पोस्ट --( 136 ) श्री रामायण जी की कथायें -- राजाधिराज भगवान श्री राम चन्द्र जी द्वारा अश्वमेध यज्ञ करने के विचार विमर्श के दौरान वृत्तासुर वध और इंद्र को ब्रम्हहत्या से मुक्ति मिलने की कथा का विवरण --
श्री बाल्मीक रामायण -- उत्तर काण्ड -सर्ग 83 से 86तक
🎆 एक दिन राजा श्री राम जी ने अपने भाइयों को बुलाकर कहा कि उनकी इच्छा " राजसूय यज्ञ " करने की है -- तब श्री लक्ष्मण जी ने निवेदन किया कि राजसूय यज्ञ की बजाय अश्वमेध यज्ञ करना उत्तम होगा -
वे बोले -
🎈 "" रघुनन्दन ! अश्वमेध नामक महान यज्ञ , समस्त पापो को दूर करने वाला , परम् पावन और दुष्कर है-अतः आप इसका आयोजन करें - प्राचीन काल मे जब देवराज इंद्र को ब्रम्ह हत्या लगी थी तब वे इसी से पवित्र हुए थे""
इसका वर्णन महाभारत -शान्ति पर्व --( भाग 1 ) में भी मिलता है । शरशैया पर पडे़ हुए श्री भीष्म जी -राजा युधिष्ठिर को राज धर्म का उपदेश देते हुए बताते है -
🍎 "" पुराने समय में वृत्तासुर ने तप करके वरदान में अद्भुत पराक्रम व् मायावी शक्क्तियां प्राप्त की थी -फिर उसने सारे संसार के राजाओं को हरा करके इन्द्रलोक पर भी अधिकार कर लिया था -बाद में उससे मुक्ति के लिए भगवान् शंकर जी व् श्री विष्णु जी के सहयोग से इंद्र ने जबाबी हमला किया । तब भगवान् शंकर के तेज के भीषण " माहेश्वर ज्वर " ने वृत्तासुर के शरीर में प्रवेश कर उसे आक्रान्त कर मोहित किया ; और भगवान् विष्णु की शक्ति इंद्र के वज्र में प्रविष्ट हुई । तब वज्र से इंद्र ने वृत्तासुर का वध कर दिया ।""
🍎"" तब - वृत्तासुर के शरीर से निकली ब्रम्हहत्या देवराज इंद्र में प्रवेश कर गयी । इससे आक्रांत इंद्र सबसे दूर जाकर एक पर्वत की गुफा में छिप गए । इंद्र के गायब हो जाने से त्रिलोकी की व्यवस्थाएं गड़बड़ हो गयी - देवताओ को श्री ब्रम्हा जी के सहयोग से इंद्र के छिपने के स्थान का पता चला - तब ब्रम्हा जी की राय से देवताओ ने जहां इंद्र थे वहां जाकर उनके लिए उन्ही के द्वारा अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न कराया । यज्ञ के अंत मे इंद्र ब्रम्हहत्या से मुक्त हुए --तब श्री ब्रम्हा जी ने ब्रम्ह हत्या को रहने के लिए चार स्थान दिए -
🎃 1- अग्नि --- जो अग्नि लगाकर दूसरे को सताए - वहाँ
2- जो लोग अनावश्यक रूप से विशेषकर पुण्य तिथियो पर पेड़ व वनस्पतियों को काटें वहाँ
3- वेश्याएं और रजस्वला स्त्री से सम्बन्ध बनाने वाले पुरुष -
4- जो व्यक्ति बुद्धि की मंदता से नदियो में थूक खखार मलमूत्र और गंदगी डालकर जल को अपवित्र
करे - उन्हें -
🎈 इन चारो को ब्रम्ह ह्त्या के पाप लगने का विधान श्री ब्रम्हा जी ने किया है -आज पर्यावरण और जल संरक्षण पर बहसें चलाने वाले एक बार पौराणिक कथाओं जिन्हें मिथक कह कर हँसी उड़ाते है ; इससे सही शिक्षा ले --
फिर श्री लक्ष्मण जी ने श्री राम जी को बुध ,इला और पुरुरवा का भी इतिहास सुनाया ---
************ क्रमशः ******अध्यात्मिक व्याख्या -- -----
वृत्तासुर - माहेश्वर ज्वर -इंद्र द्वारा वध --इस कथा का आखिर भावार्थ क्या है ?
-अब हम कथा के अध्यात्मिक रूप पर विचार करैं --
सुर और असुरो का युद्ध पुरातन समय से चलता आ रहा है -वृत्तासुर का छन्दि विच्छेद करे माने वृत्ति + असुर ---माने वे सभी व्यक्ति जिनका आचरण आसुरी है वे वृत्तासुर के प्रतीक है -
सुर माने जो दूसरो के सुर (हित ) में अपना सुर (कार्य) मिलाकर चले -यानी परोपकारी साधू वृत्ति वाले -- और असुर माने जो अपने स्वार्थ में अंधे हो और दूसरो को कष्ट पहुचाने में जिन्हें आनंद मिलता हो
"-बिछुरत एक प्राण हरि लेहीं ( ये सुर हैं ) । और मिलत एक दुःख दारुण देही ( ये असुर है )" -
🌎 अपनी शक्ती -सम्पन्नता -साधनों और शाशन पर पकड के कारण आसुरी वृत्ति वाले वृत्तासुर शुरू में हमेशा जीतते आये है -ऐसा ही यहाँ भी हुआ -तब परेशान होकर भगवान् शंकर व श्री विष्णु जी की शरण सब देवता (सुर) गए
भगवान् शंकर ने माहेश्वर ज्वर उत्पन्न कर वृत्तासुर को मोहित व अकर्मण्य कर दिया । ज्वर क्या है ?
राम चरित मानस उत्तर काण्ड दोहा 120--121-
🎈🎈 "मोह सकल व्याधिंह कर मूला । तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सुला ।।
"काम बात कफ लोभ अपारा । क्रॊध पित्त नित छाती जारा ।।
"प्रीति करहिं जो तीनहु भाई । उपजहि सन्यपात दुखदाई ।।
🎈 मतलब - विजयी असुर वृत्ति के लोगो में : आपस में मोह : काम की दुर्भावना : लोभ और फिर क्रोध पैदा कर उनमे आपस में #जबरदस्त #फूट और #वैर पैदा कर दिया ----और तब भगवान् विष्णु ने अपना तेज इंद्र के वज्र में मिला दिया -यानी #पूर्ण #ताकत से #हमला कर वृत्तासुर का वध कर दिया -
🎈जीत के लिए दुश्मन में आपसी फूट कितनी जरूरी होती है ।** श्री भीष्म जी द्वारा ब्रम्हहत्या के समान भयंकर पापो को भी बाताया गया
1- अग्नि का दूसरो को कष्ट देने के लिए दुरूपयोग
2- वेश्याओ और रजस्वला महिलाओं से सम्बन्ध
3 - पेडो वनस्पतियो और जंगलो का विनाश
4 - नदी व् जल कुंडो में गंदगी डालना -उनमे मल मूत्र करना
🎈🎈पर्यावरण -नदी व् जल शुद्धी तथा समाज मे नैतिकता पैदा करना --असुर वृत्ति की समाप्ति -इसमें यह कथा कितनी उपयोगी है --काश इन कथाओं को शिक्षा की पुस्तको में स्थान मिलता ---
***** क्रमशः ********** राम नाथ गुप्त कन्नौज *******************

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें