श्री शिव महापुराण पुष्प माला 1958


 पोस्ट --( 1958 ) - श्री शिव महापुराण - पुष्प माला ~ 【 १५८ 】~ पिछली पोस्ट्स के कथानक की देश की आज की परिस्थितियों ; और साधकों के संदर्भ में व्याख्या -- #कृपया_इस_पोस्ट_को_अवश्य_पढ़ें --  

     🎃 महादेवी भगवती सिंहवाहिनी अम्बिका जी के द्वारा दैत्यराज शुम्भ ,निशुम्भ ,चंड मुण्ड ,धूम्रर्लोचन , रक्क्तबीज के संहार के कथा की व्याख्या -

*********स्तुति *** श्री देवी शप्तशती ***********

     विश्वेश्वरि त्वम परिपासि विश्वम । विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम ।।

     विश्वेश वन्द्या भवती भवन्ति । विश्वाशरया ये त्वपि भक्तिनम्रा ।।

   **************** अपनी बात ********

    #आइए_हम_सब_अपनी_साधना_का_पुनर्वालोकन_भी_करे ---

       शुम्भ , चंड , मुण्ड धूम्रलोचन रक्तबीज आदि शब्दो पर ध्यान दीजिए -

    🎈 महादेव भगवान शिव * #शम्भू *से कितना मिलताऊ शब्द दैत्यराज का नाम ** #शुम्भ **-है ।

    🎈 "" #शम्भू "" परम पिता महादेव है ,जो संसार के हित के लिए #विष भी पीते है । भक्तों और देश -

वासियो को #अमृतमय #वरदान देते है , सारी दुनिया के स्वामी होते हुए भी उनके पास कोई वैभव नही है ,वे पूर्ण त्यागमय जीवन जीते है । इसीलिये - सारे विश्व की आधार शक्ति , " #महामाया " शक्ति , उनकी अर्धांगिनी #सेविका है ।


    🎈 दूसरी ओर मिलते हुए नाम रखने वाला उस समय जगत का स्वामी बन चुका #दैत्यराज " #शुम्भ ' है -जो संसार की समस्त सम्पत्तियों को अपने अधिकार में किये है । सभी सुंदर महिलाओ को जबरन हथियाने का आदी है -लूट ,हत्या ,अत्याचार जिसका धर्म व कर्म है , इसीलिए वही जगतजननी #महामाया_उसका_विनाश करती है ,-और चंड ,मुण्ड , और शुम्भ , निशुम्भ के #सिरों की #माला अपने गले मे पहनती हैं । 


    🎈 #धूम्रलोचन -( धूम्र माने धुंआ +लोचन माने आंख )- जिसकी आंखों पर सत्ता , शक्ति ,अभिमान , काम ,क्रोध, लोभ, का- धुएं -का पर्दा पड़ा हुआ है - उसे इसके अलावा कुछ नही दिखाई देता है ।


    🎈चंड मुण्ड - दूसरो को सताने और उनकी हत्या करने में माहिर आततायी ।


     🎈 #रक्क्तबीज - जिसके रक्त की बून्द जमीन पर गिरते ही दूसरा रक्क्तबीज निकल आता था -- #विनाशकारी_संस्क्रति_और_विचारधारा के व्यक्ति । जब तक उनकी #मूलशक्ति का संहार न हो तब तक ऐसे लोगो से मुक्ति सम्भव नही है । आज विश्व मे यही तो फैले हुए है - कितने भी मारो रोज उससे भी भयंकर तुरंत प्रगट हो जाते है -


     ~~~~~ देश के सम्बंध में कथा का महत्व ~~~~

    🎈 --सत्य - प्रेम - करुणा या कहे , सत्यम ,शिवम , सुंदरम --जगत के हित के लिए , विष को भी पीने वाले महादेव शम्भू की तरह -- बताने व दिखने वाले #नकली ( डुप्लीकेट ) -- कुछ राजनीतिक नेता और ---


    🎈 --धर्म मे भगवान के समान पूजित संतो बाबाओ में से कुछ पाखंडी बाबा लोग- और----- , 


    🎈 -- जीवन रक्षा का दायित्व लिए जमीन पर के भगवान कहे जाने वाले कुछ भृष्ट बन चुके डाक्टर ,

            वैद्य तथा --🎈 कुछ भृष्ट कर्मचारी गण व कुछ बेईमान व्यापारी तथा कुछ शिक्षण संस्थायें ---


   🌏 🎈-- यह सब , कब , राजमद ,सत्तामद , धन मद से ग्रसित होकर --#शम्भू से #शुम्भ -- के रूप में #परिवर्तित हो जाते है, ,पता ही नही चलता । तब समाज इनके स्वार्थ व अत्याचारों से त्राहि त्राहि कर उठता है।


    🎈तब पुकारने पर #महादेवी किसी भी रूप में , अवतरित होती है । 


    🌏🎈इन परिस्थितियो में सबसे जरूरी है ,सभी परोपकारी दैवीय शक्तिओ की #सामूहिक_एकत्रित_शक्ति से ही --इन #डुप्लीकेट सभी को अपने नाम से धोखा देने वाले-- दैत्यराज शुम्भ ,उसके भाई निशुम्भ , सेनापति - चण्ड , मुण्ड और ध्रूमरलोचन का वध सम्भव हो सकता है--

    🎈-- रक्क्तबीज तो असुरो को पैदा करने वाली #विचारधारा ,उनके निर्माण स्थल #ट्रैनिंग #कैम्पस है - ओसामा के बाद उससे भी खतरनाक बगदादी जैसे अनेकानेक आते रहेंगे । विचारधारा और निर्माण स्थल 

की समाप्ति ही #चामुंडी_कालीदेवी_द्वारा_रक्क्तबीज_का_वध है --


         ~~~~~ साधक के सम्बंध में कथा का महत्व ~~~~~

    🌏🎈--- महादेव शम्भू को प्राप्त करने की साधना में जाने कब ~ धन ,वैभव, सिद्धियो और शक्तियों के मिल जाने पर साधक का लक्षय * शम्भू * से भटकर--* शुम्भ* की ओर हो जाता है और वासना जनित असीमित #कामनाये , #रक्क्तबीज का रूप ले लेती है ।


     🌏🎈तब स्मृति में मौजूद धर्म की नीतियों व धार्मिक ग्रंथों के पाठ तथा संतो के सानिध्य से , दैवीय शक्तियों को जाग्रत करके ,साधक , - आन्तरिक बाधक शुम्भ , निशुम्भ, चंड , मुण्ड, धूम्रलोचन , और रक्क्तबीज का संहार कर सकता है ।


   🍎 ~~ और हम जैसे साधारणा जन ♀♂ जो विषयो से ग्रसित है -- जगतजननी सिंहवाहिनी माँ जिनके दुर्गा , सरस्वती , अम्बिका , लक्ष्मी , काली , जैसे अनगिनित रूप है , की कथाओं का गुणगान करके , माता के भजनों को गाकर ,, उनका भक्तिभाव से पूजन करके , उनसे सभी दुखः हरने और सर्व सुखों को प्रदान करने की #प्रार्थना ही कर सकते है --ॐ नमश् चण्डिकाये -🌏

******** क्रमशः *************** राम नाथ गुप्त कन्नौज ****

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