श्री रामायण जी की कथाएँ 141


 पोस्ट~( 141 )~ श्री रामायण जी की कथाऐ -- भगवान् श्री राम ने लंका से लाकर कन्नौज में वामन 

भगवान् की मूर्ति की स्थापना की थी ~श्री पद्म पुराण ( कल्याण ~पुराण कथांक 1989 पृष्ठ 147 / 148 )

      🍓 भगवान् आश्रितों की निरंतर देखभाल करते है ~श्री राम ने अपने भाइयो और भतीजो को विभिन्न राज्यो का राजा नियुक्त कर दिया था ~कुछ समय बाद प्रभु ने ~ उन सब से तथा सुग्रीव और विभीषण से भी ~सभी को सन्मार्ग पर अत्यधिक दृढ बनाने के लिए सबसे अलग अलग मिलना चाहा ।

     श्री राम के स्मरण करते ही पुष्पक विमान हाजिर हो गया और श्री राम ,भरत जी के साथ बैठकर सबसे पहले ~भरत के पुत्रो के राज्य गांधार देश ( अब अफगानिस्तान ) गए फिर पूर्व में लक्षमण जी के पुत्रो द्वारा शाशित देश ~फिर दक्षिण दिशा में भरद्वाज मुनि और अत्रि मुनि को प्रणाम करते हुए श्री सुग्रीव की किषकिन्धापुरी पंहुचे ~सभी के राज्यो का निरीक्षण कर और आवश्यक निर्देश देकर श्री सुग्रीव जी को भी साथ लेकर ~लंका पंहुचे ~


     🎈लंका में श्री विभीषण जी ने प्रभू की पूजाकर रावण के जगमगाते भवन में ठहराया । राजमाता कैकसी से भी मिलकर प्रभु ने - विभीषण को अपने बड़े भाई -कुबेर और देवताओ से मिलकर चलने का आदेश दिया ।

      🎈 वहा वायु देवता ने श्री राम जी से ~लंका में पड़ी हुई श्री वामन भगवान् की मूर्ती को कन्नौज ले जा कर वहां गंगा तट पर प्रतिष्ठित करने की प्रार्थना की ~ विभीषण ने मूर्ती को बहुमूल्य रत्नों से विभूषित कर पुष्पक विमान में अन्य बहुमूल्य भेंटों सहित रखवा दिया ।

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🍓 ----- वामन भगवान की स्वायंभू मूर्ति का इतिहास ---------🍓


      🌰 श्री वामन भगवान् की इस मूर्ती को ,जब रावण लंका का राजा बन गया था ,तब पालात ( अमेरीका ) से राक्षसो द्वारा लंका लाया गया था ~

        जब वामन भगवान् ने दैत्यराज बलि से तीन पग पृथ्वी में उसका राज्य ले लिया था ,तब से बलि पाताल लोक के राजा बन कर वहां रहे थे और वामन (श्री विष्णु भगवान् )उन्हें नित्य दर्शन देने के लिए उनके पहरेदार बने थे ,श्री लक्ष्मी जी ने बलि को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था और अपने पति श्री विष्णु जी ( वामन रूप में ) को वापस मांग लिया था ~

         🍓 इसके बाद दानवराज बलि को रोजाना दर्शन देने का वचन निभाने के लिए - श्री विष्णु जी वामन की मूर्ति के रूप में वहा स्थापित हो गए थे । रावण के लंका के राजा बनने पर पाताल अमेरिका से राक्षस लंका आकर बस गए , वे ही इस वामन भगवान की मूर्ति को अपने साथ लंका लेकर आये होंगे । यही वह वामन भगवान् की स्वयंभू मूति होगी जिसकी लंका में स्थापना रावण के विष्णु द्रोही होने कारण न हो सकी होगी ।

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       🎈 फिर श्री राम जी , पुष्पक विमान पर भरत और सुग्रीव के साथ आरूढ़ होकर समुद्र पार कर ~रामेश्वरम में शिव जी की पूजा कर ~पुष्कर में श्री ब्रम्हा जी से मिलकर , मथुरापुरी में शत्रुघ्न और उनके पुत्रो से मिले और इस प्रकार अपने आश्रितों की देखभाल कर कन्नौज में गंगा तट पर पंहुचे ।


      🎈 प्रभु राम ने श्री भरत जी और वानर राज सुग्रीव के साथ कन्नौज में गंगा जी के तट पर बहुत धूम धाम से ~श्री वामन भगवान की स्थापना की ~विभीषण से प्राप्त धन को कन्नौज में गरीबो और ब्राह्मणों को दान में देकर उन्हें संतुष्ट किया ~यही सें श्री सुग्रीव को किष्किन्धा भेज दिया और स्वयं भरत जी के साथ पुष्पक पर सवार होकर श्री राम अयोध्या वापस चले गए ।

 

     मेरी जानकारी में वर्तमान समय में कन्नौज में श्री वामन भगवान् का कोई मंदिर शायद नही है ~जो भी रहा होगा वह मुग़ल शाशन में अन्य मंदिरो और प्राचीन इमारतों की तरह परिवर्तित या नष्ट हो गया होगा ~

**************** अपनी बात ********

      🎈🎈 क्या आपको पता है कि श्री वामन भगवान की मूर्ति की स्थापना के लिए वायु देवता व भगवान श्री राम ने कन्नौज का ही चयन क्यों किया था --??

        🎃 क्योकि दानववीर दैत्यराज बलि के साम्राज्य की राजधानी -कान्यकुब्ज नगर कन्नौज ही थी । यहां

 श्री गंगा जी के तट पर पुल के पास , जहां आज रिजगिर स्थित है , वहां राजा #बलि के -- आसमान छूते हुए महलों की #स्वर्णिम #अट्टालिकाएं थी --

        🌰 यही श्री राम जी के स्वरूप श्री विष्णु भगवान ने राजा बलि की यज्ञ में वामन रूप में पृगट होकर उनसे तीन पग भूमि मांगी थी 

      🎃🍓 इसलिए वामन रूप में श्री हरि की मूर्ति की स्थापना के लिए कन्नौज से बेहतर कौन सी जगह हो सकती थी ???

  ******* क्रमशः ********* राम नाथ गुप्त कन्नौज --*********

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