पोस्ट --( 232 )- श्री गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा -(३२ )- श्री रूक्मिणी हरण और विवाह - द्वारिका समुद्र पर कैसे स्थापित हुई और समुद्र में क्यों डूबी ? - एक विचार ---
गर्ग संहिता - द्वारिका खण्ड -अध्याय 7 --
🎃 वृंदावन और द्वारिका - पहली * वृंदावन * ब्रम्ह श्री कृष्ण की लीला स्थली ---और दूसरी * द्वारिका* ब्रम्ह श्री कृष्ण की कर्म स्थली -- और दोनो ही पवित्र पावन स्थान - #दोनो #गोलोक #बैकुंठ का #भाग जिन्हें वहां से प्रभु ने कृपापूर्वक पृथ्वी पर भेजा था - 🎆 गर्ग संहिता - द्वारिका खण्ड - अध्याय 9 के श्लोक 28 / 30 के अनुसार प्रभु श्री कृष्ण ने समुद्र में #सुदर्शन #चक्र की #नींव बनाकर उसी के ऊपर बैकुंठ से लाये गए द्वारिका के भूखंड को स्थापित किया था - अगर हम आधुनिक वैज्ञानिक शब्दो मे कहे तो शायद समुद्र के अंदर बेस ( पिलर्स की तरह का निर्माण ) करके उस पर द्वारिका के भूखंड को स्थापित किया गया होगा --
******* द्वारिका समुद्र में क्यो डूबी ? *********एक विचार *******
🎈 यादवों के आपसी मूसल जनित युद्ध मे जब ऐरक घास ने वज्र बन कर सभी यादवों का विनाश किया था ,यानी यादवों में आपस मे #ऐरक #मिसाइल #युद्ध हुआ था तब शायद द्वारिका के समुद्र में स्थित #बेस #पिलर्स #नष्ट होने के कारण ,द्वारिका समुद्र में हमेशा के लिए डूब गई होगी , यह हो सकता है - वैज्ञानिकों को इस पर अनुसंधान करना चाहिए
**** भगवान कृष्ण द्वारिकाधीश परंतु द्वारिका के महाराजा थे उग्रसेन ******
यद्यपि द्वारिका के सभी कार्यो का संचालन करने वाले भगवान कृष्ण ही थे इसीलिए वे द्वारिकाधीश कहलाते है ,, फिर भी वरिष्ठ पूज्यो का सम्मान करते हुए उन्होने द्वारिका के राज सिंहासन पर अपने नाना , ( कंस के पिता ) #उग्रसेन को बैठाया था ----
********** श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह *******
श्री बलराम जी के विवाह प्रसंग के बाद श्री नारद जी ने भगवान श्री कृष्ण के विवाह का व्रतांत , जो सब पापो को हरने वाला , पुण्य जनित तथा धर्म अर्थ काम मोक्ष को देने वाला है , को सुनाया -
🍓 विदर्भ देश के कुण्डिनपुर के प्रतापी राजा #भीष्मक के एक पुत्र रुक्मी और एक पुत्री #रुक्मिणी थी जो सर्वांग सुंदरी थी - रुक्मिणी ने श्री कृष्ण के अलौकिक गुणों को सुनकर वह उन्हें अपना पति मानने लगी थी - इसी प्रकार रुक्मिणी व उसके अपने प्रति प्रेम के बारे में जानकर श्री कृष्ण ने भी उसे अपने योग्य माना --
🍘 धार्मिक स्वभाव के राजा भीष्मक भी श्री कृष्ण को ही अपना जामाता बनाना चाहते थे परन्तु उनका पुत्र रुक्मी ,श्री कृष्ण से द्वेष रखता था वह अपनी बहन का विवाह श्री कृष्ण से शत्रुता मानने वाले शिशुपाल से करना चाहता था -,उसने शिशुपाल से विवाह तय कर दिया और बारात भी बुला ली --- परेशान रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण को अपना दूत बनाकर श्री कृष्ण के पास भेजा और उनसे शिशुपाल से बचाने व स्वयम को स्वीकार करने की प्रार्थना की ।
🍓जब्राह्मण देवता की बात सुनकर श्री कृष्ण ने अपने सारथी दारूक को #बैकुंठ से आये हुए #दिव्यरथ को तैयार करके लाने का आदेश दिया और रुक्मिणी द्वारा बताये गये स्थान कुलदेवी के मंदिर पर ब्राह्मण देवता को साथ मे बिठाकर वहां पहुँचे - श्री कृष्ण को अकेले गए जानकर श्री बलराम जी भी सेना लेकर कुण्डिनपुर के लिए चले -- दूसरी ओर शिशुपाल भी बरात व सेना लेकर विवाह के लिए कुण्डिनपुर के लिए चला - शिशुपाल के साथ जरासन्ध ,शाल्व ,दन्तवक्र , विदूरथ और पौंड्रक जैसे श्री कृष्ण के विरोधी शक्तिशाली राजा भी सेनाओं के साथ चले -
श्री कृष्ण के चरणारविन्द का चिंतन करती हुई रुक्मिणी बेचैनी से श्री कृष्ण के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थी --तभी ब्राह्मण ने आकर उन्हें प्रभु आगमन का शुभ सन्देश दिया -,लक्ष्मी की अवतार रुक्मिणी ने प्रसन्न होकर हमेशा उस ब्राह्मण के यहां लक्ष्मी रूप में निवास करने का वचन दिया -
🎈 फिर कुलदेवी गिरिजा की पूजा करने के लिए रुक्मिणी , सहेलियों व रक्षको के साथ मन्दिर में गयी - उनके मन्दिर से निकलते समय शत्रुओं के देखते देखते श्रीघ्र ही स्त्री समुदाय के पास पंहुचकर श्री कृष्ण ने रुक्मिणी को अपने रथ पर चढ़ा करके उसका अपहरण कर लिया --रुक्मी , शिशुपाल तथा उसके मित्रो ने सेना के साथ श्री कृष्ण पर आक्रमण कर दिया परंतु प्रभु ने भीषण युद्ध मे सभी को परास्त कर दिया और श्री बलराम जी के पराक्रम के सामने सभी को भागने को मजबूर होना पड़ा -
🎈 युद्ध कर रहे रुक्मी के जब सारे अस्त्र सस्त्र समाप्त हो गए तब श्री कृष्ण ने उसे अपने भुजदण्डों से पकड़ कर पृथ्वी पर दे मारा और रोष पूर्वक उस पर चढ़ कर उसे मारने को तलवार निकाल ली तब रुक्मिणी ने प्रभु से विनय करके अपने भाई की जान बचाई - फिर प्रभु ने रुक्मी को बांधकर तीखे खड्ग से उसके सिर के आधे बाल व मूछे साफ कर दी तब श्री बलराम जी ने आकर उसे सम्बन्धी बताकर छुड़वाया ।
🎆🎆 फिर द्वारका में विधिवत श्री कृष्ण और रुक्मणी का #विवाह संपन्न हुआ - श्री बलराम जी के समझाने पर अपमानित रुक्मी ने वैमनस्यता छोड़कर तपस्या करने का विचार किया परंतु मुख्य मुख्य मंत्रियो के समझाने पर उसने तपस्या का विचार त्याग दिया -- परंतु उसने कुण्डिनपुर में पैर नही रक्खा और अपने निवास के लिए " भोजकर" नामक उत्तम नगर का निर्माण कराया -
************** क्रमशः ************ *********** राम नाथ गुप्त कनौज ***********

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