष में नारायण मिल जाय ।।**


    🍎 शायद पाशुपतास्त्र आज के न्यूक्लियर हथियारों से भयंकर रहा होगा -इन अस्त्रों के मन्त्र आधारित होने के कारण इन का प्रसार लिमिटेड था जिसके कारण विश्व महाविनाश से बच जाता था परंतु आज के महाविनाशक अस्त्र पाकिस्तान तथा उत्तरी कोरिया आदि के हाथों में भी मौजूद है और कभी भी आतंकवादियो के पास पंहुच सकते है जिसके कारण वे किसी भी समय विश्व को नष्ट कर सकते है -

            शेष अगली पोस्ट में ------****** राम नाथ गुप्त **

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