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श्री रामायण जी की कथाएँ , shri ramayan Ji ki katha 1

पोस्ट -( 1 ) श्री रामायण जी की कथायें --- स्तुति , तथा सोमदत्त ( सौदास ) ब्राह्मण के राक्षस बनने और उद्धार की कथा -- श्री राम चरित मानस बालकाण्ड तथा श्री बालमीक रामायण महात्म्य अध्याय 1 और 2
************** अपनी बात ~~
~ श्री गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस तथा महर्षि श्री बाल्मीक जी कृत श्री रामायण ~
दोनों महानतम पवित्र ग्रंथों के तुलनात्मक आधार पर मैने कुछ वर्षों पूर्व " श्री रामायण जी की कथाएँ " से ही धर्मिक लेखन प्रारम्भ किया था । श्री रामायण की यह श्रृंखला पुनः आप सभी की सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
********** स्तुति ********
जो सुमिरत सिधि होइ ,गन नायक करिबर बदन । करउ अनुग्रह सोई , बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥
मूक होइ बाचाल , पंगु चढ़ई गिरि बर गहन । जासु कृपाँ सो दयाल , द्रवहु सकल कलिमल दहन ॥
नील सरोरुह स्याम , तरुन अरुन बारिज नयन । करउ सो मम उर धाम , सदा छीर सागर सयन ॥
कुंदु इंदु सम देह , उमा रमन करुना अयन । जाहि दीन पर नेह , करउ कृपा मर्दन मयन ॥
बंदउँ गुरु पद कंज , कृपा सिंधु नर रूप हरि । महामोह तम पुंज , जासु बचन रबि कर निकर ॥
🍎 श्री विघ्न विनाशक मंगलमूर्ति सर्व सिद्धि दाता श्री गणेश जी , जगत पालक विष्णु भगवान , अवढर दानी महामृत्युंजय भगवान सदा शिव शंकर जी , श्री पवनसुत हनूमान जी तथा , परम पूज्य हृदय मंदिर में निवास करने वाले श्री गुरुदेव भगवान को साष्ट्राँग प्रणाम करते हुए - श्री रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीक जी और
💝 #सिद्ध_मन्त्र_रूपी_चौपाइयों_से_सुसज्जित "#श्री_राम_चरित_मानस 🎁 के प्रदाता -
श्री गोस्वामी सन्त तुलसीदास जी महाराज को सादर नमन करते हुए , आप सभी से निवेदन है कि हमे ; श्री " सीता राम " के पावन चरित्रों पर कुछ लिख सकने की शक्ति प्रदान करने का आशीर्वाद प्रदान की कृपा करें ।
🍎 मन में राम , तन में राम - श्वास श्वास में राम है , जी हां हम सनातन धर्मियों के जन्म से लेकर अंतिम मृत्यु के बाद तक " राम मय " ही हम सबका जीवन है । उन्ही उत्पत्ति , पालन और प्रलय करने वाले परमात्मा श्री राम को हमारा सादर नमन है । वे सभी अमंगलों को दूरकर मंगलमय जीवन प्रदान करे ।
💝 मंगल भवन अमंगल हारी । द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी ।। 💝और
🎁 बुद्धि हीन तनु जानि के , सुमिरौं पवन कुमार । बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार ।।🎁
🌋 ऋषियों ने श्री सूत जी से पूछा --" भगवन ! संसार मे बंधे हुए जीवों के दु:ख बहुत है । इस संसार बन्धन का उच्छेद करने वाला कौन है ? घोर कलयुग आने पर सदा पाप परायण रहने के कारण जिनका अन्तःकरण शुद्ध नही हो सकेगा , उन लोगों की मुक्ति कैसे होगी " ?
🍘 श्री सूत जी ने कहा --" मुनिवरों ! देवर्शि श्री नारद जी ने सनतकुमारों को जिस रामायण नामक महाकाव्य का गान सुनाया था , वह समस्त पापों का नाश , और दुष्ट ग्रहों की बाधा का निवारण करने वाला है । वह सम्पूर्ण वेदार्थों की सम्मति के अनुकूल है । यह काव्य अपने पाठक और श्रोताओं के लिए समस्त कल्याणमयी सिद्धियों को देने वाला है । इसलिए मुनिगणो ! आप लोग रामायण नामक उत्तम काव्य का श्रवण करें । रामायण
"आदि काव्य " है , यह स्वर्ग और मोक्ष देने वाला है । जो लोग भयँकर कलि काल मे श्री राम नाम का ही आश्रय लेते है , वे ही कृतार्थ होते है ।
💝 श्री सूत जी ने ,भगवान श्री विष्णु के भक्त और सदा ब्रम्ह के चिंतन में लगे रहने वाले आदि ऋषिगण , सनक सनन्दन सनत्कुमार और सनातन - और देवर्शि नारद के बीच हुए वार्तालाप को बताते हुए श्री सुदास ( सोमदत्त ) ब्राह्मण की कथा सुनाई जो गौतम ऋषी के श्राप से राक्षस हो गए थे तथा श्री रामायण की कथा सुनने से उनका उद्धार हुआ ।
☢ सतयुग में एक सोमदत्त ब्राह्मण थे जो सौदास के नाम से विख्यात थे । एक दिन वे शास्त्रोक्त विधि से , परमेश्वर शिव जी की आराधना में लगे हुए थे ,उसी समय उनके गुरु श्री गौतम मुनि आये परंतु सौदास ने निकट आये गुरु को भी उठकर प्रणाम नही किया । गौतम तो शांत बने रहे परंतु भगवान शंकर ने उनके द्वारा गुरु का अनादर किये जाने के कारण उन्हें राक्षस योनि में जाने का श्राप दे दिया ।
🚫 ब्राम्हण ने भगवान और गुरु गौतम जी से बहुत क्षमा मांगी तब गौतम जी ने इस राक्षस को मुक्ति का उपाय - कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष में 9 दिनों तक भक्ति भाव से श्री रामायण की कथा श्रवण करना बताया ।
🍎फिर सोमदत्त नर भक्षी राक्षस बनकर सभी को बहुत सताने लगा । एक बस्ती से दूसरी बस्ती के मानवों का भोजन करते हुए , उस राक्षस द्वारा यह पृथ्वी बहुत सी हड्डियों और लाल पीले शरीर वाले प्रेतों से परिपूर्ण हो अत्यंत भयँकर दिखने लगी ।
🚱🍅 एक बार कलिंग देश में जन्मे एक अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण गर्ग - कंधे पर गंगाजल लिए ,भगवान विश्वनाथ की स्तुति और "श्री राम नाम " का गान करते हुए उधर से निकले । उस राक्षस ने उन्हें पकड़ना चाहा मगर श्री राम नाम के प्रभाव के कारण वह उन्हें छू भी न सका । तब उसे पूर्व में कहे गुरु वचनों की स्मृति हो आयी । उसने उस गर्ग नामक ब्राह्मण से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में श्री रामायण को सुनाने की प्रार्थना की
🎈🍘 श्री गर्ग मुनि से श्री रामायण पाठ को सुनते ही उसका राक्षसत्व दूर हो गया और वह देवताओ के समान सुंदर , करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी ,और भगवान नारायण के समान कांतिवान हो गया और भगवान श्री हरि के धाम चला गया ।
🎈🍔 श्री नारद जी बोले --" श्री राम और रामायण नाम का स्मरण करने से ही मनुष्य करोड़ों महापातकों तथा समस्त पापों से मुक्त होकर परमगति को प्राप्त होता है ।"🍔
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