श्री रामायण जी की कथाएँ 138


 पोस्ट --( 138 ) -- श्री बालमीक रामायण जी की कथाएँ -- 🎈श्री राम का अश्वमेध यज्ञ और श्री लव और कुश का रामायण गान -- भाग ( १ )- उत्तर कांड - सर्ग 91 से 93 तक

      🍎 श्री भरत और लक्ष्मण जी को अश्वमेध यज्ञ की महिमा की-- राजा इल , पुरुरवा , महात्मा बुध की कथा सुनाकर श्री राम ने आदेश दिया कि अश्वमेध यज्ञ कराने वाले अग्रगण्य ब्राह्मणों और ऋषियो को बुलाया जाए -वामदेव ,जाबालि ,कश्यप आदि अनेको सन्त , महामुनि श्री राम के आमंत्रण पर पधारे -- फिर विशालकाय वानरों के साथ राजा सुग्रीव , राक्षसो के साथ राक्षस -राज विभीषण , तमाम राजा महाराजा ,सन्त मुनि आदि को भी निमंत्रित किया गया --


***** 🎈🎈 श्री राम का अश्वमेध यज्ञ नैमिषारण्य में सम्पन्न हुआ *******

      महर्षियों के परामर्श पर श्री राम जी द्वारा , उत्तम और पवित्र स्थान , नैमिषारण्य में पवित्र गोमती जी के तट पर विशाल यज्ञमण्डप बनवाया गया -- श्री राम का आदेश हुआ जो भी यज्ञ में आमंत्रित व्यक्ति आये उन्हें विधिपूर्वक , #तुष्ट , #पुष्ट ,और #सम्मानित किया जाए --इस उद्देश्य से तमाम भोजन सामिग्री , धन , व आवश्यक वस्तुएं ,नरेशो व आगंतुकों के समुचित आवास बनाने के लिए कारीगर , मनोरंजन करने वाले नट , सेनाएं , आदि अयोध्या से #नैमिषारण्य को रवाना किये गए -- तदन्तर शत्रुघ्न सहित भरत ने नैमिषारण्य को प्रस्थान किया ।

       🍎 फिर सभी को नैमिषारण्य भेजकर श्री राम ने उत्तम लक्षणो से सम्पन्न , कृष्णसार म्रग , के समान काले रंग के एक घोड़े को छोड़ा और ऋतवजो व सेना सहित श्री लक्ष्मण को उस घोड़े की रक्षा के लिए नियुक्त करके भगवान श्री राम जी ,सेना के साथ नैमिषारण्य पँहुचे --वहां विभिन्न स्थानों से आये हुए राजाओ ने भेंट देकर चक्रवर्ती महराजा श्री राम को सम्मानित किया - शत्रुघ्न सहित भरत उन सभी आगंतुक राजाओ के स्वागत सत्कार में लग गये--

 

       🎈 ब्राह्मणों को भोजन परोसने की जिम्मेदारी वानरों को --

          सुग्रीव सहित महामनस्वी वानर ,परम् पवित्र और संयम -चित्त होकर उस समय वहां ब्राह्मणों को भोजन परोसते थे --

          बहुतेरे राक्षसों से घिरे हुए राक्षस राज विभीषण वहां अत्यंत सावधान रहकर उग्र तपस्वियों के सेवा कार्य मे लगे रहते थे 

          इस प्रकार राजा राम जी का , सुंदर ढंग से , अति उत्तम विधि से अश्वमेध यज्ञ का कार्य प्रारम्भ हुआ --और श्री लक्ष्मण जी के संरक्षण में रहकर घोड़े के भूमण्डल में भ्रमण का कार्य भी सम्पन्न हो गया --


      🎈"जब तक याचक संतुष्ट न हों तब तक उनकी इच्छा के अनुसार सभी वस्तुएं दिए जाओ " -

       सब ओर यही सुनाई देता था --इसके पूर्व ऐसा यज्ञ कभी नही हुआ था - राज सिंह भगवान श्री राम का ऐसा सर्वगुण सम्पन्न यज्ञ एक वर्ष से भी अधिक काल तक चलता रहा , उसमे कभी किसी बात की कोई कमी नही हुई


     🎆 महातेजस्वी , आत्मज्ञानी ,महर्षि बाल्मीक , अपने हष्ट पुष्ट दो बालक शिष्यों , कुश और लव के साथ उस यज्ञ में पधारे , और राजा श्री राम तथा बहुसंख्यक महात्मा मुनियो द्वारा भलीभांति पूजित और सम्मानित हुए 


      🎈 -अपने गुरु श्री बाल्मीक जी के आदेश पर दोनों भाई लव और कुश ने एकाग्रचित होकर ,सब ओर घूम फिर कर बड़े आनन्द के साथ श्री बाल्मीक द्वारा रचित , संपूर्ण रामायण काव्य का गान किया -- वीणा के सातों सुरों , संगीत के मूल तत्वों से सम्पन्न वह मधुर गायन सुनकर श्री राम ने उन दोनों कुमारो को सभा मे गायन करने के लिए बुलाया -

  नोट -- 🎃श्री बाल्मीक रामायण में लव कुश द्वारा यज्ञ के घोड़े को पकड़ने और युद्ध की कथा नही है 🎃****** शेष अगली पोस्ट में ********** राम नाथ गुप्त कन्नौज ***********

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