श्री शिव महापुराण पुष्प माला 1961


 पोस्ट --( 1961 ) श्री शिव महापुराण ~ पुष्प माला ~ 【 १६१ 】-- दस महाविद्याओं की उत्पत्ति -- जगदम्बा भगवती के ~ दुर्गा ,शताक्षी और शाकाम्भरी और भ्रामरी नामो के पड़ने का कारण - उमा संहिता अध्याय~50

      🍎 शत शत नेत्रो से बरसाया , नौ दिन तक अविरल अति जल ।

            भूखे जीवों के हित दिए ,अमित तृण ,अन्न ,शाक शुचि फल ।।

             मुनिजनों ने श्री सूत जी से पूछा कि राजा हरिश्चन्द्र हमेशा भगवती के शाकाम्भरी स्वरूप की आराधना किया करते थे , वे कल्याण रूपिणी भगवती शताक्षी कैसे हुईं -- तब श्री सूत जी ने बताया -

    🍎 प्राचीन काल मे हिरण्याक्ष के वंश में दानव राज रुरु का पुत्र भयंकर आकृति वाला "#दुर्गम" नाम का दैत्य हुआ था -- उसने विचार किया कि देवताओ का बल " #वेद " है -- वेद के न रहने पर देवता भी नहीं रहेंगे अतः पहले वेद और सनातन संस्कृति को ही नष्ट कर देना चाहिए -- इसलिये दुर्गम ने हिमालय पर्वत पर जाकर श्री बृम्हा जी की तपस्या की और वरदान मांगा -

     🍟 " सुरेश्वर ! मुझे संपूर्ण वेदों को देने की कृपा करें ; सब वेद मेरे पास आ जाये तथा मुझे वह बल दीजिये जिससे मै समस्त देवताओ को परास्त कर सकूं " श्री ब्रम्हा जी ने एवमस्तु कह कर उसे मुंहमांगा वरदान दे दिया ।

      🌏 उस समय के बाद से ब्राह्मणों को समस्त वेद पुराण विस्मृत हो गए --स्नान , सन्ध्या ,नित्य होम ,श्राद्ध,यज्ञ और जप आदि सभी वैदिक क्रियाएं नष्ट हो गईं । देवताओ को हवि का भाग मिलना बंद हो गया , वे निर्बल हो गए । दैत्य दुर्गम ने आसानी से सारे देवलोक पर अधिकार कर लिया । देवता भागकर पहाड़ों की कंदराओं में छिप गए -- वर्षा बिल्कुल बन्द हो गयी । अन्न आदि का अकाल हो गया । तमाम पशुओं और मनुष्यों की अकाल मृत्यु होना शुरू ही गयी -- तब ब्राह्मण लोगो ने ऋषियों मुनियों और देवताओ के साथ मिलकर हिमालय पर्वत पर जाकर कल्याण स्वरूपणी भगवती जगदम्बा की ,समाधी ,ध्यान और पूजा के द्वारा आराधना की व कातर भावसे स्तुति की -  


      🎆 इस प्रकार प्रार्थना करने पर भगवती पार्वती जो " #भुवनेश्वरी' और " #महेश्वरी "के नाम से प्रख्यात है उन्होंने कृपा पूर्वक अपना अनन्त नेत्रों वाला स्वरूप दिखाया । देवी के हाथों में बाण, कमल के पुष्प , पल्लव, और मूल सुशोभित थे -- जिनसे भूख, प्यास ,और बुढापा दूर हो जाते है , ऐसे शाक आदि खाद्य पदार्थो को उन्होंने अपने हाथों में धारण कर रक्खा था , अनन्त रस वाले फल भी उनके हाथों में थे --

      🌰 ऐसी झांकी उपस्थित करने के पश्चात , जगत् की रक्षा में तत्पर रहने वाली करुण ह्रदया भगवती , अपनी अनन्त आंखों से सहस्त्रो #जल की धाराएं गिराने लगी । इससे सूखे से त्रस्त जगत् को नवजीवन मिला सभी प्रसन्न और सुखी हो गए । यही भगवती के कल्याणकारी रूप को ""#शताक्षी"" के नाम से जाना गया।

       🎃 फिर भगवती शिवा ने अनेक प्रकार के शाक और स्वादिष्ट फल ,और विविध प्रकार के अन्न ,सभी को प्रदान किये । पशुओं के खाने के योग्य कोमल और अनेक रसों से सम्पन्न नवीन तण भी दिए -- इसी दिन से भगवती का नाम "" #शाकम्भरी "" भी हो गया।


       🍎 जगत् में कोलाहल सुनकर दुर्गम दैत्य ने सेना के साथ आकर वहां उपस्थित देवी जी , देवताओ और मानवो को अपने घेरे मे ले लिया -- देवताओ सहित सभी घबड़ा कर त्राहि त्राहि पुकार उठे । तब भगवती शिवा ने उपस्थित देवताओं , ब्राह्मणों , ऋषियों आदि की रक्षा करने के लिए ,उनके चारो ओर अपना तेजोमय चक्र खड़ा कर दिया , और वे स्वयम बाहर निकल गयी --

        🍎 तत्पश्चात देवी के विग्रह से , कालिका , ,भैरवी , त्रिपुर सुंदरी , छिन्न मस्ता आदि 32 उग्र शक्तियां प्रकट हो गयी । दैत्य #दुर्गम के साथ भयंकर युद्ध हुआ , अन्त मे वह दुर्गम दैत्य , देवी के बाणों से आहत होकर , प्राणों से हाथ धो कर गिर पड़ा , और उसके शरीर से निकला तेज भगवती के स्वरूप में समा गया ।

      🌏 सभी देवताओ ने भगवती दुर्गम दैत्य का संहार करने वाली "" #दुर्गा "" जी की स्तुति की -तभी से भगवती "" दुर्गा " नाम से प्रसिद्ध हुयी --

    श्री सूत जी ने मुनियों से कहा --

    🌋 " भगवती परा शक्ति की कृपा से सभी कुछ प्राप्त किया जा सकता है --सँसार में जो भी विभूतियुक्त , ऐश्वर्य युक्त ,कान्तियुक्त ,और शक्तियुक्त पदार्थ है ,उसको तुम भगवती के #तेज के अंश की अभिव्यक्ति ही समझो -- 

     🍎🌋 जो सभी देवताओ से परे वस्तु है उसे वेद में " अव्याकृत "" कहते है ; जिसमे सारा जगत् सूत्र में मणियों के समान ओतप्रोत है ,उसी"" अव्याकृत शक्ति"" का नाम ही "" भगवती भुवनेश्वरी"" है -- अतः तुम उन्ही परमा शक्ति की उपासना करो ""

       भगवती के भ्रामरी रूप में प्राकट्य की कथा --- अगली पोस्ट में ---

 *********** अपनी बात **********व्याख्या **********

     🌏१-- विदुषी गार्गी ने ऋषि याज्ञवल्क से पूछा था " ब्रम्ह " किसमें व्याप्त है -- याज्ञवल्क्य का उत्तर था -

 " ब्रम्ह आकाश में व्याप्त है "-- ब्रम्ह और भगवती #एकाकार है - इसलिए भगवती के द्वारा सहस्त्रो आंखों से जल वर्षा -- के माने भगवती की कृपा से आकाश से बादलो द्वारा जल वृष्टि भी हो सकती है -- 

     🍅 #भगवती_स्वरूपा_पृथ्वी ही सबको धारण करती है ,अन्न, जल , फल मूल सभी खाद्य पथार्थ ,सभी वस्तुएं प्रदान करती है-  

      🚫🍎 विचार कीजिये - यही जगत का पृथ्वी और आकाश सहित विशाल स्वरूप ही भगवती का साकार शताक्षी और शाकम्भरी - रूप ही तो है ।🚫🍎


     🌏 २-- किसी देश को पूर्ण रूपेण परास्त करके मानसिक रूप से भी गुलाम बनाने का तरीका , उसकी धर्म संस्क्रति , भाषा के आधारभूत ग्रंथो से उस देश के वासियो को विलग करना है - जो कार्य दुर्गम दैत्य ने किया था , वही कार्य अंग्रेजो ने #मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लागू करके किया - अंग्रेजो के समय से भी विकराल स्थिति आज पैदा हो गयी है - 

    🍎अब इंग्लिश मीडियम से शिक्षा शुरू करने वाले बच्चे , भारतीय #संस्क्रति को भूल चुके है --देश की रक्षा के लिए जरूरी है कि #मातृ_शक्ति , फिर भगवती दुर्गा के रूप में आकर देश की संस्क्रति को नष्ट करने के षडयंत्रो को विफल करे --और देश की भावी पीढ़ी को मातृभाषा ,और देव भाषा संस्क्रत पढ़ने को प्रेरित करे ।


        🌏 जागो जागो भारत की मातृ शक्ति जागो 🌏

      ******* शेष अगली पोस्ट में ************** राम नाथ गुप्त कन्नौज ********

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