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श्री कृष्ण की महिमा
पोस्ट -( 339 ) - " श्री कृष्ण वचनामृत "- 【 ८९ 】 श्री कृष्ण द्वारा कलि- धर्म का निरूपण ~ जब श्री कृष्ण ने आपस में विवाद करते हुए ब्राह्मणों से तीन माह बाद आने को कहा ~ परिपूणतं ब्रम्ह श्री कृष्ण की विजय गाथा
❤ सम्राट युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ की पूर्णाहुति के समय जब ब्राम्हणों का भोजन चल रहा था , तभी परस्पर विवाद करते हुए दो ब्राह्मण राजसभा में आये और युधिष्ठिर से अपने विवाद का समाधान करने की प्रार्थना की । उस समय वहां वशिष्ठ ,अत्रि आदि बहुत से ऋषि भी उपस्थित थे । राजा के आदेश पर एक ब्राह्मण बोला -
🍎 " महाराज ! इन दूसरे ब्राह्मण ने अपना खेत मुझे जीवन निर्वाह के लिए दिया था परन्तु मेरे खेत को जुतवाने पर उसमें खजाना निकल आया । शर्त के अनुसार इस खेत से पैदा होने वाले अनाज मात्र पर ही मेरा अधिकार है , मैं इस खजाने को कभी नहीं ले सकता । खजाना इस खेत के पूर्वस्वामी इनका होना चाहिए , इसलिए मैंने उसे त्याग दिया है परन्तु ये महाशय उस खजाने को स्वयम् तो लेते नहीं , मुझ पर ही उसे ग्रहण करने के लिए दबाव डाल रहे है "
~~ दूसरा ब्राह्मण बोला ~
🍎 " धर्मनन्दन ! मैंने इनको यह खेत इस संकल्प के साथ दिया था कि इसमें उत्पन्न वस्तु पर इनका अधिकार होगा , मेरा नहीं - इस लिए अब मैं उस खजाने को कैसे स्वीकार कर लूं "
इस विचित्र झगड़े को सुनकर श्री कृष्ण उन दोनों से बोले ~
🌰 "" ब्राह्मणों ! आप दोनों तीन महीने तक निश्चिंत होकर बैठे रहें ,उसके बाद यहां पधारियेगा । फिर आपके विवाद का तुरंत निबटारा हो जाएगा ।""
दोनों ब्राह्मण निश्चिंत होकर चले गए और नियत समय की प्रतीक्षा करने लगे । उनके जाने के बाद युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से तुरंत फैसला न करने का कारण पूछा । श्री कृष्ण बोले ~
( जैमिनिअश्वमेध - महाभारत - अध्याय 65 श्लोक 37 से 50 तक )
🍘"" नरेश्वर ! आज से तीसरे महीने में भयंकर कलयुग का प्रवेश होगा । उस समय कलि से पीड़ित दोनों ब्राह्मण इस खजाने के लिए विवाद करते हुए , एक दूसरे को मुक्कों से पीटते हुए ,और केशों को खींचकर ,तथा आँखों से बकोटकर ,परस्पर प्रहार करते हुए आपके पास आएंगे । तब आप उस धन को दो भागों में विभक्त करके दोनो को दे देना । ""
🎆 "" कलयुग आने पर ब्राह्मणों में सदाचार नहीं रह जायेगा , वे वेदहीन हो जाएंगे । राजाओं में धर्म भावना नहीं रह जायेगी । वे प्रजाओं को पीड़ा पहुँचाते रहेंगे । सारा संसार अधर्म का प्रेमी और धर्म से द्वेष और ईर्ष्या रखने वाला हो जाएगा । कलयुग में सभी लोग नित्य द्यूत और मदिरा से प्रेम करने वाले तथा व्यसन परायण होंगे । वे वेदकार्य , पितृ कार्य , पतिव्रता स्त्रियों के भरण पोषण ,और ब्राह्मण के लिए थोड़ा सा धन देने में दु:ख का अनुभव करेंगे । कलयुग में वे लोग अपनी माता को तो फटे पुराने वस्त्र पहनने को देंगे ,परन्तु वेश्याओं और व्यभिचारिणी स्त्रियों को उत्तम सुंदर रेशमी वस्त्र देंगे । ""
🎃 "" लोग धतूरे के फल तथा करवीर के वृक्ष से उत्पन्न कांटेदार पुष्पों को तो शिवालय में ले जा कर शिव पूजन करेंगे और उत्तम कमल पुष्पों की बनी माला , कपूर , चंदन ,तथा सुंदर कुमुद पुष्प , वेश्याओं और कुलटा स्त्रियों के यहां ले जाएंगे । कलयुग में लोग माता पिता का तो परित्याग कर देंगे और नौकर की तरह सदा स्त्री की सेवा में तत्पर रहेंगे । ""
🌍 "" जनेश्वर ! कलयुग आने पर बहुएं ,सास ससुर को ऐसे कटु वचन सुनाएंगी , जो हृदय में कांटे की तरह चुभेगा । कलयुग में चारों वर्णों के लोग कर्म भ्रष्ट हो जाएंगे । वे देवताओं और ब्राह्मणों के वचनों पर विश्वास नहीं करेंगे और अपने वर्णाश्रम धर्म का परित्याग करके , दूसरे का काम करने वाले होंगे ।
श्री कृष्ण की महिमा
******** क्रमशः ********** राम नाथ गुप्त ***********
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