श्री गर्ग संहिता 225


 पोस्ट --( 225 )-- गर्ग संहिता ~ परिपूर्णतम ब्रम्ह श्री कृष्ण भगवान की विजय गाथा -- अत्याचारी कंस का भाइयों सहित वध -- कुबलियापीड़ ( हाथी ) की तथा इस कंस वध की कथा की आध्यात्मिक व्याख्या --

श्री गर्ग संहिता - श्री मथुरा खंड --

     ********* कुबलयापीड़ का अर्थ -- **********

         🎃 कु= बुरा + बल + पीड़ माने पीड़ा === जो अपने #असीमबल का प्रयोग दूसरों को #पीड़ा पंहुचाने में करता हो --यहां यह कुबलयापीड़ नामक अति विशाल , महा शक्तिशाली हाथी था जिसकी असीम शक्ति का दुरुपयोग , दूसरों को पीड़ा पंहुचाने के लिए पहले उसके मालिक #जरासंध करते थे फिर जरासंध के दामाद #कंस करता था , कुबलयापीड़ को मदोन्मत्त करके उससे श्री कृष्ण और बलराम को कुचलने का प्रयास कंस ने करवाया -- परंतु दुसरो को दुख देने वाली शक्तियों को नाश करने वाले प्रभु ने खेल ही खेल में उसका वध कर दिया ।

        फिर दोनों भाई हाथी का एक एक दांत हाथ मे लेकर , वहां मौजूद सैनिको का वध करते हुए , गोपो और जनता द्वारा अपनी जय जय कार सुनते हुए , बहुत उतावली से रंग शाला में प्रविष्ट हुए --

      🎃 जाकी रही भावना जैसी । प्रभु मूरति देखी तिन तैसी ।।

     उस समय मल्लों ने उन्हें महा मल्ल सा देखा ; और नरो ने नरेंद्र ; नारियों ने उन्हें कामदेव माना ; और गोपगणों ने बृज का स्वामी सा देखा ---; पिता की दृष्टि में वे पुत्र सरीखे ; और दुष्टो को दण्डधारी यमराज प्रतीत हुए ; कंस ने उनमे अपनी मृत्यु को देखा और ज्ञानियों ने उन्हें विराट ब्रम्ह समझा - नगर के कंस से सताए लोग उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हो गए ।

     🎈 उस समय निरंतर बाजे बज रहे थे उसी समय चारूड ने आकर उनसे मल्लयुद्ध करने को कहा तब श्री कृष्ण बोले हम बालक है , मुकाबले में बालक ही होने चाहिए , तुम जैसे बलवान योद्धाओं से लड़ना अधर्म होगा 

-तब चारूड बोला कुबलियापीड को मारने वाले बालक नही हो सकते -- तब अभिमानियों के गर्व को नष्ट करने वाले श्री कृष्ण , चारूड के साथ और श्री बलराम जी मुष्टिक से भिड़ गए --वहां मौजूद नगरवासी पुरुष और महिलाएं इस बेमेल मल्ल युद्ध को देखकर परेशान हो उठे ------तब श्री कृष्ण ने चारूड को पहले हवा में उछालकर फिर बल का प्रयोग करके मार डाला - अत्यंत बलवान, बलराम के हाथों महाबली मुष्टिक भी मारा गया - फिर योद्धा शल को नन्दनन्दन ने लात से मार गिराया और योद्धा तोषल को बीच से चीर कर कंस के मंच के सामने फेंक दिया -- दोनो श्री कृष्ण और बलराम के इतने वीभत्स स्वरूप को देखकर कंस के बाकी के मल्ल योद्धा भाग खड़े हुए

        🎆 तब भयभीत कंस जोर से चिल्लाया -"" इन दोनों को तुरन्त मार डालो या हठात मेरे नगर से निकाल दो -ब्रजवासियों का सारा धन हर लो , नन्द को कैद कर लो ,मेरे पिता उग्रसेन का सिर काट कर ले आओ और पृथ्वी पर जहां कहीं भी और जो भी वृष्णि वंशी यादव मिल जाएं , उन सबको देवताओ के अंश से उत्पन्न समझ करके मार डालो ""-

        🎃 कंस को बड़बड़ाते देखकर , प्रभु श्री कृष्ण उछलकर उसके मंच पर चढ़ गए , कंस ने ढाल तलवार से मुकाबला करना चाहा परंतु कृष्ण के उसे पकड़ने के झटके से ढाल तलवार दूर जा गिरे - --फिर कंस और प्रभु का युद्ध मंच पर व हवा में हुआ - फिर तेजी से प्रभु ने कंस को पकड़कर हवा में घुमाते हुए उसके केश पकड़ करके उसे मंच से नीचे फेंक दिया और फिर जगत का भार लेकर उस कंस पर कूद गए -- फिर श्री कृष्ण ने मरे हुए भोजराज कंस के शव को वहां की भूमि पर घसीटा ।

         🍎 महाबली राजा कंस को मारा गया देखकर उसके आठ महाबली भाई

सुहुत ,सृष्टि ,न्यग्रोध ,तुष्टिमान ,राष्ट्रपालक ,सुनामा , कनक और शंक--, ने श्री कृष्ण और बलराम पर आक्रमण कर दिया - युद्ध मे प्रभु के हाथों उन सभी भी मृत्यु हुई और कंस सहित सभी की जीवन ज्योति श्री हरि में विलीन हो गयी -- तब कंस की दोनो रानियां #अस्ति और #प्राप्ति बिलखती हुई वहां आयी , प्रभु ने उन्हें समझाकर शांत किया और फिर यमुना किनारे कंस सहित सभी मामाओं की अंतिम क्रिया की ।


        🍓🌰 फिर दोनों भाइयों ने कारागार में जाकर सपने पिता माता वसुदेव , देवकी व कंस के पिता उग्रसेन को कैद से छुड़ाया और उनकी स्तुति की - नन्द बाबा व गोपो का यथोचित सत्कार किया - नन्द आदि व्रजवासी दोनो भाइयो द्वारा पूजित और सम्मानित होकर वृज वापस चले गए ।

 ****************** अपनी बात ***********

              कथा की आध्यात्मिक व्याख्या ---

     🎃 कंस अत्यंत विकट " #लोभ "और " #अभिमान " का प्रतीक है -- उसकी दोनो पत्नियां "अस्ति" माने जो कुछ है उसे #संजोकर रखना ----और , "प्राप्ति" माने जो नही है उसकी #प्राप्ति करने की #असीम #इच्छा और उसके लिए उचित #अनुचित सभी #प्रयास करना -- लोभ सभी पापो का जनक होता है -


     🎃🎆 प्रभु किसी के #अभिमान को सहन नही करते है इसलिए असीम बल रखने वाले , परंतु राज्य लोभ में अपने पिता तक को कैद करने वाले , दुराचारी , नवजात बालको के हत्यारे , असुरो के नायक कंस का वध करके उसे कृपापूरक साथियों सहित मुक्ति प्रदान करते है ।

 ****** क्रमश: ***** राम नाथ गुप्त **************

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