श्री रामायण जी की कथाएँ 145


 पोस्ट ( 145 ) श्री रामायण जी की कथायें -- 🍎 जीवित होते हुये भी मृतक के समान होते हैं, ये चौदह प्रकार के प्राणी -- ( प्रथम भाग )

        कहीं हम आप भी तो इन चौदह तरह के लोगों में शामिल नही हैं ? --सावधान!


        🍎 श्री गोस्वामी तुलसीदास कृत महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड में बालि पुत्र अंगद रावण की सभा में रावण को सीख देते हुए बताते हैं कि कौन-से ऐसे 14 दुर्गुण है जिसके होने से मनुष्य मृतक के समान माना जाता है।

                   कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा । अति- दरिद्र अजसी अति- बूढ़ा।।

                   सदा रोगबस संतत क्रोधी । बिष्नु बिमुख श्रुति संत बिरोधी॥

                   तनु पोषक निंदक अघ खानी । जीवत सव सम चौदह प्रानी॥

 

   🍟 1-- कौल (.वाममार्गी )- कौल मार्ग अर्थात तांत्रिकों का मार्ग। जादू, तंत्र, मंत्र और टोने टोटको में विश्वास करने वाले भी कौल हो सकते हैं। #कौल या वाम का अर्थ यह कि जो व्यक्ति पूरी दुनिया से #उल्टा चले। जो संसार की हर बात के पीछे #नकारात्मकता खोज ले और जो नियमों, परंपराओं और लोक व्यवहार का घोर विरोधी हो, वह वाममार्गी है। ऐसा काम करने वाले लोग समाज को दूषित ही करते हैं। यह लोग उस मुर्दे के समान है जिसके संपर्क में आने पर कोई भी मुर्दा बन जाता है। वामपंथ देश, समाज और धर्म के लिए घातक है।


  🍎 2.--कामबस (कामुक )- काम का अर्थ भोग और संभोग दोनों ही होता है। बहुत से लोगों के लिए उनकी जिंदगी में सेक्स ही महत्वपूर्ण होता है। कहते हैं अत्यंत #भोगी, #विलासी और कामवासना में ही लिप्त रहने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे मौत के मुंह में स्वत: ही चला जाता है। ऐसा व्यक्ति वक्त के पहले ही बूढ़ा हो जाता है। उसे हर तरह के रोग या शोक घेर लेते हैं। ऐसे व्यक्ति के मन की इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होती। वह #कुतर्की भी होता है। जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती । जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है।

 

🍟 3--कृपिन ( कृपण )-- कृपण को प्रचलित शब्द में कंजूस कहते हैं, लेकिन कृपण तो #महाकंजूस होता है। चमड़ी चली जाए लेकिन दमड़ी नहीं देगा वाली कहावत को वह चरितार्थ करता है। ऐसे व्यक्ति द्वारा अर्जित धन का उपयोग न तो वह कर पाता है और न ही उसका परिवार। अति कंजूस व्यक्ति को मृतक समान माना गया है। ऐसा व्यक्ति धर्म-कर्म के कार्य करने में, आर्थिक रूप से किसी कल्याण कार्य के लिए दान देने या उसमें हिस्सा लेने से बचता है।

 

🍟 4--. विमूढ़ा -( #कन्फ्यूज़्ड )इसे भ्रमित बुद्धि का व्यक्ति भी कह सकते हैं। इसे गफलत में जीने वाला और अपने विचारों पर दृढ़ नहीं रहने वाला व्यक्ति भी कह सकते हैं। कुल मिलकार ऐसा व्यक्ति मूढ़ और मूर्ख होता है। ऐसा व्यक्ति खुद कभी निर्णय नहीं लेता। उसकी जिंदगी के हर फैसले कोई दूसरा ही करता है। हर काम को समझने या निर्णय को लेने में किसी अन्य पर आश्रित रहने वाले व्यक्ति को मृतक समान ही माना जाता है। 

 🎈ऐसे ही लोग ईश्वर को छोड़कर कथित बाबाओं, ज्योतिषियों और चमत्कार दिखाने वाले ढोंगी लोगों के यहां शरण लिए हुए होते हैं।

 

🍟 5--.#अति-#दरिद्र- इस दरिद्र शब्द का अर्थ गरीब या निर्धन नहीं होता है। यदि आपके घर में कचरा फैला, सामान अस्त-व्यस्त बिखरा हुआ है तो लोग कहते हैं कि क्या दरिद्रता फैला रखी है। दरिद्रता का संबंध #गंदगी से भी हैं। स्वच्छता से दरिद्रता का नाश होता है। आप कितने ही गरीब हों, लेकिन स्वच्‍छ रहेंगे तो धनवान बनने के रास्ते खुलते जाएंगे। दरिद्रता एक रोग के समान है। दरिद्र या दरिद्रता का सम्मान करने से दरिद्रता पोषित होती 

    🎈 दरिद्रता कई प्रकार की होती है, कोई धन से, कोई आत्मविश्‍वास से, कोई साहस से, कोई सम्मान से और कोई ज्ञान से दरिद्र होता है, लेकिन जिस व्यक्ति में यह सभी दुर्गुण विद्यमान है वह अति दरिद्र व्यक्ति माना गया है। ऐसा व्यक्ति मृतक समान है। ऐसे व्यक्ति की सहायता करने वाला पुण्य प्राप्त करता है।

 

🍟 6. --अजसि- ब्रज मंडल में यश को जस कहा जाता है यह अजसि शब्द इसी से बना है। इसे #अपयश ( बदनामी ) कहते हैं । समाज में ऐसे कई व्यक्ति हैं जिनका घर, परिवार, कुटुंब, समाज, नगर और राष्ट्र आदि किसी भी क्षेत्र में कोई सम्मान नहीं होता है या जिसने कभी सम्मान अर्जित ही नहीं किया । ऐसे व्यक्ति जो विख्यात तो नहीं लेकिन कुख्यात जरूर है। किसी भी कारणवश वे बदनाम हो गये है। बुराई से भी बुरी होती है बदनामी। समझदार व्यक्ति हर प्रकार का नुकसान उठाने के लिए तैयार रहता है बदनामी से बचने के लिए। बदनामी से सब कुछ नष्ट हो जाता है। बदनाम व्यक्ति भी मृतक व्यक्ति के समान होता है।

 

🍟 7---. अति - बूढ़ा- अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृतक के समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है। शरीर और बुद्धि दोनों के ही काम करना बंद कर देने के बाद जिंदा व्यक्ति भी मृतक समान हो जाता है । ऐसे अति बूढ़े व्यक्ति के बारे में उसके परिजन ही उसकी मृत्यु की कामना करने लगते हैं।

     शेष अगली पोस्ट में -----

    ********** क्रमशः ********** राम नाथ गुप्त *********

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