श्री गर्ग संहिता 235


 पोस्ट -( 235 ) -- श्री गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण चन्द्र की विजय गाथा - ( ३५ ) -सिद्धाश्रम में श्री श्याम सुंदर की रास क्रीड़ा -- श्री राधा जी व सभी बृज की गोपिकाओं का द्वारिका में स्थायी निवास --

-श्री गर्ग संहिता - द्वारिका खण्ड -- अध्याय 18 --

   **** 🎆 सिद्धाश्रम में श्री श्याम सुंदर की रास क्रीड़ा - 

          श्री राधा जी और गोपीजनो का उत्कृष्ट प्रेम जानकर रूक्मिणी आदि रानियों के मन मे रास क्रीड़ा देखने जी प्रबल इच्छा जागृत हुई और उन्होंने ने श्री कृष्ण से कहा --

       " श्यामसुन्दर ! आपमे प्रेम लक्षणा भक्ति रखने वाली गोपसुन्दरियाँ धन्य हैं --प्रभो ! हमारी प्रार्थना स्वीकार करो और वृंदावन में आपने जिस विधि से रास रचाया था ,उस विधि को हमें भी दिखलाने की कृपा करें --उनकी बात सुनकर हंसते हुए श्री कृष्ण ने कहा कि अगर रासेश्वरी श्री राधा जी के मन मे रास क्रीड़ा की इच्छा हो तो यहां भी रास हो सकता है -फिर रानियों ने श्री राधा जी से प्रार्थना की और उनकी सहमति ले ली --

       🎃 फिर बैसाख मास की पूर्णिमा को उस शुभ और पुण्य तीर्थ सिद्धाश्रम में , रात्रि में जब चंद्रमा की चांदनी सब ओर फैल गयी -तब #रास #क्रीड़ा का आरम्भ हुआ --रासेश्वर के रास का आनन्द प्राप्त करने के लिए #रासेश्वरी श्री #राधा जी तैयार हो गईं और उनके साथ #रसिक #शेखर , #श्यामसुंदर रास स्थली में उसी प्रकार सुशोभित हुए ,जैसे रति के साथ रतिपति मदन -- 

       🎆🎃 जितनी सम्पूर्ण गोप सुंदरियां और जितनी राजकन्याएँ वहां उपस्थित थी , उतने ही #रूप धारण करके ,दो दो सुंदरियों के बीच मे एक एक श्री कृष्ण शोभा पाने लगे --

        🎃करोड़ो कामदेवों के लावण्य को लज्जित करने वाले श्यामसुंदर , अनेको वाद्ययंत्रों की सुमधुर ध्वनि और नूपुर ,कांची आदि आभूषणों की मधुर झंकार के साथ मे श्री कृष्ण ,श्री राधा जी के साथ गीत गाने लगे - इस प्रकार वह आनन्दमयी सम्पूर्ण निशा , रास मण्डल में एक छण के समान व्यतीत हो गयी --

      🍎 रास समाप्त होने पर रानियों ने अभिमान के साथ श्री कृष्ण से कहा कि ऐसा रास दूसरा न तो कभी हुआ होगा और न ही होगा क्योंकि इसमें गोपियों के साथ हम हजारो रानियां भी उपस्थित थी -उनकी बात सुनकर श्री कृष्ण और राधा जी बोलीं -- यहां का रास सर्वोत्कृष्ट है  

       🎃 परंतु वृंदावन के रास की शोभा और आनन्द ही कुछ और था -- वहां #दिव्यवृक्षों और #लताओं से व्याप्त , प्रेम के भार से झुकी हुई लता वल्लरीओ से विलसित और मधुमत्त मधुपो से सुशोभित ,वृंदावन यहां कहां है ? यमुना जी और गिरीरांज गोवर्धन यहां कहां है ? जहां वृंदावन नहीं है वहां हमारे मन को सुख नही मिल सकता है -

        फिर सभी पटरानियों ने रास सम्बन्धी अपना #अभिमान #त्याग दिया , वे हर्षित और विस्मित हो गईं -- इस प्रकार राधिका वल्लभ श्री कृष्ण ,सिद्धाश्रम में रास क्रीड़ा सम्पन्न करके 

      🎆🎄🎃समस्त गोपियों को साथ लेकर श्री राधा जी व अपनी रानियों समेत द्वारिका पूरी में प्रविष्ट हुए --

     🎆 श्री कृष्ण ने श्री राधा जी के लिये बहुत ही सुंदर मन्दिर बनवाये ,उन समस्त वृजागनाओ के रहने के लिए भी सुखपूर्वक व्यवस्था की ।

       🍓 इसके बाद गर्ग संहिता के 19 वे अध्याय से 21 तक में द्वारिका छेत्र में लीला सरोवर ,हरि मन्दिर , ज्ञान तीर्थ ,कृष्ण कुंड ,बलभद्र सरोवर ,दान तीर्थ ,गणपति तीर्थ , माया तीर्थ आदि का वर्णन है --

  **************** अपनी बात *******

     🎆 इस प्रकार अन्य पुराणों से भिन्नता रखते हुए , यादवों के कुलपुरोहित श्री गर्गाचार्य द्वारा रचित गर्ग संहिता में तीन महा रासलीलाओं का वर्णन मिलता है - पहली दोनो वृंदावन में तथा यह तीसरी द्वारिका छेत्र के सिद्धाश्रम में -- और फिर श्री राधा जी के साथ सभी ब्रजांगनाओं को भगवान कृष्ण ने द्वारिका में ही स्थायी निवास प्रदान करने की कृपा की । 

       🎆🎃 श्री राधा जी के बारे में कोई भी किसी भी प्रकारका उल्लेख श्री मद् भागवत महापुराण में नही मिलता है - श्री राधा जी के चरित्र का वर्णन केवल यहां गर्ग संहिता में तथा श्री देवी भागवत पुराण में ही है ।


      🎈गोलोक में भी सृष्टि के प्रारम्भ में , जगत के कार्यो को संचालित करने के लिए ,सनातन परमेश्वर श्री कृष्ण के बाएं नङ्ग से श्री राधा जी का प्राकट्य हुआ था और श्री दामा के श्रापवश पृथ्वी पर अवतीर्ण होकर दोनो ने 100 वर्ष का वियोग को भोगा-- 

       🎆 विशेष बात यही है कि श्री राधा और श्री कृष्ण , दो अलग अलग भाषित होते हुये भी #एक ही #स्वरूप है - दोनो के बीच की रास लीला आदि की कथा , #प्रभु और #भक्त के बीच #परम #उत्कृष्ट #प्रेम में #परमानंद पाने की कथा है ।

***** क्रमशः ********** राम नाथ गुप्त ***********

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