श्री रामायण जी की कथाएँ 150,श्री राम जल समाधि


 पोस्ट ~( 150 ) ~ श्री रामायण जी की कथाएँ ~ समापन पोस्ट ~ महाप्रयाण यात्रा ~ प्रजा सहित भगवान श्री राम जी का निज धाम साकेत गमन ~ भाग 2 ~ पिछली पोस्ट से आगे ~

  🌋 फिर श्री विभीषण से राम जी बोले " करेहु कल्प भर राज तुम । मम सुमिरेहु मन मांहि " -" 

  महापराक्रमी राक्षस राज विभीषण ! जब तक संसार की प्रजा जीवन धारण करेगी तब तक तुम भी जीवन धारण करोगे " और फिर विभीषन को आज्ञा दी --

  🎈 " हमारे इच्छवाकु कुल के देवता भगवान जगन्नाथ श्री विष्णु है तुम भी उनकी आराधना करते रहना "

    🎈 फिर श्री राम जी ने हनूमान जी से कहा -"हनूमान ! तुमने दीर्घकाल तक जीवित रहने का निश्चय किया है ,अपनी इस प्रतिज्ञा को व्यर्थ न करो , जब तक संसार मे मेरी कथाओं का प्रचार रहेगा ,तब तक तुम भी मेरी आज्ञा का पालन करते हुए प्रसन्नता पूर्वक विचरते रहो --


    🎈 इसके बाद श्री राम जी ने ब्रम्हा जी के बूढ़े पुत्र , जाम्बवंत , मयंद और द्विवुद से कहा --

    -" तुम तीनो व्यक्ति तब तक जीवित रहो जब तक कलयुग न आ जाये ( द्वापर के अंत तक )" 

   ----फिर रघुनाथ जी ने शेष सभी वानरों (जो सभी देवता ही अपने अंश से वानर रूप में प्रगट हुए थे ) से कहा -- " तथास्तु तुम लोग भी मेरे साथ चलो "--

       🎃 फिर अगली सुबह , #महाप्रयाण यात्रा पर श्री राम जी की आज्ञा से यज्ञ का #छत्र लेकर , #पुरोहित ,ब्राम्हणों के साथ वेदों का पाठ करते हुए ,आगे आगे चले ----- 

        श्री राम के दाहिने कमल पुष्प हाथ मे लिए हुए श्री देवी जी और ------ 

        बाएं तरफ भू देवी विराजमान थी तथा -----

        🎈 आगे आगे उनकी " संहार शक्ति " चल रही थी --

         अनेको महात्मा ,ऋषि और ब्राह्मण भी , स्वर्ग जाने की इच्छा से उनके साथ चल रहे थे -- 

        श्री भरत व शत्रुघ्न के साथ अन्तःपुर की स्त्रियां , बालक वृद्ध आदि चल रहे थे - 

         🎈बहुत से अदृश्य प्राणी और "तिर्यक योनि" वाले छोटे जीव भी उनमे शामिल थे -    


         अयोध्या से डेढ़ योजन दूर जाकर पुण्य सलिला #सरजू के तट पर सभी पँहुचे --वहां श्री ब्रम्हा जी अनेको देवताओ के साथ आ चुके थे - और #करोड़ो #दिव्य #विमान भी वहां मौजूद थे , जिससे आकाशमण्डल दिव्य तेज से प्रकाशित हो रहा था -उस समय सैकड़ो प्रकार के बाजे बजने लगे ,गन्धर्वो और अप्सराओ से वह स्थान भर गया ।

        जैसे ही रघुनाथ जी , सरयू जल में प्रवेश करने लगे श्री ब्रम्हा जी बोले -

      🎈🎈" विष्णुस्वरुप रघुनन्दन ! आइये आपका कल्याण हो ! हमारा बड़ा सौभाग्य है जो आप अपने #परमधाम को पधार रहे है --अब आप अपने देव स्वरूप भाइयो के साथ अपने #स्वरूप #भूतलोक में प्रवेश करें --आप अचिन्त्य ,अविनाशी तथा जरा आदि अवस्थाओं से रहित #परमब्रम्ह है अतः आप अपने जिस रूप में चाहें , उसी में प्रवेश करें --

         🍎 पितामह ब्रम्हा जी की बात सुनकर श्री राम ने विचार करके ,भाइयो के साथ 

#शरीर #सहित अपने #वैष्णव #तेज में प्रवेश किया । सभी देवताओ , गन्धर्वो ,अप्सराओ ने प्रभु की स्तुति की--

       🎈 फिर प्रभु ने ब्रम्हा जी से कहा कि यह सब लोगों का समुदाय जो मेरे पीछे आया है ,यह सब #यशश्वी और मेरे #भक्त है अतः यह सब मेरे अनुगमन के पात्र है -- तब ब्रम्हा जी बोले -- यहां आए हुए , ये सभी लोग #सन्तानक " नामक लोको ( जो ब्रम्हा जी के लोक के निकट साकेत धाम का ही एक भाग है ) में जाएंगे --


        🍱 यह सुनकर वहां आये हुए प्राणियों ने जैसे ही जल में डुबकी लगाई या जल से भीगे वे दिव्य रूप रखकर दिव्य विमानों में बैठकर परम् धाम को चले गए --

       🍘 श्री राम जी के सम्पूर्ण प्रजा सहित परम् धाम को पधारने के बाद रमणीय अयोध्यापुरी भी बहुत समय तक सुनी पड़ी रही -- बाद में राजा ऋषभ देव के समय अयोध्या पुनः आबाद हुई ।

        🍎 श्री राघवेंद्र जी का यह चरित्र सदा धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो को देने वाला है 

        अंत मे प्रभु से यही निवेदन है --

   श्रवण सुजस सुनि आयउँ ,प्रभु भंजन भव भीर । त्राहि त्राहि आरति हरन ,शरण सुखद रघुबीर ।।

   बार बार वर माँगउ , हरषि देंहु श्री रंग । पद सरोज अनपायनी भगति सदा सत्संग ।।

   धर्म न अर्थ न काम रुचि , गति न चहउँ निर्वाण । जन्म जन्म रति राम पद ,यह वरदान न आन ।।

         ******************* राम नाथ गुप्त कन्नौज **************

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