श्री गर्ग संहिता 239


 पोस्ट -( 239 )- गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा - ( ३९ ) इंद्रप्रस्थ के महराजा युधिष्ठिर की भयँकर राजनैतिक भूल - श्री कृष्ण पुत्र के पुत्र प्रद्युम्न के नेतृत्व में यादव सेना की विश्व विजय -- श्री गर्ग संहिता - विश्वजित खण्ड - अध्याय 12 से --31 तक -

     🎆 समझ मे नही आता है कि राजा युधिष्ठिर से इतनी #भयँकर राजनीतिक #गलतियां कैसे हो जाती थी ? पांडवो के परम मित्र भगवान कृष्ण के पुत्र जिस यादव सेना का नेतृत्व कर रहे हो , उससे युद्ध करने के लिए इंद्रप्रस्थ से अपनी 2 अक्षोणी सेना अपने चिर वैरी #कौरवों की सहायता के लिए उन्होंने कैसे भेज दी ? वह तो श्री कृष्ण और बलराम ने आकर युद्ध रुकवा दिया -- 

       🎈 फिर श्री कृष्ण और बलराम प्रद्युम्न के साथ इंद्रप्रस्थ प्नहुँचे - वहां उनका भव्य स्वागत हुआ- फिर सेना लेकर अर्जुन भी प्रद्युम्न के साथ विश्व विजय की यात्रा पर चले -


      🌋 #त्रिगर्त के राजा #सुशर्मा और #मत्स्यदेश के राजा #विराट से पूजित होकर कौशाम्बी में राजा कुशाम्ब को युद्ध मे हराकर , #अर्बुद और #म्लेच्छ देशों पर विजय पाने के लिए वे प्रस्तुत हुए -- #कालयवन का पुत्र यवनेंद्र " #चण्ड ",ने अपने पिता की मृत्यु का कारण श्री कृष्ण के पुत्र का आगमन को सुनकर , अत्यंत क्रोधित होकर भयँकर युद्ध किया परंतु वह अर्जुन के द्वारा मारा गया - फिर प्रद्युम्न ने तुरन्त #अर्जुन को अपनी सेना का #सेनापति बना दिया ।

       🌎 कैलाश पर्वत के पास श्रोणितपुर में #बाणासुर ने भगवान शंकर के समझाने पर युद्ध न करके प्रद्युम्न और अपने दामाद अनिरुद्ध का स्वागत करके पूजन किया -- 

     🍎 फिर अलकापुरी पँहुचने पर अपने " लोकपाल " होने के अभिमान में #कुबेर ने समर्पण न करके युद्ध करना पसंद किया -कुबेर के पूत्र नल कूबर , फिर तमाम भूत गणों , फिर वीरभद्र और फिर स्वामी कार्तिकेय को अर्जुन ने युद्ध मे परास्त किया - और अंत में विनायक श्री #गणेश जी के आने पर अर्जुन और प्रद्युम्न ने #युक्ति द्वारा उन्हें रणभूमि से हटा दिया और इस प्रकार कुबेर पर विजय पाई - 

         फिर कुबेर ने अन्य वस्तुओ के साथ ही इच्छानुसार चलने वाले " #विष्णुदत्त " नामक #विमान और दिव्य वस्त्र आभूषण आदि भी भेंट में दिये - तदन्तर प्राग्ज्योतिषपुर में उन्हें नगर द्वार पर वानर #द्विविद , ( जिसे पहले प्रद्युम्न ने लंका में फेंका था , वह वहां से वापस आ गया था ) मिला - श्री प्रद्युम्न ने द्विविद को पुनः बाण से सहसा उठाकर आकाश में घुमाया और फिर किष्किंधा में पटक दिया --


       फिर #किमपुरुषवर्ष के रँगवल्लीपुरम के निवासियों को श्री #हरिचरित्र का #गान करते हुए पाया , वहां के चन्द्रवंसी राजा सुबाहु ने प्रद्युम्न का पूजन कर भेंट दी -

      🎆 फिर वे मनोहर चैत्र देशों की ओर गए वहां #इलायची और #लौंग की लताये लहराती थी -फिर निषादों के दिखाए हुए मार्ग से वे सब " हरिवर्ष " की ओर गए -वहां बहुत लंबे शरीर वाले और तीखी चोंच वाले विशाल #गिद्ध और #गरुड़ पक्षियों ने सभी पर आक्रमण कर दिया --

       🎈तब प्रद्युम्न ने #गरुणास्त्र का संधान किया जिससे श्री गरुड़ जी ने प्रकट होकर उन सभी पक्षियों को नष्ट किर दिया --तदन्तर वे सब #दशार्ण जनपद में गए वहां #निशकुशाम्बपुरी के अधीश्वर ने उनका पूजन किया तथा बताया कि हिरण्याकश्यप के वध के बाद प्रह्लाद जी ने यही निवास किया था -

       🎈 फिर प्रद्युम्न ने उत्तरकुरुवर्ष तथा वाराहीपुरी में विजय पाई-- फिर हिरण्यमयवर्ष पर्वत पर पुष्पमाला नदी के तट पर नल और नील के वंशजों महाबली #वानरों ने उन पर आक्रमण कर दिया तब श्री अर्जुन की रथ की ध्वजा पर विराजमान श्री हनूमान जी प्रकट हुए - श्री हनूमान जी को पहचानकर वे वानर नतमस्तक होकर चले गए ।

       🍎 मकरगिरी पर्वत पर दुंदुभियो के शोर से , #मधुमक्खियों ने सेना पर हमला कर दिया तब प्रद्युम्न ने वायुवास्त्र का सन्धान कर उनसे छुटकारा पाया --" रम्यकवर्ष " नामक देश मे दैत्य कालनेमि के पुत्र कलंक दैत्य पर विजय पाई और मानव गिरी पर चढ़ कर श्राद्धदेव का दर्शन किया -- यहां मन्थलशालिनी पुरी के लोगो द्वारा श्री कृष्ण लीला का गान सुना।

* शेष अगली पोस्ट में --****** राम नाथ गुप्त *******

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