श्री रामायण जी की कथाएँ 148


 पोस्ट --( 148 )-- श्री रामायण जी की कथायें - महाकाल का भगवान श्री राम के पास आना और श्री लक्ष्मण का सशरीर स्वर्ग गमन --

श्री बाल्मीक रामायण - उत्तर कांड - सर्ग 105 से 106 तक --

     जगत जननी माँ पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से श्री राम जी की अमर कथा के विभिन्न विषयों के साथ ही एक अंतिम आश्चर्य जनक घटना , जो न भूतों न ही भविष्यति , के बारे में भी जानना चाहा था --

      ( श्री राम चरित मानस -- बाल कांड - दोहा --११०--)

        बहुरि कहउ करुनायतन , कीन्ह जो अचरज राम ।

        प्रजा सहित रघुबंशमनि , किमि गवने निज धाम ।। 

     🎈 जी हां ,इसे #अचरज ही कहेंगे , अपनी मानव लीला के समापन पर श्री राम ने , सम्पूर्ण अयोध्या की प्रजा के साथ , अपने बैकुंठ धाम को प्रस्थान किया --


       🌋 गजब की जीवन गाथा है मुक्तिदाता प्रभु श्री राम जी की -- भक्त तो प्रभु चिंतन में अपने को लय लीन करके उन्हें प्राप्त कर पाते है ,अत्यंत पापी निशाचर भी वैर भाव से सुमिरन कर मुक्त हो गए -- और प्रभु की अयोध्यापुरी के निवासियो को भी उनके साथ परम धाम बैकुंठ जाने का अवसर मिला--

   " ऐसो को दयालु रघुराई "

        🍎 श्री बाल्मीक रामायण के अनुसार , उचित समय पर , एक दिन साक्षात काल तपस्वी के भेष में ,अपने तेज से प्रज्वलित होते हुए ,और मानो सभी को अपनी तेज किरणों से दग्ध करते हुए से , राजभवन के द्वार पर आया --उसने श्री लक्ष्मण जी से निवेदन किया -


      " मैं अमित तेजस्वी महर्षि #अतिबल का दूत हूँ - श्री राम जी से मिलने आया हूँ "---- 


     प्रभु की आज्ञा पाकर उसने श्री राम के पास जाकर कहा -

         🎈" रघुनन्दन आपका अभ्युदय हो ! मैं आपसे एकांत में बात करना चाहता हूँ -"श्री राम ने श्री लक्ष्मण जी से कहा -कि जब तक वे मुनि से बात कर रहे है कोई भी वहां न आये -आगन्तुक की इच्छानुसार श्री राम ने यह भी आदेश दिया कि , आज्ञा के उलंघन करने वाले को #मृत्यु दंड मिलेगा ।


        आगंतुक मुनि वेश में #काल श्री राम से बोला - 

     🍘 ""भगवन ! मैं पितामह ब्रम्हा जी की आज्ञा से आया हूँ -आपकी माया द्वारा उत्पन्न मैं आपका पुत्र , #सर्व #संहारकारी #काल हूँ --आप ही प्राणियों की रक्षा के लिए अपरिमेय #सनातन पुरुष जगतपालक विष्णु रूप में प्रगट है -- जगदीश्वर ! जब रावण के द्वारा प्रजा का विनाश होने लगा था , उस समय आपने निशाचरों के वध करने की इच्छा से मनुष्य शरीर धारण करने का निश्चय किया था "--

     🎈""और आपने स्वयम ही 11000 वर्षो तक मृत्यु लोक में निवास करने की अवधि निश्चित की थी --इस अवतार में आपने जो अवधि निश्चित की थी वह पूरी हो गयी है --अतः अब आपके लिए हम लोगों के पास आने का समय हो गया है --यदि आप यहां और रुकना चाहे तो आज्ञा दीजिए --आपके विष्णुदेव के स्वधाम में प्रतिष्ठित होने पर सम्पूर्ण देवता सनाथ और निश्चिंत हो जाएंगे"" --


       महा सन्हारकारी काल से पितामह का संदेश सुनकर श्री राम ने प्रसन्न होकर कहा -

        🎈-""तीनो लोको के प्रयोजन की सिद्धि के लिए ही मेरा यह अवतार हुआ था --वह उद्देश्य पूरा हो गया है -- मैने तुम्हारा चिंतन किया था इसीलिए तुम यहाँ आये हों--अब मैं जहां से आया था वही चलूँगा ।""


       🎈🎄अब सभी को अवतार की समाप्ति पर निज धाम बैकुंठ जाना ही था 


     🌋 उसी समय दैवयोग से अति क्रोधी महर्षि दुर्वासा ने आकर श्री राम से तुरन्त मिलने की इच्छा प्रगट की -अवज्ञा करने पर पूरे रघुवंश को श्राप देने की बात कही - श्री राम के "काल" के कहने पर पहले ही मना करने के बाबजूद मजबूरी में लक्ष्मण जी ने श्री राम को दुर्वासा के आगमन की सूचना दी -- तब श्री राम ने अत्यंत दुखी होकर दुर्वासा की सलाह पर , काल को दिए वचन के अनुसार श्री लक्ष्मण को त्याग देने का निश्चय सुनाया -- 

      🎈श्री लक्ष्मण ने सरयू किनारे जाकर ,आचमन किया फिर सम्पूर्ण इन्द्रियों को वश में करके प्राणवायु को रोक लिया --यह देख इन्द्रादि देवता , ऋषि और अप्सराएं उन पर फूलों की वर्षा करने लगे --


      🎃 महाबली लक्ष्मण अपने #शरीर के #साथ ही ,सब मनुष्यो की दृष्टि से #ओझल हो गए --उस समय देवराज इंद्र उन्हें साथ लेकर स्वर्ग में चले गए ।


          भगवान #विष्णु के #चतुर्थ अंश श्री लक्ष्मण जी को आया देखकर सभी देवता हर्ष से भर गए -और सबने प्रसन्नतापूर्वक श्री लक्ष्मण जी की पूजा की ।


****** क्रमशः ************* राम नाथ गुप्त कन्नौज ***********

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