पोस्ट --( 233 )- श्री गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा - ( 33 ) -
सत्राजित की कथा - श्री कृष्ण पर का झूठा कलंक --जाम्बवन्ती , सत्यभामा , कालिन्द्री , सत्या ,भद्रा , लक्ष्मणा , मित्रवृन्दा के अलावा 16000 राजकुमारियों से अलग अलग रूप रखकर एक साथ अलग अलग विवाह - शम्बासुर और प्रद्युम्न की कथा -- -- श्री गर्ग पुराण - द्वारिका खण्ड -अध्याय 8 --
🎈भगवान श्री कृष्ण के दरबार के सदस्य सत्राजित ने सूर्य की आराधना की थी और सूर्य ने उन्हें एक अदभुत मणि प्रदान की थी जिससे रोजाना 8 भर सोना प्राप्त होता था - एक बार श्री कृष्ण ने प्रजा के हित के लिए सत्राजित से वह मणि मांगी परंतु प्राप्त होने वाले धन के लोभवश उसने मणि देने से इनकार कर दिया -
कुछ समय बाद सत्राजित का भाई प्रसेन उस मणि को गले मे पहन कर जंगल मे शिकार खेलने गया - वहां एक शेर ने उसे घोड़े सहित मार डाला फिर वहां जाम्बवान ने सिंह को मारकर उस मणि को ले जाकर अपनी पुत्री जामवंती को दे दी -- अगले दिन प्रसेन के न लौटने पर सत्राजित प्रचार करने लगा कि लगता है कि श्री कृष्ण ने मणि के लिए प्रसेन की हत्या कर दी -
🎈श्री हरि इस कलंक के टीके को मिटाने के लिए स्वयम सच्चाई जानने जंगल मे गए - उन्होंने सिंह द्वारा मारे गए प्रसेन और सिंह की भी लाश पड़ी देखी , फिर वे तलाश करते हुए जाम्बवान की गुफा में पँहुचे - जाम्बवान से 28 दिन युद्ध करके प्रभु ने उसे परास्त किया , फिर जाम्बवान ने श्री हरि को पहचाना और श्री कृष्ण ने "श्री राम" के रूप में उसे दर्शन दिए --
🎈उसने अपनी पुत्री #जाम्बवन्ती का विवाह श्री कृष्ण से करके वह दिव्य मणि भी दहेज में श्री कृष्ण को दे दी - श्री कृष्ण ने वह मणि लाकर फिर सत्राजित को दे दी --अभी तक झूठे आरोपो को लगाने से लज्जित हुए सत्राजित ने फिर अपनी पुत्री #सत्यभामा का विवाह श्री कृष्ण से कर दिया और वह मणि भी पुनः श्री कृष्ण को दे दी --
🍅 यमुना के किनारे साक्षात कालिन्द्री देवी प्रभु को पति रूप में पाने के लिए #तपस्या कर रही थी - श्री कृष्ण ने कृपापूर्वक उनकी कामना को पूर्ण किया और सूर्य पुत्री कालिन्द्री से विवाह किया --
🍅 अवंती नरेश की पुत्री मित्रवृन्दा भी प्रभु को पाने के लिए तपरत थी - प्रभु रुक्मणी की ही भांति उसे भी स्वयम्वर से हर लाए --
🍅 राजा नग्नजित ने अपनी पुत्री सत्या के विवाह के लिए #वीरभोग्या वाली #शर्त रक्खी थी कि जो कोई सात सांडो को एक साथ नाथ देगा , उसी को अपनी कन्या समर्पित करेंगे , प्रभु ने उनकी शर्त को पूरी करके सत्या से विवाह किया -
🍅 कैकय राज की पुत्री #भद्रा से भी प्रभु का विवाह हुआ , और राजा ब्रह्तसेन की पुत्री " #लक्ष्मणा" को स्वयम्वर में #मत्स्यभेदन कर शर्त पूरी करके श्री कृष्ण ने वरण किया - इस प्रकार श्री कृष्ण के यह 8 विवाह , रुक्मणी जी ;,जाम्बवन्ती ; सत्यभामा ; कालिन्द्री ;मित्रवृन्दा ;सत्या ; भद्रा ;लक्ष्मना से हुए ---
🎆 दुष्ट राजा #भौमासुर ने अनेको राजाओ की हत्या करके 16100 राजकुमारियों को अपने यहां कैद कर रक्खा था - प्रभु श्री कृष्ण ने उस आततायी राजा भौमासुर का वध करके सभी को आजाद कराया - अब उन राजकुमारियों का कोई ठिकाना न देखकर , श्री कृष्ण उन चारुदर्शना युवतियों को अपने साथ ले आये और
🎆 🍎 एक ही मुहूर्त में ,विभिन्न भवनों में रहती उन युवतियों के साथ अपनी माया से उतने ही रूप धारण करके भगवान ने उन सबका विधिवत पाणिग्रहण किया --इस प्रकार सभी 16108 रानियों में प्रत्येक से श्री कृष्ण ने दस दस पुत्रो को उत्पन्न किया - वे सभी पुत्र गुणों में अपने पिता श्री कृष्ण के समान थे --
🎈 श्री कृष्ण के सबसे बड़े पुत्र रुक्मणी नन्दन कामदेव के अवतार "प्रद्युम्न" हुए , जन्म लेते ही प्रद्युम्न को सूतिका ग्रह से शम्बरासुर हरण कर ले गया और समुद्र में फेंक दिया , प्रद्युम्न को एक बड़ी मछली ने निगल लिया और संयोग से वह मछली शम्बरासुर की रसोई में पंहुची , जहां श्री कृष्ण कुमार जीवित निकल आये ,उन्हें उनके पूर्व जन्म की पत्नी रती ने पाला और रसायन विद्या से युवा कर दिया -
🎁 प्रद्युम्न ने फिर शम्बरासुर का वध करके अपनी दिव्य भार्या रती के साथ द्वारिका पहुँचे -- महाबली प्रद्युम्न , रुक्मी की बेटी को स्वयम्वर से भोजकट नगर से हर लाये और द्वारका में उससे विवाह संपन्न हुआ --प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध हुए जिन्हें ब्रम्हा जी का अवतार माना जाता रहा है - अनिरुद्ध में दस हजार हाथियों का बल था -
************ अपनी बात *******
🎆 आधात्मिक व्याख्या --- शरीर मे प्रमुख नाड़ियों की संख्या भी 16108 मानी गयी है -- भगवान श्री कृष्ण #योगिराज थे -- योगी का अपने शरीर की हर एक #नाड़ी पर पूर्ण नियंत्रण होता है - 16108 नारियों से विवाह - का योगी की दृष्टि में माने शरीर की #सम्पूर्ण #नाड़ियों पर #नियंत्रण भी हो सकता है --
*********क्रमशः ******** राम नाथ गुप्त ************

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