श्री रामायण जी की कथाएँ 149


 पोस्ट --( 149 ) श्री रामायण जी की कथाएँ - भगवान श्री राम जी का भरत , शत्रुघ्न ,अयोध्या के सभी नागरिकों , तिर्यक योनि तक के जीवों सहित निज धाम गमन - अपने वैष्णव तेज में प्रवेश --- भाग 1 ~

   श्री बाल्मीक रामायण - उत्तरकाण्ड - सर्ग 107 से इस कथा का वर्णन है -- श्री गोस्वामी तुलसीदास की राम चरित मानस में श्री शंकर जी से माता पार्वती का प्रश्न तो है परंतु उत्तर नही है --

         🎈 बहुरि कहउ कृपायतन । कीन्ह जो अचरज राम ।। (भाग २ )

                प्रजा सहित रघुबंशमनि । किमि गवने निज धाम ।।


       🍘 श्री लक्ष्मण जी के द्वारा योग साधना करके #अदृश्य होने व #सशरीर स्वर्ग गमन करने के पश्चात ,श्री राम जी ने पुरोहितों , मंत्रियो और महाजनों आदि प्रमुख व्यक्तियो को बुलवाया और बोले --


      " आज मैं अयोध्या के राजा के पद पर भरत का राज्याभिषेक करके वन को जाकर वहां से श्री लक्ष्मण के पथ का अनुसरण करूंगा "

       श्री राम जी की बात सुनकर प्रजावर्ग के लोग धरती पर माथा टेक कर प्राणहीन से व्याकुल हो गए -- भरत ने भी बिना राम के राजा बनने से इनकार कर दिया और कहा - 


        🎈" मैं सत्य की शपथ खाकर कहता हूँ कि मुझे आपके बिना स्वर्ग का भी राज्य नही चाहिए - मैं भी आपका अनुगमन करूंगा --अब आप कुश और लव का , उत्तर और दक्षिणी कौशल देश पर राज्याभिषेक करें --और तुरन्त ही शत्रुघ्न को भी हमारे महाप्रयाण की सूचना दी जावे "--


     भरत की बात सुनकर मुनि वशिष्ठ ने पृथ्वी पर पड़े हुए प्रजाजनों की ओर इंगित कर श्री राम जी से उनकी इच्छा पूर्ण करने को कहा --श्री राम के प्रेम में डूबे हुए प्रजाजन बोले---


     " रघुनन्दन ! आप जहां जहां जाएंगे आपके पीछे - पीछे स्त्री पुत्रो सहित हम भी वहीं चलेंगे " । 

      🎃 पुर वासियो का असीम प्रेम व भक्ति को देखकर श्री राम ने तथास्तु कह कर उनका अनुमोदन किया --


        श्री रघुनाथ जी ने #दक्षिण #कौशल के राजा के पद पर #कुश को और #उत्तर #कौशल के पद पर #लव का #राज्याभिषेक सम्पन्न करवा दिया --और उन्हें अपनी अपनी राजधानी में भेज दिया -- कुश के लिए विन्ध्य पर्वत के किनारे " #कुशावती "और लव के लिए "#श्रावस्ती" नामक अति समृद्ध नगरों का निर्माण उनकी राजधानी के रूप में किया गया था --


       शत्रुघन ने दूतों से समाचार पाकर अपने " कांचन "नामक पुरोहित को बुलाकर अपने दोनों पुत्रों --" #सुबाहु " को #मथुरा का राज्य और दूसरे पुत्र " #शत्रुघाती " को #विदिशा के राजा के पदों पर अभिषिक्त किया और तुरत अयोध्या आकर श्री राम जी की सेवा में उपस्थित होकर , उनके ही साथ चलने का निश्चय बताया --


  🎈 उनकी यह बात समाप्त होते ही इच्छानुसार रूप धारण करने वाले वानर ,रीछ और राक्षसों का बहुत बड़ा समुदाय वहां आ पंहुचा --वानर राज #सुग्रीव ने नम्रता से निवेदन किया कि मैं किष्किंधा में #अंगद का राज्याभिषेक करके आपके साथ चलने के लिए आया हूँ , श्री राम ने उनकी बात स्वीकार की --

*** क्रमशः ********* राम नाथ गुप्त कन्नौज ****

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