पोस्ट -( 231 ) -- श्री गर्ग संहिता ~~परिपूर्णतम ब्रम्ह श्रीकृष्ण भगवान की विजय गाथा -( ३१ ) -
श्री बलराम जी व रेवती का विवाह --द्वारिका , श्री हरि के दिव्य लोक बैकुंठ धाम का एक भाग है --
श्री बलराम जी का आयुध " हल " क्या हो सकता है ?
- श्री गर्ग संहिता -- द्वारिका खण्ड - श्री बलराम जी व रेवती का विवाह---अध्याय 3 और 9 --
**** 🎃 द्वारिका , श्री हरि के दिव्य लोक बैकुंठ धाम का एक भाग है --****
मनु के पुत्र राजा शर्याति हुए -उनके तीन पुत्र थे - उत्तानपाद , आनर्त , और भूरिषेण--सम्पूर्ण पृथ्वी के चक्रवर्ती राजा शर्याति ने उत्तानपाद को पूर्व दिशा , दूसरे पुत्र आनर्त को पश्चिम दिशा और भूरिषेण को दक्षिण दिशा की भूमि का राज्य प्रदान किया -- फिर वे पुत्रो से बोले --
🎈" यह सारी पृथ्वी #मेरी है , मैने बल पूर्वक इसका अर्जन करके धर्मपूर्वक इसका पालन किया है -अतः अब तुम लोग इसका पालन करो "
अपने पिता की बात से सहमत न होकर आनर्त बोले
🎃-"न तो यह पृथ्वी आपकी है , न ही आपने इसका पालन किया है और न ही आपने इसका अर्जन किया है --पिता जी ! #बलिष्ठ तो भगवान श्री #कृष्ण जी ही है ,अतः यह पृथ्वी उन्ही की है ,वे ही इसका पालन करते है और उनके #तेज से ही #वसुंधरा का #अर्जन हुआ है -- वे ही परमात्मा सबके #आश्चर्य और #काल है , जिनके भय से मृत्यु भी घूमती रहती है , आप उन साक्षात परिपूर्णतम परमेश्वर का सम्पूर्ण हृदय से #अहंकार #शून्य होकर भजन कीजिये "
🎆 अपने अहंकार से ग्रसित राजा शर्याति अपने पुत्र के वाग्वाणो से आहत होकर गुस्से से बोले -" ओ खोटी बुद्धि वाले बालक , ऐसा है तो जहां तक मेरा राज्य है वहां तक की भूमि पर निवास मत करना , जिन श्री कृष्ण की बात तुम कर रहे हो वे तुम्हारे लिए नई पृथ्वी ला देंगे "
🍓 फिर आनर्त ने भगवान श्री कृष्ण की तपस्या की , आनर्त को आनत और दीन जान करके श्री हरि बोले - " तुम्हारी भक्ति से मैं सन्तुष्ट हूँ इसलिए मैं तुम्हे अपने #दिव्य लोक #बैकुंठधाम का 100 योजन लम्बा चौड़ा भूखंड मंगवाकर देता हूँ जो तुम्हारा निवास स्थान होगा " - यही दिव्य भूखंड द्वारिका पुरी है - इस द्वारिकापुरी को भगवान ने समुद्र में अपने सुदर्शन चक्र को आधार बनाकर उस पर स्थापित किया था , दिव्य बैकुंठ का भाग होने के कारण वहां #बैकुंठ का #वैभव भरा हुआ था - राजा आनर्त ने सुखपूर्वक वहां राज्य किया -
🍘 आनर्त के पुत्र रैवत हुए - रैवत के 100 पुत्र और सर्व गुण सम्पन्न #रेवती नामक कन्या हुई - रेवती सर्वोत्तम चिरंजीवी तथा सुंदर वर पाने की इच्छा रखती थी --पिता ने सर्वगुण सम्पन्न वर की तलाश की परंतु वे सन्तुष्ट नही हुए तब वे अपनी कन्या रेवती को लेकर , उचित वर के सम्बंध में जानकारी करने के लिए , श्री ब्रम्हा जी के पास बैकुंठ लोक गए - उस समय ब्रम्हा जी की सभा मे पूर्वचित्त नामक अप्सरा का गान हो रहा था -इस लिए वे एक छण तक चुपचाप बैठे रहे , फिर उन्होंने परमपिता के सम्मुख अपनी समस्या रक्खी ।
🍅 श्री ब्रम्हा जी बोले - पृथ्वी के समय काल और ब्रम्हलोक के समयकाल में बहुत अंतर है -इस छण तक पृथ्वी पर महाबली काल बहुत तेजी से बीत चुका है --मर्त्यलोक में तुम्हारे पुत्र , पौत्र ,और उनके भाई बन्धु ,पोते , नातियों के गोत्र तक अब नही सुनाई देते है -
🌎 इस समय गोलोक के अधिपति भगवान श्री कृष्ण और श्री बलराम जी भूमि का भार उतारने के लिए पृथ्वी पर अवतीर्ण हुए है -और द्वारिका में विराज रहे है , बलराम ही तुम्हारी पुत्री के सर्वथा योग्य वर है इसलिए जल्दी जाओ और अपनी पुत्री उन्हें प्रदान करो ।
देवर्षि नारद से श्री कृष्ण को पहले ही यह समाचार मिल गया था , वे भी प्रतीक्षा कर रहे थे -- श्री रैवत जी
अपनी पुत्री के साथ द्वारिका में महल के बाहर बाग में उतरे - सतयुग की होने के कारण रेवती जी की #लंबाई बहुत ज्यादा , #ताड़ के #पेड़ के बराबर थी - तब श्री बलराम जी ने अपने #हल से #खींच कर रेवती की लंबाई को अपने उपयुक्त बनाया ।
🎈 श्री बलराम जी व रेवती जी का विवाह बहुत ही धूमधाम से हुआ - राजा रैवत जी ने श्री ब्रम्हा की द्वारा प्रदत्त एक विशाल रथ तथा दिव्य तरकस और बाण तथा तमाम अन्य आयुध व रत्नों को श्री बलराम जी को भेंट किया -
*********** अपनी बात *****
🎆🎆 जब भी श्री बलराम जी के आयुध हल की बात आती है , उसे किसान वाले खेत जोतने वाले हल ही समझा जाता है -- हो सकता है यह सच हो -- परंतु हल माने #सोल्यूशन भी होता है - श्री बलराम जी अत्यंत #बलवान होने के साथ ही विभिन्न अस्त्र शास्त्रों के ज्ञाता तथा #विज्ञान और #ज्ञान के #भंडार भी थे - वे शेष के अवतार थे यानी सम्पूर्ण विद्याओ के ज्ञाता थे इसके बाद शेष कुछ भी नही बचता --
ऐसे विद्यावान बलवान श्री बलराम जी ने हो सकता है कि कोई #विद्या से भी रेवती जी की लंबाई कम की हो --
इस प्रकार श्री रेवती जी अपने पति श्री बलराम जी से कई युगों तक #बड़ी थी
अब विज्ञान ने समुद्र में डूबी हुई द्वारिका की बात को सत्य प्रमाणित कर दिया है - मगर अभी भी परम पवित्र , बैकुंठ का भाग , श्री हरि के निवास स्थान , द्वारिका के बारे मे बहुत कुछ जानना है - इस पर निरंतर खोज जारी रहनी चाहिए --
************* क्रमशः *********** राम नाथ गुप्त कनौज *****************

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