श्री रामायण जी की कथाएँ 132


 पोस्ट --( 132 ) श्री रामायण जी की कथाएँ - 🎈-शम्बूक वध कथा की असलियत ~~ 

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    शम्बूक वध की कथा द्वारा श्री राम पर जातिभेद का झूठा लांछन लगाया जाता है ~जानिए कथा क्या है ~

     शम्बूक वध की कथा राम चरित मानस में नही है ~बाल्मीक रामायण में विवरण है ~पहले ऐसे दीनबंधु प्रभु राम के बारे में जानिए~जिन्होंने अत्यंत छोटी जाति के निषादराज को मित्र ही नही भाई बनाया था ~देखिए जब श्री भरत जी ,श्री राम से मिलने चित्रकूट जा रहे थे तब जब निषाद ने भरत जी को दंडवत प्रणाम किया तब ~( अयोध्याकाण्ड 193 )~

        करत दंडवत देखि तेहि , भरत लीन्ह उर लाइ । मनहु लखन से भेंट भई ,प्रेम न ह्रदय समाइ ।।

  🎃 स्वपच ,सबर,खस,जमन जड़ ,पांमर कोल किरात । राम कहत पावन परम् होत भुवन विख्यात ।। ~194


   किसी भी छोटी से छोटी जाति का क्यों न हो ,राम कहते ही परम पावन होकर प्रसिद्द हो जाता है  

         🎈अत्यंत छोटी जाति की परम भक्त शबरी के झूठे बेर खाते हुए श्री राम कहते है~

    कह रघुपति सुनु भांमिन बाता ,मानहुँ एक भगति कर नाता ।( अरण्य काण्ड दोहा 34 चौ 4 ) 

और केवल मनुष्य ही नही ~सबसे तिरस्कृत पक्षी जटायु ने जब सीता जी की ऱक्षा के प्रयास में अपनी जान दी ~रावण द्वारा मारा गया तब श्री राम ने पिता के समान इज्जत देकर उसका अंतिम संस्कार किया और उसे मुक्ति प्रदान करते हुए अपने धाम भेजा ~( अरण्य काण्ड दोहा 32 )~

  अबिरल भगति माँगि बर ,गीध गयउ हरि धाम । तेहि की क्रिया जथोचित ,निज कर कीन्ही राम ।।

  भालू और बंदरो को मित्र ही नही ,अपने समान बनाया ~राम पेड़ो के नीचे और कपि डाल पर~


   🎈प्रभु तरु तर , कपि डाल पर , ते किये आपु समान ।

               तुलसी कंहू न राम से साहिब सील निधान ।।


     ऐसे प्रभु राम पर जातिवादी भेदभाव के लांछन ~अब जानिए राम राज्य के हाल~ 

           राम राज्य बैठे त्रैलोका । हर्षित भए गए सब शोका।।

           बयर न कर काहू सन कोई । राम प्रताप बिषमता खोई ।।

           दैहिक दैविक भौतिक तापा । राम राज्य नहि काहुहि व्यापा ।। ( उत्तर काण्ड दोहा 19 से 21)

          सब नर करहिं परस्पर प्रीती । चलहिं स्वधर्म निरति श्रुति नीती ।।

     🎈अल्प मृत्यु नहीं कवनिहु पीरा । सब सुन्दर सब बिरज सरीरा।।

      राम राज्य में राजा और सभी प्रजा जनों के धर्मानुकूल आचरण की वजह से किसी की अल्प

आयु में मृत्य नही होती थी

 ********* शम्बूक वध की कथा *****

       🎆 बाल्मीक रामायण उत्तर कांड सर्ग 73 से 76 में कथा है ~एक बार श्री राम जब राज दरबार मैं मौजूद थे तभी एक ब्राह्मण ने अपने युवा पुत्र के मृत शरीर को लाकर राजद्वार पर रख दिया और अन्यन्त दुखी होकर अपने युवा पुत्र की मृत्यु के लिये श्री राम को जिम्मेदार मानकर विलाप करने लगा ~उपस्थित मुनियों के सुझाव पर श्री राम ने ,पुष्पक विमान से राज्य का निरीक्षण करने पर ~, शम्बूक को एक पेड़ की डाली पर रस्सी से पैरो को बांधकर ,उल्टा लटक कर तपस्या करते पाया ~ ध्यान दें ****


        🎃****सभी साधनो की तरह तपस्या भी तीन प्रकार की होती है~

  1~सात्विक , जो सारे जगत के कल्याण के लिए हो 

  2-राजस् ~जो निजी कामनाओ की पुर्ति के लिए ,परंतु जिससे किसी दुसरे की हानि न हो और


   3~तामस ~जो अपना लाभ हो या न हो परंतु दूसरो को हानि पंहुचाने के लिए की जाती है 🎃


   🎆🍎 शम्बूक की उलटे लटककर की जा रही तपस्या ~#तामसी प्रवत्ति की थी जिसका #दुष्परिणाम ~अल्पायु में बालक की #मृत्यु~हुआ और भविष्य में भी तमाम दुष्परिणाम होते ~इस लिए श्री राम ने शम्बूक का वध किया ~शम्बूक के वध होते ही वह मृत बालक तुरंत #जीवित हो गया 


      🎃 भगवान् श्री राम ने जहां एक ओर ~ श्री विश्वामित्र के सात्विक परोपकार के लिए होते यज्ञो की ऱक्षा की वही मेघनाद और रावण के द्वारा किये जा रहे तामसी यज्ञो ~""आहुति देत रुधिर और भैंसा""~जो अगर पूर्ण हो जाते तो आततायी दोनों को मारना बहुत कठिन हो जाता ~का विध्वंस श्री हनूमान जी व बानरो द्वारा कराया ।


     🎆 श्री राम जी ने कभी विचार नही किया कि रावण मेघनाद आदि ब्राम्हण है ~आततायी होने के कारण इन (ब्राम्हणो )के वंश का ही नाश कर दिया ~तब तामसी जिससे दूसरो की मृत्यु भी हो रही हो ~ऐसे शम्बूक के वध पर जाति आधारित बाते क्यों ?? 

     *** क्रमशः ************** राम नाथ गुप्त *************

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