श्री शिव महापुराण पुष्प माला 1957


 पोस्ट ( 1957 ) --श्री शिव महापुराण -- पुष्प माला-【 १५७ 】 -- देश की वर्तमान परिस्थिति में इन देवी जी की पौराणिक कथाओं से हम क्या शिक्षा लें ? ----

 ************ अपनी बात *******

       🌋--भगवती जगतजननी के द्वारा दैत्य रक्तबीज के वध की कथा ~श्री राम रावण युद्ध ~ और आज के समय में आतंकवादियो से चल रहे युद्ध में इस कथा का महत्त्व ~~~🌋

      🍎 चंण्ड मुंण्ड के वध के बाद जब दैत्यराज शुम्भ अपनी सम्पूर्ण सेना के साथ युद्ध करने आया तब ,भगवती अपने विभिन्न स्वरूपो में प्रकट होकर युद्ध करने लगी ,दैत्यों की हार होते देखकर ~ रक्तबीज नामक दैत्य युद्ध मैदान में आया ~उसकी विशेषता थी कि देवियो के प्रहार से उसकी जमीन पर गिरती हर एक खून की बूँद से एक नया ,असली के समान शक्तिशाली रक्तबीज और पैदा हो जाता था ~फलस्वरूप वहाँ हजारो अत्यंत शक्तिशाली रक्तबीज दैत्य उत्पन्न हो गए ~त्राहि त्राहि मच गयी ~तब माँ काली ने अपना विशाल मुख फैलाकर , रक्तबीज के गिरते खून के बूंदों को जमीन पर न गिरने देकर स्वयं पी लिया और जिससे कोई नया रक्तबीज असुर पैदा न हो सका ~और रक्तबीज तथा सभी साथियो सहित दैत्यराज शुम्भ मारा गया ।


     🎆 🌹 धर्म ,अधर्म और सत्य असत्य के सभी युद्धों में जब तक मूल कारण , #रक्तबीज का वध नही होता , पूर्ण सफलता असंभव होती है ~ श्री राम जी के समय में भी ~पहले श्री राम ने ताड़का आदि दैत्यों ,फिर दंडकारण्य में रहने वाले खर दूषण व त्रिशिरा को सेना सहित मारा ,सेतु बांधते समय अपने अग्नि बाण से संभवता अरब अफ्रीका के सभी दैत्यों का समूल वध किया~ फिर लंका के रावण के वंश का नाश किया ~वहां भी माया से उत्पन्न हजारो रावणो का और अंत में जब सर काटते ही रावण का दूसरा सर निकल आता था --

    👌 ~अरे यही तो रक्तबीज का प्रभाव था ~तब उसकी नाभि में बाण मारकर अमृत सुखाया ~

    🏮 इस अमृत रुपी रक्तबीज के समाप्त होने के बाद ही रावण मर सका ~विचार कीजिए --


      🌋 यह #अमृतकुण्ड ~दानवीय संस्कृति से #दूषित #विचारधारा ही तो थी !! ~~🎆


      फिर पाताल में बसने वाले अहि रावण का श्री हनूमान जी द्वारा वध और ~

       🏮भविष्य में भी रक्तबीज पैदा न हो सके , इसकी व्यवस्था तो श्री हनूमान जी ने ही की थी ~लंका जलाने के बाद वापस आते समय ~~~

       🎄चलत महाधुनि गर्जेसि भारी । गर्भ स्रवहिं सुनि निश्चर नारी ।। (सुंदर कांड दोहा 27 चौपाई 1 )

 युद्ध में सभी निशाचरों का नाश हुआ ~

        🎄""रहा न कोउ कुल रोवनहारा "" और श्री हनुमान जी ने लंका से चलते समय भीषण गर्जना की थी ~ जिससे सभी निशाचरों की नारियो का #गर्भपात हो गया ~ भविष्य में निशाचरों का #जन्म ही नही हो सका ~यही राम राज्य की सफलता का राज है ---

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       🍘 आज सारा विश्व खासकर हमारा देश आतंकवाद से पीडित है ~पहले ओसामा मुख्य था ,फिर उससे भी खतरनाक ,बगदादी माना जाता था , देश और विदेशों की बहुत लंबी लिस्ट है हमेशा एक मुख्य आतंकवादी के समाप्त होते ही नया उपस्थित ~~

      🍘 ~यही हाल अपने देश का भी है ~रक्तबीज की तरह उनकी लगातार वृद्धि होती रहती है ,अब निरंतर चिंतनीय स्थिति होती जा रही है ~अब तो कई यूनिवर्सिटीज में भी देशद्रोही कार्य और इन सब पर लाचार सरकार ~काश उपर्युक्त देवी कथाओ से कुछ शिक्षा ली होती ।


  🏮 1~ कथा अनुसार ,भगवती जगदम्बा महादेवी जी ,सभी देवताओ की सम्मिलित शक्तिओ का रूप है 

,तथा सभी देवताओ के अस्त्रों से सुसज्जित है और इस #एकत्रित शक्ति से ही दानवो का संहार संभव हुआ ~

   🏮 विचार कीजिए ,क्या कभी ,विश्व में या अपने देश में सभी सम्मिलित शक्तिओ से एक साथ ,देश द्रोहियो पर प्रहार हुआ हो ~निश्चित रूप से नही ,यह असफलता का प्रमुख कारण है !


    🍎 2~ रक्तबीज के जमीन पर गिरते बूंदों की तरह , निरंतर नए आतंकवादियो की उत्पत्ति~जब श्री राम द्वारा रावण के सर काटते ही उसके नए सर निकल आते थे ,तब विभीषण ने कहा था~

    "नाभि कुण्ड पियूष बस याके । नाथ जिअत रावण बल ताके ,"

   और श्री राम द्वारा रावण की नाभि में बाण लगते ही अमृत कुण्ड सूखते ही रावण मर गया ,*


**** 🍎🌏 #आतंकवाद का भी #अमृत कुण्ड कंही मौजूद है ,बिना उसे #सुखाये ,केवल रोजाना छद्म युद्ध में कुछ आतंकवादियो के मारे जाने से , विजय संभव ही नही हैं ।

          🏮🏮~कालिका चामुंडा माँ के समान ,रक्तबीज को नष्ट ही करना ही होगा ।


     🌋 दुःख है ,पौराणिक कथाओ को केवल कथा मानकर , उपेक्षित कर दिया जाता है , उनसे कोई सीख नही ली जाती है~काश इन कथाओ को शिक्षा पुस्तको में जगह मिलती ~~🌋

  *****क्रमशः **************** राम नाथ गुप्त कन्नौज *******

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