श्री गर्ग संहिता 227


 पोस्ट --( 227 )-- श्री गर्ग संहिता -- परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा-( २७ ) उद्धव का बृज आगमन - कुबलियापीड हाथी , कुब्जा , दर्जी , और माली के पूर्व जन्म की कथाये -

 - श्री गर्ग संहिता - श्री मथुरा खण्ड - अध्याय 11 से 25 तक --

       🍎 इच्छारूप धारण करने वाली राक्षसी #सूपनखा ही #कुब्जा हुई थी -- श्री राम रावण युद्ध के बाद खिन्न चित्त होकर सूपनखा पुष्कर तीर्थ चली गयी थी और वहां जल में खड़े होकर श्री राम को पति रूप में पाने की लालसा से भगवान शंकर की काफी लंबे समय तक तपस्या की थी - भगवान शंकर ने द्वापर के अंत मे उसकी कामना पूर्ण होने का वरदान दिया था - श्रीकृष्ण की कृपा से कुब्जा से अति सुंदरी तरुणी बनकर उसने श्री कृष्ण के रूप में परम् प्रभु का सानिध्य प्राप्त किया -

       🍎 दैत्यराज दानवीर #बलि का #पुत्र , समस्त शस्त्र धारियों में श्रेष्ठ, हजारो हाथियों के समान बलवान ,जिसका नाम " #मन्दमति" था एक बार उसने , मतवाली चाल से चलते समय एक बूढ़े " त्रित " मुनि को गिरा देने के कारण वह , मुनि के श्राप से " #कुबलियापीड " हाथी बना -

       🎈 पूर्वकाल में अमरावतीपुरी में " उतथ्य " नाम के प्रसिद्ध महामुनि के कामदेव के समान कांतिवान पांचों पुत्रो ने ब्राम्हणोचित कर्मो , वेदाध्ययन आदि को त्याग कर , मद से उन्मत्त होकर , राजा बलि के यहां प्रतिदिन मल्लयुद्ध की शिक्षा लेनी प्रारम्भ की थी - तब क्रोधवश पिता उतथ्य मुनि के श्राप से वे पांचों , चारूड , मुष्टिक ,कूट , शल ,और तोषल - के रूप में अवतरित हुए और फिर कंस के अनुयायी बन गए थे -


      🌰 एक दिन साक्षात परिपूर्णतम भगवान भक्तवत्सल श्री कृष्ण ने गोपी और गोपगणों से भरे हुए - विरह में दिन रात दुखी गोकुल वासियो का स्मरण किया -और उद्धव को बुलाकर उनसे गोकुल जाने का अनुरोध किया तथा एक पत्र नन्द बाबा के नाम ,दूसरा यशोदा मैया , तीसरा राधिका जी के नाम , चौथा पत्र सखा ग्वाल बालो के लिए दिया --तथा प्रभु उद्धव से बोले --  

     🎃 "" तुम तो नीति शास्त्र के विद्वान हो , बातचीत करने में बहुत कुशल हो , सुंदर सुंदर बाते सुनाकर नन्द बाबा और मैया यशोदा के ह्रदय में मेरी परम प्रीति को धारण कराना -- राधिका मेरे वियोग में आतुर है ,और मेरे बिना मोहवश सारे जगत को सूना समझती है --उन सबको मेरे बिना जो मानसिक व्यथा हो रही है , उसे मेरे सन्देश - वचनों द्वारा शांत करो -- सुदामा आदि ग्वालबाल मेरे प्रिय सखा वे भी मोह से आतुर है -तुम उन्हें भी मित्र की तरह प्रिय वाणी सुनाकर , सुख देना --गोपांगनाये मेरे वियोग की व्यथा के वेग से आतुर है , वे आज भी बड़ी कठिनाई से अपने प्राणों को धारण करती है ,उनके शरीर और प्राण भी मुझ में ही स्थित है --उनकी मानसिक व्यथा को तुम मेरे सन्देश द्वारा शांत करो ""

     🎃 " उद्धव " तुम मेरे समान ही रूप बना लो और मैं जिस रथ पर बैठकर मथुरा आया था उसी रथ को उसी प्रकार सुसज्जित करके उसपर मेरी तरह बैठ कर तुम ब्रज जाओ ""


     🍎 उद्धव को रथ पर बैठकर आते देखकर बृज के ग्वाल बालो ने उन्हें नन्दनन्दन श्री कृष्ण ही समझा और उनके रथ के पास एकत्रित हो गए - पास आने पर उनका भृम दूर हुआ - उद्धव ने श्री कृष्ण का पत्र श्री दामा को देते हुए कहा -" अपने सखा श्री कृष्ण का पत्र ग्रहण करो और शोक न करो , वे भगवान यादवों का महान कार्य को सिद्ध करके बलराम जी के साथ थोड़े दिनों में ही यहां आएंगे "

     🌰 उद्धव ने बृज वासियो को भी श्री कृष्ण की ओर से आश्वासन दिया फिर उन्होंने गोपो के साथ हर्ष में भरकर नन्दगाँव में प्रवेश किया -- नन्दराज ने उद्धव जी का पूजन और सत्कार किया तथा अपने पुत्रों की कुशलता के बारे में पूछा --और फिर उनकी आंखों से प्रेमाश्रु बह निकले --और फिर यशोदा भी कृष्ण के बारे में पूछते पूछते रोने लगी --

    🎈 यशोदा और नन्द जी मे उच्च कोटि का प्रेम का लक्षण प्रकट हुआ देखकर उद्धव जी आश्चर्यचकित हो

 गए --       

        🎆अपनी ज्ञानयुक्त वाणी से सबके विरह के दुख को दूर करने की इच्छा से आये उद्धव का , नन्द और यशोदा के प्रभु के प्रति परम प्रेम को देखकर , उनका अपना सारा #ज्ञानाभिमान #गलगया - फिर उद्धव ने नन्द जी को प्रभु के कुशलता तथा उनके असाधारण कार्यो के बारे में बताया , सारी रात श्री कृष्ण के चरित्रों के स्मरण करने और सुनाने में बीत गयी - प्रातकाल होने पर गोपियों द्वारा दही मथने आदि कामो को करते समय , उन गोपियों द्वारा श्री कृष्ण और बलराम जी के मंगलमय चरित्रों के सुमधुर गान के स्वर हर एक मकान से गूंजने लगे --यह सब सुनकर विस्मित हुए उद्धव बोल उठे --

  🎃🎆🎈 " अहो ! इस नन्द नगरी में तो #भक्ति देवी यत्र , तत्र , #सर्वत्र #नृत्य कर रही है "" 

            यह कहते हुए उद्धव यमुना नदी में स्नान करने चले गए --


         ***** क्रमशः ************** राम नाथ गुप्त ************

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