पोस्ट --( 234 )-- श्री गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण चंद्र की विजय गाथा --( ३४ ) - चक्र तीर्थ तथा गज और ग्राह की कथा -- 100 वर्ष के बिछोह के बाद सिद्धाश्रम " में श्री कृष्ण व श्री राधा जी का मिलन - गर्म दूध श्री राधा जी ने पिया और छाले पड़े श्री कृष्ण के चरणों मे ? श्री गर्ग संहिता --द्वारिका खण्ड --अध्याय 16 / 17 -
**** चक्र तीर्थ तथा गज और ग्राह की कथा - ****
🎈एक बार श्री दुर्वासा मुनि के श्राप से कुबेर के दो मंत्री विशाल रूप में महाशक्तिशाली गज ( हाथी ) व ग्राह ( मगर) बने - ,
🌋 एक बार गोमती नदी में हाथी अपने परिवार के साथ स्नान करने गया - वहीं वह विशाल ग्रह भी जल में मौजूद था , उसने हाथी का पैर पकड़ कर गहरे जल की ओर खींचा - हाथी ने अपना पूरा प्रयास लगाया फिर परिवार के हाथियों ने भी प्रयास किया परंतु जब उसे कंही से भी कोई आसरा नही रहा तब उसने कालपाश के वशीभूत होकर , पूर्व जन्म की बातों को स्मरण करके ,"#प्रेमलक्षणा #भक्ति" से श्री हरि का चिंतन कर , उन्ही श्री #हरि को #रक्षा करने के लिए पुकारा -- दीनवत्सल श्री हरि गरुड़ पर आरूढ़ होकर बड़े वेग से दौड़ते हुए आये -- उन्होंने अपना चक्र चलाया जो ग्राह की गर्दन को काटता हुआ गोमती के कुंड में महान शब्द करता हुआ गिरा -उसने वहां के समस्त प्रस्तर समूहों को चक्र से चिन्हित कर दिया -उसकी #नेमी की रगड़ से वहां कल्याणकारी "" #चक्रतीर्थ "" प्रगट हो गया - मस्तक कट जाने पर ग्रह ने अपना पूर्व का दिव्य रूप धारण कर लिया और प्रभु की कृपा से हाथी भी दिव्य रूप पाकर कुबेर के धाम को चला गया --
🎆🎈* " सिद्धाश्रम " में श्री कृष्ण व श्री राधा जी का मिलन ---*****
एक बार चंद्रनाना सखी के मुख से सिद्धाश्रम की महिमा सुनकर श्री कृष्ण के वियोग में व्याकुल , श्री राधा जी ने सभी सखियों सहित वहां जाकर स्नान करने का विचार किया --बैसाख मास में सूर्यग्रहण के अवसर पर श्री राधा जी गोपांगनाओ और गोपो के 100 यूथो के साथ अनार्त देश ( द्वारिका का क्षेत्र ) के सिद्धाश्रम में पहुँची --
🍎 वहीं साक्षात भगवान श्री कृष्ण भी , अपनी सभी 16108 रानियों के साथ यादव गणो से घिरे हुए वहां तीर्थयात्रा के लिए प्नहुँचे --वहां श्री राधिका जी के सेवक ,हजारो बलिष्ठ गोपाल हाथो में अस्त्र सस्त्र लिए सिद्धाश्रम की चारो ओर से रक्षा कर रहे थे -जिन्हें देखकर यादव पुंगव वहां भयभीत से खड़े हो गए - श्री कृष्ण की रानियो को श्री #राधा जी की #सुंदरता और #वैभव को देखकर बहुत आश्चर्य हुआ और उन्होंने इस बाबत श्री कृष्ण से जानना चाहा --
🍓 श्री कृष्ण ने रानियों को उत्तर दिया --" यह साक्षात वृषभानु की पुत्री , कीर्तिं नन्दिनी और मेरी प्राणवल्लभा श्री राधा जी है - इन्ही का यह अदभुत वैभव है --रानियों सत्यभामा आदि ने अपने रूप सौंदर्य , श्री कृष्ण के प्रेम व अपने भाग्य पर अभिमान से ग्रस्त होकर - श्री राधा जी को देखना चाहा -- परंतु अपने अभिमान में ग्रसित उन रानियों ने जब श्री राधा जी को दूर से देखा तब उनके रूप , कांति और तेज से मोहित होकर #मूर्छित सी हो गयी ,--वे परस्पर बोली -
🎆" अहो ! ऐसा अदभुत मनोहर रूप तो हमने तीनो लोको में कहीं नही देखा" -
🎈🎈पहले गोलोक में श्री दामा द्वारा श्री राधिका जी को दिए गए , 100 वर्ष श्री कृष्ण से विलग रहने के श्राप की अवधि पूरी हो चुकी थी - इसलिये यह मिलन सम्भव हो सका --
, श्री राधा जी ने श्री कृष्ण और उनकी रानियों का स्वागत किया व स्वर्णिम सिंहासन पर उन्हें बैठाकर उनकी विधिवत पूजा स्तुति की --श्री राधा जी रानियों से बोली -- जैसे चंद्रमा और सूर्य एक है परंतु देखने वाली दृष्टियां बहुत है ऐसे ही श्री कृष्ण एक है परंतु इनमे भक्तिभाव रखने वाले हम सब अनेक है - हे राजकुमारियों ! इस भूतल पर श्री कृष्ण के प्रभाव को यथार्थ रूप से इनका भक्त ही जानता है -फिर श्री रुक्मणी जी श्री राधा जी को श्री कृष्ण सहित अपने शिविर में ले गयी ।
🌋 श्री कृष्ण को बैठकर जागते देखकर रुक्मणी जी ने पूछा " स्वामिन आप सोते क्यो नही ?" श्री कृष्ण बोले - श्री राधा जी प्रतिदिन सोने से पहले दूध पिया करती है आज दूध न मिल पाने के कारण वे नही सो सकी है इसीलिए मैं भी नही सो सका हूँ " --
🎆 श्री रुक्मणी जी ने तुरन्त दूध को गर्म करवाकर राधा जी को ले जाकर पिलाया ,और पान का बीड़ा भी दिया -- परंतु वापस आकर जब रुक्मणी जी श्याम सुंदर के पैरों को दबाने लगी तब वे श्री कृष्ण के
#पादतल में पड़े नये #छालों को देखकर आश्चर्य से चकित ही गयी --उनके इसका कारण पूछने पर श्री कृष्ण , राधा की भक्ति को प्रकाशित करने के लिए सोलह हजार रानियों के सम्मुख बोले -
🎆🎆" श्री राधिका जी के प्रेम पाश में बंधकर मेरे #चरण सदा उनके #ह्रदय में विराजमान रहते है - कभी निमेषमात्र के लिए भी अलग नही होते , आज तुम लोगो ने उन्हें कुछ अधिक गर्म दूध पिला दिया है , यह दूध मेरे पैरों पर पड़ा और इसलिए इनमे छाले हो गए है --तब रानियां श्री कृष्ण के पैर सहलाने लगी और बोली -
🎆 -" मधुसूदन माधव में श्री राधा जी की प्रीति बहुत ही उच्च कोटि की है -उनकी समानता करनेवाली कोई स्त्री नही है --यह श्रीराधा जी इस भूतल पर अद्वितीय नारी हैं "" जय हो श्री राधे कृष्ण की !! जय हो !!
**************** अपनी बात ********
🎈 गज और ग्राह की कथा स्पष्ट सन्देश देती है कि जब तक जीव को किसी अन्य का आसरा रहता है , प्रभु लाख बुलाने पर भी नही आते -- परंतु जैसे ही सब आसरो को छोड़कर जीव केवल प्रभु की शरण को ग्रहण करके उन्हें आर्त भाव से बुलाता है , वे दौड़े चले आते है
🎈श्री रुक्मणी जी के द्वारा श्री राधा जी को दूध पिलाने से श्री कृष्ण के पैरों में पड़े छाले - वाली कथा का सार है कि अनन्य प्रेम में दोनो भक्त और भगवान दो न रहकर एक हो जाते हैं-- वैसे भी राधा जी व श्री कृष्ण एक ही है दो अलग व्यक्ति नही --
***** क्रमशः ****** राम नाथ गुप्त कनौज *****

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