श्री शिव महापुराण पुष्प माला 1962


 पोस्ट --( 1962 )- श्री शिव महापुराण - पुष्प माला - 【 १६२ 】 - भगवती की महाविद्या - भ्रामरी देवी की कथा -- उमा संहिता - अध्याय 50 और 51 --

 ****************स्तुति ****श्री दुर्गा शप्तशती एकादश अध्याय श्लोक 52 से 55****

   भीमा देवाति विख्यातं तन्मे नाम भविष्यति । यदारुणाख़्यस्त्रे लोक्ये ,महाबाधां करिष्यति ।।

    तदाहं भ्रामरं रूपं कृत्वाअसंख्ये यष्ट पदम् । त्रैलोक्यस्य हितार्थाय वधिष्यामि महासुरम ।।

    भ्रामरीति च मां लोकास्तदा स्तोशष्यन्ति सर्वत:। इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति ।।

                     तदा तदावतीर्याहं करिष्याम्यरि संक्षयम् ।। ॐ ।।

     तब मेरा नाम भीमा देवी के रूप में विख्यात होगा । जब अरुण नामक दैत्य तीनों लोकों में भारी उपद्रव मचाएगा ।। तब मैं तीनों लोकों का हित करने के लिए 6 पैरों वाले असंख्य भ्रमरों का रूप धारण करके उस महादैत्य का वध करूंगी ।। उस समय सब लोग " भ्रामरी " के नाम से चारो ओर मेरी स्तुति करेंगे -इस प्रकार जब जब संसार मे दानवी बाधा उपस्थित होगी , तब तब अवतार लेकर मैं शत्रुओ का संहार करूंगी ।।

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      🍘 यह बहुत शिक्षाप्रद कथा है - असुर राज अरुण ने भ्रमित होकर गायत्री साधना छोड दी जिससे उसका विनाश हुआ ।  

      आज दुष्प्रचार और कुतर्को द्वारा हमारी श्रद्धा कम की जा रही है जिससे सावधानी बहुत जरूरी है

  

    🌋 श्री भ्रामरी देवी की कथा -श्री देवी भागवत कथा । पूर्व समय में महान पराक्रमी दैत्य अरुण ने ""गायत्री मन्त्र"" का जप करते हुए श्री ब्रम्हा जी की कठोर तपस्या की और किसी भी अस्त्र सस्त्र -स्त्री पुरुष -पशु -देव -दानव -किसी के भी हाथ से न मरने का वरदान प्राप्त किया और फिर अपने को अमर मानते हुए जगतवासियों पर भयानक अत्याचार किये तथा सभी देवताओं को भी जीत लिया था ~

      तब जगत के प्राणियों और देवताओ द्वारा आतृ भाव से प्रार्थना करने पर आकाशवाणी हुई -


     🚱 "देवताओं भगवती की उपासना करो और प्रयास करो कि दैत्य अरुण गायत्री का जाप छोड दे *

   ऐसा ही हुआ - देवताओं ने दैत्यराज अरुण के मन में * #भ्रम * उत्पन्न किया कि गायत्री उपासना देवताओं की उपासना पद्धति है ; दैत्यों की नही । तब भृमित हुए असुर राज अरुण ने गायत्री जाप बंद कर दिया । उधर देवताओं की प्रार्थना पर भगवती ने भ्रामरी रूप में दर्शन दिए और अपने दोनों हाथो में बंद असंख्य भ्रमर दैत्यों पर छोड दिए जिनके काटने से सभी दैत्य बिना अस्त्र शस्त्र के मारे गए ।

      🍎 इसके बाद उमा संहिता के अध्याय 51 में - भगवती के मन्दिर निर्माण , प्रतिमा स्थापन ,तथा पूजन का महात्म्य और इस उमा संहिता के श्रवण की महिमा का वर्णन है । नवरात्र व्रत का अनुष्ठान करके विराट के पुत्र राजा सुरथ ने दुश्मनों द्वारा छीने गए अपने राज्य को पुनः प्राप्त किया था । स्त्रियों को अपने सौभाग्य के लिए , और पुरुषों को भी विद्या , धन , एवं पुत्र प्राप्ति के लिए इस नवरात्रि व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए ।

    ******** अपनी बात ************ व्याख्या ********

     🎈 सफलता द्रढ निश्चय और #कठोर #साधना से मिलती है ~ कार्य में शंशय और भ्रम जब उत्पन्न हो जाता है तब हार और विनाश स्वाभाविक है -भ्रामरी देवी और भ्रमर -दूसरे शब्दों में*** #भ्रम_और_सँशय*** ही है । 

     🎈 #दुष्प्रचार और #कुतर्क भ्रम और शंशय पैदा करते है । भृमित होकर व्यक्ति अपने धार्मिक व सामाजिक कर्तव्यों से विमुख हो जाता है - नतीजा विनाश ।


     🎈 निरंतर श्री हरि में #अटूट #विश्वास व #रामकथा #श्रवण करने से #भृम मिट जाता है --


   🍎🌏 जासु कृपा अस भ्रम मिटि जाही । गिरजा सोई कृपाल रघुराई ।।

                 राम कथा सुन्दर करतारी । सँशय बिहंग उडा़वनहारी ।।

     श्री हरि या भगवती #जगदम्बा हर समय मुसीबत आने पर हमारे अंतर #मन मे #अवतार लेकर हमें समस्याओ से मुक्ति पाने की विधि बताकर #प्रेरणा देती रहती है । आवश्यकता केवल यही है कि हम #भ्रमित न हो और भगवती या अपने आराध्य देवता में #अडिग #विश्वास बनाये रक्खे ।

 ***** शेष अगली पोस्ट में ******** राम नाथ गुप्ता कन्नौज ******

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