पोस्ट --( 228 )- श्री गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा -- (२८ ) -
श्री उद्धव का श्री राधा जी से मिलन - श्री मथुरा खण्ड - अध्याय 16 से 20 तक --
🌰 बृज में प्रातःकाल गोपियों ने जब नन्दराय जी के द्वार पर वह रथ खड़ा देखा जिससे श्री कृष्ण मथुरा गए थे तब वे सब एकत्रित होकर वहां आयी और उनकी भेंट श्री उद्धव जी से हुयी - श्री कृष्ण का संदेश उद्धव जी से पाकर वे सब उद्धव जी को श्री राधा जी से मिलवाने कदली वन में ले गयी - श्री कृष्ण के विरह में व्याकुल श्री राधा जी को उद्धव ने श्री कृष्ण का पत्र दिया - श्री राधा जी ने पत्र लेकर अपने मस्तक पर रक्खा फिर श्री कृष्ण के चरणरबिंदो का स्मरण करके अत्यंत प्रेमातुर होकर वे नेत्रों से अश्रु धारा बहाने लगी --वे बोली
🎈" उद्धव वह समय कब आएगा जब मैं गगन के समान श्याम कांतिवाले आनन्दप्रद श्री ब्रज राज का दर्शन करूंगी - उद्धव ! क्या कभी श्याम सुंदर इस बृज के मार्ग पर पदार्पण करेंगे ? "
उद्धव ने श्री राधा जी की स्तुति करते हुए कहा --
🎈" श्री राधे ! श्री कृष्ण सदा #परिपूर्णतम #भगवान है और आप सदा #परिपूर्णतम #भगवती है -
तमाम उदाहरण देते हुए उद्धव ने बताया कि कैसे हर अवतार में आप श्री हरि की #शक्ति बन कर के #अवतरित होती रहती है -आप उनसे #अभिन्न है -श्री कृष्ण "चंद्रमा " है तो आप उनकी चंद्रिका रूपिणी है- आकाशगत सूर्यमण्डल में श्री कृष्ण ही सूर्य है और आप ही उनकी प्रभामयी परिधि के रूप में प्रतिष्ठित है --पुराणपुरुष श्री कृष्ण स्वयम परब्रम्ह है और आप ही उनकी इच्छारूपिणी #लीलाशक्ति है -उन्होंने यह संदेश दिया है कि मैं कुछ ही दिनों में यहां मथुरा के कार्यो का सम्पादन करके वहां आऊंगा"" -
गोपांगनाओ ! भगवान श्री कृष्ण के दिये हुए वे परम् मंगलमय सैकड़ो पत्र आप लोग ग्रहण करें -
🌰 विभिन्न समूहों वाली गपियो ने करूण स्वरों में अपने सन्देश उद्धव को दिए -श्री राधा जी का श्री कृष्ण के लिए लिखा पत्र , निरन्तर प्रेमाश्रु बहाती हुई राधा जी के #आंसुओ से भीग गया तब उद्धव जी बोले कि मैं आपका सारा दुख बिना पत्र के ही श्री कृष्ण से निवेदन कर दूंगा --फिर #ज्ञान #शिरोमणि उद्धव जी अब
#प्रेम #शिरोमणि बनकर , सभी से आज्ञा लेकर वापस श्री कृष्ण के पास चले गए --
मथुरा में उद्धव जी को श्री कृष्ण यमुना के मनोहर तट पर वट के नीचे एकांत स्थान में बैठे हुए मिले -वहां उनको प्रणाम और परिक्रमा करके उद्धव गद गद वाणी में बोले
🎆-" प्रभो आप राधिका और गोपियों का कल्याण कीजिये ! कल्याण कीजिये ! मैने उन सभी से आपको श्रीघ्र वापस लेकर आने का वायदा किया है , प्रभो मेरे वचनों की रक्षा कीजिये !""
🍎 फिर श्री कृष्ण रथपर बैठकर उद्धव के साथ ब्रज में आये और नन्दराज के घर जाकर माँ यशोदा आदि सभी से मिले - फिर कदली वन में जाकर श्री राधा जी और गोपियों से मिले --श्री राधाजी ने अपने विरह के असीम दुख को बताते हुए उद्धव जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जिनके कारण फिर श्री हरि से सम्पर्क सम्भव हो सका -
श्री कृष्ण ने फिर दोहराया -
🎆" राधे ! शोक न करो ! हम दोनों का तेज भेद रहित ,एक है -लोगों ने इसे दो रूपो में मान रक्खा है - जहाँ मैं हूँ वहां तुम सदा विराजमान हो ! हम दोनों का वियोग कभी होता ही नही"" -
🌰 श्री कृष्ण का यह वचन सुनकर कीर्तिंन्दिनी श्री राधा जी ने श्री कृष्ण का पूजन किया - तदन्तर कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि को ''श्री राधिका जी के साथ #रासमण्डल में उपस्थित हो श्री हरि ने मुरली बजायी --जितनी गोपियाँ थी प्रभु श्री कृष्ण ने भी उतने ही रूप धारण करके वे " """दिव्य वृन्दाबन """में विहार करने लगे --फिर श्री कृष्ण श्री राधा जी के साथ वही #अंतर्धान हो गए -
🍟 तब वे दोनो गोवर्धन से 3 योजन दूर चन्दन की गंध से सुवासित सुंदर रोहिताचल को चले गए -वहां सरोवर के कूल पर एक पैर से खड़े होकर महामुनि " ऋभु " श्री कृष्ण के चरणों को ध्यान में रखकर तपस्या कर रहे थे - श्री कृष्ण के आवाज देने पर भी मुनि अपने ध्यान से विरत न हुए तब प्रभु ने अपनी मनोहर छवि को मुनि के ह्रदय से गायब कर दिया - तब अकुला कर जाग कर मुनि ने अपने सामने प्रभु व जगतजननी राधा जी को देखा फिर उन्होंने प्रणाम करके उनकी विविधि भांति स्तुति की और इस नश्ववर शरीर को छोड़कर गोलोक की यात्रा की - मुनि ऋभु का शरीर भी एक नदी बनकर प्रवाहित होकर जन कल्याण के लिए उपयोगी बन गया ।
*************** व्याख्या ****** अपनी बात *********
🎆 यदुकुल और भगवान कृष्ण के पुरोहित श्री गर्गाचार्य द्वारा रचित इस गर्ग संहिता में ही श्री राधा जी का विवरण और भगवान श्री कृष्ण के मथुरा से बृज पुनः आने , गोपियों से मिलने व पुनः महा रास के होने की कथा मिलती है -
🎆 श्री मद् भागवत महापुराण में तो कहीँ भी श्री राधा जी का ही उल्लेख ही नही है और उसमे श्री कृष्ण के मथुरा से व्रन्दावन वापस आने की बात भी नही है - सच क्या है ? वास्तव में दोनो ही विवरण सच है केवल समझने का अंतर है -
🌰 जैसा मैं पहले भी लिख चुका हूँ , गोपियों और श्री कृष्ण व श्री राधा जी की कथा , मानवीय नर और नारियों की कथा न होकर #परम #ब्रम्ह व #आदि #शक्ति की कथा है - इसी दृष्टि से इन कथाओं पर विचार करना चाहिए -
🎆🎈 जब श्री राधा जी वृंदावन में है तब दोनो के एक रूप होने के कारण , निश्चित रूप से श्री कृष्ण भी वही है - कभी प्रकट रूप में कभी अदृश्य रूप में --सर्वव्यापी श्री कृष्ण का मथुरा और बृज में एक साथ एक ही समय पर होना कोई आश्चर्य की बात नही है --
🎆🎈🎈 वृंदावन के सभी सन्त , व विद्वजन आज भी निश्चित रूप से विश्वास करते है कि प्रभु श्री कृष्ण , वृंदावन के बाहर कभी गए ही नही -क्योंकि वृंदावन गोलोक के वृंदावन का एक खण्ड है , इस लिए श्री कृष्ण इस पवित्रतम #वृंदावन की #सीमाओं के #अंदर ही #निरंतर #निवास करते है - और #निरंतर यहां #महारास होता रहता है - #निधिवन प्रत्यक्ष प्रभु की लीलाओं का केंद्र है - इसलिए तर्क वितर्क छोड़कर प्रभु की लीलाओ का आनन्द लीजिए ।
**** राम नाथ गुप्त कन्नौज ****** राम नाथ गुप्त **********

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